रबी गोष्ठी का हुआ आयोजन, जैविक खेती और श्रीअन्न पर जोर
हिंदुस्तान न्यूज़ एक्सप्रेस कानपुर नगर रबी की पैदावार बढ़ाने के साथ खेती को रसायनों से मुक्त करने की दिशा में ठोस पहल के रूप में चन्द्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय स्थित लाल बहादुर शास्त्री कृषक सभागार में जनपद स्तरीय रबी उत्पादकता गोष्ठी, तिलहन मेला एवं उत्तर प्रदेश मिलेट्स पुनरोद्धार योजना के अंतर्गत मिलेट्स रेसिपी कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह ने की। बिल्हौर विधायक राहुल बच्चा सोनकर मुख्य अतिथि तथा मुख्य विकास अधिकारी दीक्षा जैन विशिष्ट अतिथि रहीं।
मेले में कृषि विभाग, बीज, कृषि रक्षा, मृदा परीक्षण, रेशम, उद्यान, इफ्को, जैविक खेती सहित सार्वजनिक व निजी क्षेत्र के स्टाल लगाए गए। जनपद के विभिन्न क्षेत्रों से पहुंचे किसानों ने विभागीय योजनाओं से जुड़ा साहित्य प्राप्त कर आधुनिक कृषि तकनीकों की जानकारी ली।
मुख्य अतिथि राहुल बच्चा सोनकर ने जल, वायु और मृदा संरक्षण को किसानों के लिए जीवनरेखा बताते हुए कहा कि देश की बड़ी आबादी कृषि पर निर्भर है। उन्होंने अमृत सरोवरों के माध्यम से जल संरक्षण को प्रभावी पहल बताया और कहा कि अधिक उत्पादन की लालसा में अंधाधुंध उर्वरक प्रयोग से न केवल गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ रहा है बल्कि भूमि के बंजर होने की आशंका भी बन रही है। उन्होंने कहा कि आज यह तय करने का समय है कि हम आने वाली पीढ़ी को कैसी धरती सौंपेंगे। वृक्षारोपण को उन्होंने पर्यावरण संरक्षण की दिशा में निर्णायक कदम बताया।
जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह ने श्रीअन्न एवं जैविक खेती को बढ़ावा देने का आह्वान करते हुए किसानों से कृषि क्षेत्र में हो रही नवीन प्रगति से लगातार अपडेट रहने की अपील की।
मुख्य विकास अधिकारी दीक्षा जैन ने कहा कि अत्यधिक रसायनों और उर्वरकों के अंधाधुंध प्रयोग से वायु, जल और मृदा प्रदूषण बढ़ रहा है, जिससे गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं भी सामने आ रही हैं। उन्होंने किसानों से कम क्षेत्रफल से जैविक खेती शुरू करने की अपील की, जिससे स्वयं के लिए सुरक्षित और पौष्टिक आहार उपलब्ध हो सके। उन्होंने बताया कि जैविक उत्पादों का बाजार मूल्य अधिक होता है, जिससे किसानों की आमदनी बढ़ती है। उन्होंने मृदा परीक्षण के आधार पर उर्वरक उपयोग की सलाह देते हुए कहा कि जनपद की साधन सहकारी समितियों में डीएपी और एनपीके पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है। साथ ही श्रीअन्न फसलों के उत्पादन को बढ़ाने और जल संचय पर विशेष ध्यान देने का आह्वान किया।
उप कृषि निदेशक आर एस वर्मा ने किसानों को विभागीय योजनाओं की जानकारी देते हुए कहा कि जैविक खेती से उत्पादन को स्थायित्व मिलता है। परंपरागत संसाधनों के उपयोग से फसल की गुणवत्ता सुधरती है और उत्पादकता में वृद्धि होती है, जिसका सीधा लाभ किसानों की आमदनी पर पड़ता है।
कार्यक्रम के दौरान जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह, विधायक राहुल बच्चा सोनकर एवं मुख्य विकास अधिकारी दीक्षा जैन ने मेले में लगे विभिन्न स्टालों का निरीक्षण किया और किसानों से संवाद कर उनका उत्साहवर्धन किया।
कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के वैज्ञानिक अखिलेश मिश्रा, रामजी गुप्ता, अरविन्द कुमार, सर्वेश कुमार और महक सिंह तथा सेवानिवृत्त सहायक विकास अधिकारी शिव आसरे पाण्डेय ने किसानों को नवीन कृषि तकनीकों की जानकारी दी और उनकी तकनीकी समस्याओं का समाधान किया। मंच संचालन शिव आसरे पाण्डेय ने किया।