रबी दलहन अनुसंधान की आगामी कार्ययोजना को मिली अंतिम रूपरेखा
हिंदुस्तान न्यूज़ एक्सप्रेस कानपुर। चन्द्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विवि में अखिल भारतीय समन्वित रबी दलहन अनुसंधान परियोजना की 31वीं वार्षिक समूह बैठक के अंतिम दिन रविवार को आयोजित समापन समारोह में वर्ष 2026-27 के लिए रबी दलहन अनुसंधान की तकनीकी कार्ययोजना को अंतिम रूप दिया गया। दो दिवसीय इस महत्वपूर्ण वैज्ञानिक बैठक में देशभर से जुड़े कृषि वैज्ञानिकों एवं विषय विशेषज्ञों द्वारा रबी दलहन फसलों के अनुसंधान, उत्पादन, फसल सुधार एवं फसल संरक्षण से संबंधित विभिन्न पहलुओं पर गहन मंथन किया गया।समापन समारोह की अध्यक्षता सीएसए के कुलपति डॉ संजीव गुप्ता द्वारा की गई तथा सह-अध्यक्षता आईसीएआर के सहायक महानिदेशक (तिलहन एवं दलहन) डॉ. एस.के. झा ने की। डॉ. संजीव गुप्ता, कुलपति द्वारा अपने अध्यक्षीय संबोधन में कहा कि बैठक में तैयार की गई तकनीकी कार्ययोजना से रबी दलहन फसलों की उत्पादकता, गुणवत्ता एवं उत्पादन क्षमता में वृद्धि के साथ-साथ किसानों के लिए उन्नत तकनीकों के प्रभावी हस्तांतरण को गति मिलने की उम्मीद है। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि देश में दलहन उत्पादन को आत्मनिर्भर बनाने के लिए वैज्ञानिक अनुसंधान और खेत स्तर पर तकनीक के प्रभावी प्रसार के बीच बेहतर समन्वय आवश्यक है।समारोह में डॉ. एस.के. झा, सहायक महानिदेशक (तिलहन एवं दलहन), आईसीएआर ने अपने विचार रखते हुए रबी दलहन अनुसंधान को किसानों की आवश्यकताओं के अनुरूप अधिक प्रभावी बनाने तथा विकसित तकनीकों को खेत तक पहुंचाने पर जोर दिया। कार्यक्रम में निदेशक, भारतीय दलहन अनुसंधान संस्थान डॉ जी पी दीक्षित तथा सहायक महानिदेशक (बीज), आईसीएआर डॉ बी आर चौधरी द्वारा भी विचार व्यक्त किया गया।इस सत्र में वैज्ञानिकों द्वारा विभिन्न तकनीकी क्षेत्रों में तैयार की गई कार्ययोजनाओं एवं अनुशंसाओं को प्रस्तुत किया गया।समापन समारोह में फसल सुधार, फसल उत्पादन तथा फसल संरक्षण से संबंधित आगामी वर्ष के तकनीकी कार्यक्रमों पर विस्तार से विचार किया गया। फसल सुधार के अंतर्गत डॉ. ए.के. परिहार द्वारा, जबकि फसल उत्पादन के अंतर्गत कृषि विज्ञान एवं सूक्ष्मजीव विज्ञान से संबंधित कार्यक्रम क्रमशः डॉ. नरेंद्र कुमार एवं डॉ. के. स्वर्णलक्ष्मी द्वारा प्रस्तुत किए गए। फसल संरक्षण के अंतर्गत पादप रोग विज्ञान तथा कीट एवं सूत्रकृमि विज्ञान से संबंधित कार्यक्रम भी प्रस्तुत किए गए। कार्यक्रम के अंत में अखिल भारतीय समन्वित रबी दलहन अनुसंधान परियोजना के परियोजना समन्वयक डॉ. शैलेश त्रिपाठी ने धन्यवाद ज्ञापित किया। इसके साथ ही दो दिवसीय 31वीं वार्षिक समूह बैठक का समापन हुआ।
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