यूनीवर्सिटी के विधि विभाग में क्लाइमेट विदिन
- लीगल फ्रंटियर्स ऑफ क्लाइमेट चेंज एंड बियॉन्ड विषय पर जागरूकता कार्यक्रम
-जलवायु परिवर्तन से मानव स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रभावों एवं पर्यावरण प्रदूषण पर जतायी चिंता: डॉ.प्रतिमा
हिंदुस्तान न्यूज़ एक्सप्रेस कानपुर।सीएसजेएमयू के अटल बिहारी वाजपेयी स्कूल ऑफ लीगल स्टडीज़ द्वारा गीता अनुरागी फाउंडेशन एवं विवेकानंद स्टडी सर्किल के संयुक्त तत्वावधान में क्लाइमेट विदिन: लीगल फ्रंटियर्स ऑफ क्लाइमेट चेंज एंड बियॉन्ड" विषय पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। स्कूल ऑफ लीगल स्टडीज़ की निदेशक डॉ. स्मृति रॉय ने जलवायु परिवर्तन के प्रति जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता पर बल दिया। विभिन्न विशेषज्ञों ने पर्यावरण संरक्षण, सतत विकास तथा जलवायु परिवर्तन से जुड़े कानूनी एवं सामाजिक पहलुओं पर अपने विचार साझा किए।सीएसजेएमयू की डीन एवं निदेशक (सस्टेनेबिलिटी) डॉ. शिल्पा देशपांडेय कायस्थ ने कहा कि सतत विकास केवल पर्यावरण संरक्षण तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सामाजिक, आर्थिक एवं संस्थागत विकास का भी महत्वपूर्ण आधार है। कार्यक्रम की अतिथि जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज एवं एलएलआरएच अस्पताल के प्रसूति एवं स्त्री रोग विभाग की एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. प्रतिमा वर्मा ने जलवायु परिवर्तन के मानव स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रभावों एवं पर्यावरण प्रदूषण पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि पर्यावरण प्रदूषण और बढ़ते प्लास्टिक अपशिष्ट का हमारी पीढ़ी और आने वाली पीढ़ियों पर पड़ने वाला प्रभाव अत्यंत चिंताजनक है। यही चिंता उन्हें पर्यावरण संरक्षण के प्रति अधिक संवेदनशील बनने और दूसरों को भी जागरूक करने के लिए प्रेरित करती है। गीता अनुरागी फाउंडेशन के अध्यक्ष नागेंद्र मिश्रा ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल सरकार या संस्थाओं की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक का नैतिक दायित्व है।कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण "धरती को आया बुखार" शीर्षक पर आधारित नाटक रहा, जिसने जलवायु परिवर्तन और पर्यावरणीय संकट के दुष्प्रभावों को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत कर उपस्थित लोगों को जागरूक किया। सभी प्रतिभागियों ने पर्यावरण संरक्षण, जीवनशैली अपनाने तथा स्वच्छ, हरित एवं जिम्मेदार समाज के निर्माण के लिए सामूहिक संकल्प लिया।