यूपीयूएमएस सैफई के गैस्ट्रो सर्जरी विo की बड़ी सफलता : एआई तकनीक से पकड़े गये जानलेवा गैस्ट्रिक कैंसर का सफल इलाज।
हिंदुस्तान न्यूज़ एक्सप्रेस सैफई, इटावा। विमलेश कुमार उम्र 42 वर्ष यूपीयूएमएस सैफई के गैस्ट्रो सर्जरी ओपीडी में डॉ कन्हैया लाल चौधरी को पेट दर्द की समस्या दिखाने आये थे। डॉ चौधरी ने मरीज के बताए लक्षण के आधार पर बीमारी की गंभीरता को समझते हुए एआई आधारित एंडोस्कोपी मशीन से गैस्ट्रीक कैंसर और उसके प्रकृति का तत्काल पता लगाया जो चिकित्सा क्षेत्र में एआई के कारण ही संभव हो पाया। इस बीमारी में सर्जरी की तुरंत आवश्यकता थी जिसके लिए मरीज को भर्ती कर आपरेशन के लिए तैयार किया जाना भी एक जटिल समस्या थी क्योंकि इस तरह के ऑपरेशन में मरीज के जोड़ खुलने, खांसी आने, छाती में पानी एवं सांस फूलने से मरीज की जान को खतरा रहता है । इस सब चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए डॉ कन्हैया लाल चौधरी ने मरीज की बीमारी के कारण रक्त की अत्यधिक मात्रा में कमी होने से मरीज को 4 यूनिट ब्लड चढा कर टोटल गैस्ट्रेक्टोमी एवं बायपास ऑपरेशन से सफल इलाज किया। मरीज ने ऑपरेशन के 5 दिन बाद ही पानी पीना और 7 दिन बाद भोजन लेना शुरू कर दिया।
डॉक्टर कन्हैया लाल चौधरी से बातचीत में उन्होंने इस बीमारी के लक्षण, जटिलता एवं इसमें एआई तकनीक के प्रयोग एवं इस खतरनाक बीमारी के बचाव के बारे में विस्तृत जानकारी देते हुए कहा कि गैस्ट्रीक कैंसर एक प्रकार का ट्यूमर है जो हमारे पेट में बन जाती है। इस समस्या से पीड़ित व्यक्ति को खून की कमी, भूख की कमी, वजन घटना, पेट दर्द काले मल जैसी समस्याएं रहती है। यह बीमारी प्रति एक लाख लोगों में 9 से 10 व्यक्तियों में भारत में पायी जाती है और मुख्यतः 60 से 80 वर्ष आयु वाले व्यक्ति इसकी चपेट में आते हैं । इसके कारणों में प्रमुख नमक के अत्यधिक सेवन, तला-भूना फास्ट फूड, कम मात्रा में फलों का सेवन, हरी सब्जियों की कमी, साफ सूथरे पेयजल की समस्या एवं पारिवारिक इतिहास शामिल हैं। इसका इलाज प्रारंभिक स्तर पर एंडोस्कोपिक सर्जरी एवं उन्नत अवस्था में टोटल गैस्ट्रेक्टॉमी विधि से इलाज किया जाता है। अगर ट्यूमर का आकार बढ़ जाता है तो सर्जरी एवं कीमो अथवा दोनों से ही मरीज की बीमारी को ठीक किया जाता है। अगर कैंसर पूरी तरह से फैल गया तो उसका सिर्फ पैलिएटिव कीमोथेरेपी से इलाज संभव है।
आगे बताते हुए डॉ चौधरी ने कहा कि में मा0 कुलपति डॉ अजय सिंह के मार्गदर्शन से यूपीयूएमएस सैफई एआई आधारित मशीनों की सहायता से चिकित्सा क्षेत्र में एआई का माडल हब बनता जा रहा है। एआई तकनीक से ट्यूमर के आकार एवं प्रकृति के बारे में पता करना अब जटिल प्रक्रिया नही रही। शुरूआती स्तर पर ही बीमारी का पता चल जाने पर इलाज आसान हो गया है, और मरीजों की ठीक होने की संभावना भी काफी बढ़ जाती है।