डॉ. सुधीर कुमार द्विवेदी फिजियोथेरेपी अवार्ड से सम्मानित
हिंदुस्तान न्यूज़ एक्सप्रेस कानपुर | फिजियोकनेक्ट-6 इंटरनेशनल फिजियोथेरेपी सम्मेलन का आयोजन द मायरा फाउंडेशन द्वारा द नॉर्थकैप यूनिवर्सिटी, गुरुग्राम में भव्य रूप से किया गया। इस अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में देश-विदेश से आए विशेषज्ञों ने भाग लिया। सम्मेलन के मुख्य अतिथि के रूप में एच.ई. अब्दुलरहमान अलगौद (भारत में बहरीन के राजदूत) तथा डॉ. रुचि वार्ष्णेय (नेशनल ट्रेजरर, आईएपी) और डॉ के के शर्मा(यूपी जनरल सेक्रेटरी) उपस्थित रहे। विशिष्ट अतिथियों में एसीपी वेस्ट गुरुग्राम अभिलक्ष जोशी तथा प्रधानमंत्री कार्यालय से प्रधान सलाहकार कृष्ण कुमार गौर भी उपस्थित रहे। इन सब ने मिलकर इस अवसर पर कानपुर के डफरिन जिला अस्पताल के डॉ. सुधीर कुमार द्विवेदी (डायरेक्टर, द्विवेदी एडवांस फिजियोथेरेपी एंड रिहैबिलिटेशन क्लिनिक) को “फिजियोकनेक्ट लीडरशिप इन फिजियोथेरेपी अवार्ड” से सम्मानित किया गया। साथ ही उन्हें सम्मेलन का चेयरपर्सन भी नियुक्त किया गया। सम्मेलन की थीम “ब्रेकिंग बैरियर्स: फिजियोथेरेपी फॉर ए हेल्दियर टुमॉरो” रही।सम्मेलन का उद्देश्य फिजियोथेरेपी के क्षेत्र में नवाचार, आधुनिक तकनीक एवं वैश्विक सहयोग को बढ़ावा देना था। मुख्य अतिथि एच.ई. अब्दुलरहमान ने अपने संबोधन में कहा कि फिजियोथेरेपी आज स्वास्थ्य सेवाओं का एक सशक्त स्तंभ बन चुकी है और नई तकनीकों के माध्यम से मरीजों को बेहतर व शीघ्र स्वास्थ्य लाभ मिल रहा है।एसीपी अभिलक्ष जोशी ने कहा कि फिजियोथेरेपी का एक बेहतर और स्वस्थ समाज बनाने मे बहुत बड़ा योगदान है। प्रधान सलाहकार कृष्ण कुमार गौर ने कहा कि फिजियोथेरेपी सेवा और रोजगार का उत्कृष्ट समन्वय है। इसमें उपचार के साथ मानवीय सेवा की भावना भी जुड़ी होती है, इसलिए फिजियोथेरेपिस्ट को मरीजों के हित में अपना सर्वोत्तम योगदान देना चाहिए।डॉ रुचि वार्ष्णेय ने बताया कि फिजियोथैरेपी उभरती हुई एक नाई विधा है जो कि आगे चलके फिजियोपैथी बनेगी जिसके चलते आईएपी सितंबर में एक इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस कराने जा रही है जिसमें कि 126 देशों से 10000 से भी ज्यादा फिजियोथैरेपिस्ट हिस्सा ले रहे है जो कि यशोभूमि,नई दिल्ली में होने जा रही है।कार्यक्रम के आयोजन अध्यक्ष डॉ. सर्वोत्तम चौहान ने बताया कि इस सम्मेलन में देश-विदेश से लगभग 800 फिजियोथैरेपिस्ट ने हिस्सा लिया। सम्मेलन का उद्देश्य शोध, शिक्षा और तकनीकी प्रगति को एक साझा मंच प्रदान करना है। उन्होंने कहा कि फिजियोथेरेपी “हाथों का जादू और विज्ञान का संगम” है।सम्मेलन में विभिन्न सत्रों, विचार-विमर्श और प्रस्तुतियों के माध्यम से फिजियोथेरेपी के नवीन आयामों पर विस्तार से चर्चा की गई।
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