सूर्य के भीतर के चुंबकीय क्षेत्र की नई समझ से अंतरिक्ष मौसम पूर्वानुमान को मिलेगी मजबूती
हिंदुस्तान न्यूज़ एक्सप्रेस कानपुर | आईआईटी कानपुर के शोधकर्ताओं ने अंतरिक्ष उपग्रहों से प्राप्त 30 वर्षों के सतही प्रेक्षणीय आंकड़ों को एक त्रि-आयामी संगणकीय मॉडल में संयोजित कर पहली बार सूर्य के भीतर मौजूद चुंबकीय क्षेत्र का मानचित्रण किया है। यह अध्ययन तीन दशकों की अवधि में सूर्य के भीतर चुंबकीय क्षेत्रों की तीव्रता, संरचना और विकास का एक अद्वितीय आकलन प्रस्तुत करता है, जो यह समझने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है कि हमारा सूर्य किस प्रकार अंतरिक्ष मौसम को संचालित करता है, जो उपग्रहों, रेडियो संचार, नेविगेशन प्रणालियों और तकनीकी परिसंपत्तियों को बाधित कर सकता है।सौर चुंबकीय गतिविधि को समझना उन अंतरिक्ष-मौसम घटनाओं की व्याख्या और पूर्वानुमान के लिए आवश्यक है, जो पृथ्वी पर उपग्रहों, विद्युत ग्रिड, नेविगेशन और संचार प्रणालियों को प्रभावित कर सकती हैं। यह गतिविधि स्थिर नहीं रहती; बल्कि यह लगभग हर 11 वर्षों में बढ़ती और घटती है, एक नियमित चुंबकीय चक्र का अनुसरण करते हुए, जो सौर कलंको (सनस्पॉट्स) और सौर विस्फोटों की उपस्थिति को नियंत्रित करता है। यही चक्र सनस्पॉट्स और सौर विस्फोटों की उपस्थिति को संचालित करता है। इस चक्रीय व्यवहार के पीछे का भौतिक तंत्र‘सौर डायनेमो’ है—एक ऐसी प्रक्रिया जिसके माध्यम से सूर्य अपने गहरे आंतरिक भाग में चुंबकीय क्षेत्र उत्पन्न करता है। चूंकि यह क्षेत्र सूर्य की सतह के नीचे छिपा रहता है, इसलिए वैज्ञानिक इसे प्रत्यक्ष रूप से नहीं देख सकते। हालांकि, आधुनिक उपकरण सूर्य की सतह के चुंबकीय क्षेत्र को अभूतपूर्व विस्तार से माप सकते हैं, लेकिन सूर्य के आंतरिक भाग तक सीधे पहुंच न होने के कारण लंबे समय से वहां मौजूद चुंबकीय क्षेत्र की तीव्रता और व्यवहार का अनुमान लगाने में सीमाएं रही। सूर्य के भीतर मौजूद चुंबकीय क्षेत्र का विश्वसनीय आकलन उपलब्ध न होना, सौर डायनेमो की कार्यप्रणाली से जुड़े सिद्धांतों की जांच और उन्हें परिष्कृत करने में एक प्रमुख बाधा रहा है। आईआईटी कानपुर के भौतिकी विभाग के पीएचडी छात्र सौम्यदीप चटर्जी और उनके प्रो. गोपाल हज़रा के साथ हाल ही में एक अध्ययन द एस्ट्रोफिजिकल जर्नल लेटर्स में प्रकाशित किया है |
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