इन्फ्लूएंजा और न्यूमोकोकल इन्फेक्शन पर चला जागरूकता अभियान
हिंदुस्तान न्यूज़ एक्सप्रेस कानपुर | सर्दियों के मौसम में निमोनिया के बढ़ते केस को ध्यान में रखते हुए इन्फ्लूएंजा और न्यूमोकोकल इन्फेक्शन पर जानकारी प्रदान किया। डॉ. शिवम दीक्षित ने बताया कि सर्दियों मे अक्सर बच्चों और उम्र दराज लोगों में रेस्पिरेट्री इनफेक्शंस बढ़ जाते हैं। घर के अंदर ज्यादा समय रहने से, वेंटिलेशन फैसिलिटी ना होने से बैक्टीरिया और वायरस तेजी से फैलते हैं, जबकि ठंडी हवा रेस्पिरेट्री ट्रैक्ट के प्राकृतिक रक्षा तंत्र को कमजोर बना देती है। मौसमी बीमारियां जैसे कि इन्फ्लूएंजा और सामान्य सर्दी का अगर सही से इलाज न किया जाए तो यह निमोनिया खास करके कमजोर आबादी में काफी गंभीर हो सकती हैं। पारस हेल्थ, कानपुर के फैसिलिटी डायरेक्टर रजत बजाज ने कहा, “हर सर्दी में हम सांस संबंधी बीमारियों में लगातार बढ़ोतरी देखते हैं। जागरूकता और स्पेशलाइज़्ड केयर मिलने से निमोनिया को प्रभावी ढंग से मैनेज किया जा सकता हैं।हालिया कुछ डाटा बताते हैं कि हॉस्पिटल में भर्ती हुए लगभग 64% बच्चे जो 2 महीने से 5 साल के बीच होते हैं, उन्हें गंभीर निमोनिया होता है। यह आंकड़ा कम उम्र के बच्चों में इस सीजन के दौरान बीमारी के बढ़ते बोझ को दर्शाता है। इस मौसमी वृद्धि के बारे में बात करते हुए डॉ. शिवम दीक्षित, कंसल्टेंट – पल्मोनोलॉजिस्ट, पारस हेल्थ कानपुर ने कहा, “हम सर्दियों में देखते हैं कि निमोनिया शायद ही कभी अचानक होता है, और अक्सर तब होता है जब शुरुआती सांस की बीमारियों को नज़रअंदाज़ कर दिया जाता है, या लक्षणों को मौसमी बीमारी मान लिया जाता है। इसलिए सही समय पर जांच से बीमारी की गंभीरता से बचा जा सकता है क्योंकि सही समय पर इलाज से इन्फेक्शन को फेफड़ों में गंभीर रूप से फैलने से रोका जा सकता है और हॉस्पिटलाइज़ेशन की ज़रूरत को कम किया जा सकता है।”सीज़नल निमोनिया से बचाव के लिए प्रिवेंटिव केयर एक मुख्य तरीका है। डॉक्टर कुछ आसान लेकिन असरदार उपाय बताते हैं, जैसे हाथों की सफाई रखना, धूम्रपान से बचना, पर्याप्त मात्रा में पानी पीना और भीड़ वाली जगहों पर मास्क पहनना आदि। बच्चों, बुजुर्ग और कमजोर इम्यूनिटी वाले लोगों के लिए इन्फ्लूएंजा और न्यूमोकोकल इन्फेक्शन के लिए वैक्सीनेशन की सलाह दी जाती है। समय पर जागरूकता, बचाव के उपाय और शुरुआती मेडिकल मदद से सर्दियों में होने वाले निमोनिया के असर को काफी कम किया जा सकता है।इन्फ्लूएंजा और न्यूमोकोकल इन्फेक्शन पर जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया |
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