संघर्ष के 450 दिन पूरे : निजीकरण वापसी तक संघर्ष जारी रखने का संकल्प |
हिंदुस्तान न्यूज़ एक्सप्रेस कानपुर | पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के प्रस्तावित निजीकरण के विरोध में चल रहे आंदोलन के 450 दिन पूरे होने पर आज केस्को में बिजली कर्मचारियों, संविदा कर्मियों, जूनियर इंजीनियरों और अभियंताओं ने व्यापक विरोध प्रदर्शन कर निजीकरण के निर्णय की वापसी तक संघर्ष जारी रखने का संकल्प लिया।
संघर्ष समिति के पदाधिकारियों पी एस बाजपई, रफीक अहमद एवं वरिष्ठ नेता बी के अवस्थी, आरिफ बेग ने कहा कि पिछले 450 दिनों से बिजली कर्मचारी पूरी तरह शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन चला रहे हैं, इसके बावजूद पावर कॉरपोरेशन प्रबंधन द्वारा कर्मचारियों के विरुद्ध मनमाने ढंग से उत्पीड़नात्मक कार्रवाई की गई है, जिससे कर्मचारियों में गहरा असंतोष है। समिति ने स्पष्ट किया कि निजीकरण की वापसी के साथ-साथ आंदोलन के दौरान कर्मचारियों पर की गई सभी उत्पीड़नात्मक कार्रवाइयों को तत्काल वापस लिया जाना भी उनकी प्रमुख मांगों में शामिल है। संघर्ष समिति ने कहा कि यह आंदोलन अपनी तरह का अनूठा आंदोलन है, जिसमें बिजली कर्मचारी उपभोक्ताओं और किसानों को साथ लेकर संघर्ष कर रहे हैं। आंदोलन के बावजूद बिजली कर्मी किसानों और आम उपभोक्ताओं की शिकायतों का निस्तारण सर्वोच्च प्राथमिकता पर कर रहे हैं, ताकि बिजली व्यवस्था प्रभावित न हो। संघर्ष समिति के पदाधिकारियों ने चेतावनी दी कि पूर्वांचल और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगमों के निजीकरण का सबसे अधिक दुष्प्रभाव किसानों और आम उपभोक्ताओं पर पड़ेगा, जिससे बिजली दरों में वृद्धि, सेवा गुणवत्ता में गिरावट और ग्रामीण क्षेत्रों की उपेक्षा जैसी गंभीर समस्याएँ उत्पन्न होंगी। आंदोलन के 450 दिन पूरे होने के अवसर पर आज बिजली कर्मचारियों ने कानपुर में उपभोक्ताओं और किसानों से संपर्क कर उन्हें निजीकरण के संभावित दुष्प्रभावों के बारे में जागरूक किया। संघर्ष समिति ने पुनः स्पष्ट किया कि बिजली कर्मियों का यह आंदोलन उपभोक्ताओं के हित, किसानों के भविष्य और कानपुर की सार्वजनिक बिजली व्यवस्था को सुरक्षित रखने के लिए है, और निजीकरण के निर्णय की वापसी तक यह संघर्ष निरंतर जारी रहेगा।