आत्मबोध से विश्व बोध विषय पर परिचर्चा विचार/ कविगोष्ठी |
-विभिन्न कवियों ने सुंदर से सुंदर पढ़ी ग़ज़ले बटोरीं तालियां |
जिला संवाददाता सुनील कुमार धुरिया
हिंदुस्तान न्यूज़ एक्सप्रेस सुमेरपुर, हमीरपुर। अखिल भारतीय साहित्य परिषद जिला इकाई हमीरपुर उ0प्र0 के तत्वावधान में नव सम्वत सर 2083 विक्रमी का स्वागत, अभिनन्दन एवं नवदुर्गा शक्ति महोत्सव मनाने हेतु चैत्र शुक्ल प्रतिपदा दिन गुरुवार 19 मार्च सन 2026 को समय 02 बजे अपराह्न से सुमेरपुर स्थित कवि हरीराम गुप्त' निरपेक्ष' के आवास "परनामी भवन" में 'आत्मबोध से विश्वबोध' विषय पर परिचर्चा विचार/ कविगोष्ठी आयोजन हुआ।
माँ वीणापाणी सरस्वती की आराधना वंदना के उपरांत कवि शायर वीरेंद्र कुमार 'शजर' ने गज़ल पढ़ते हुए कहा -"मैं दरिया हूँ मगर मैंने समुन्दर को नहीं देखा। ठिकाना है जहाँ उसका उसी घर को नहीं देखा।।उपाध्यक्ष धर्मात्मा प्रसाद अभिलाषी ने पढ़ा -नमामि विश्व के प्रसिद्ध सत्य रूप धारिणी। नमामि मातु शैलजा,नमामि ब्रह्म चारिणी।। गोष्ठी के अध्यक्ष वरिष्ठ कवि नारायण प्रसाद रसिक ने पढ़ा -अहंकार मत कर ऐ नादान समुन्दर। नदियाँ न मिलती तो रह जाता सूख कर।। मुन्नीलाल अवस्थी ने पढ़ा -राम तुम पूर्ण काम हो, निरीह इच्छाओं से परे अभिराम हो। पूर्व अध्यक्ष जगदीश चन्द्र जोशी ने नव वर्ष शान्ति का प्रतीक हो अभिलाषा व्यक्त करते हुए कहा - "नये वर्ष विक्रम संवत में शान्ति रहे पर रौद्र न हो। भारतीय गौरव गाथा का शौर्य बढ़े अवसान न हो।। कवि दिनेश चन्द्र आर्य ने मंगल कामना व्यक्त करते हुए पढ़ा -"परिवार की खुशियाँ बढ़ें नित प्रेम का उत्कर्ष। मनसा वाचा कर्मणा सबको मंगल मय नव वर्ष।। प्रांतीय संयुक्त मंत्री कवि रेवती कुमार पाठक ने पढ़ा -आत्मबोध विश्वबोध से एकांत बोध मार्ग चलो।
जन्म मरण की दुनिया में यह चेतना प्रबोध भलो।।"
गजलकार राजेंद्र प्रेमी ने पढ़ा - "एक कहानी लिख दी हमने एक कहानी तुम लिख देना। बहुत सहारे हमने पाए, एक सहारा तुम दे देना। कमलेश सिंह गौर भौली ने कहा - अँधियारा दिया, बेंचे गाकर मीठे मीठे बोल। धर्म बैठा है धरने पर, अधर्म को मिली पेरोल।। संरक्षक शिवकरण सिंह सरस ने कहा - स्वागत है नववर्ष तुम्हारा, विक्रम संवत हमको प्यारा।। तहसील अध्यक्ष मौदहा कवि हरी प्रकाश कुशवाहा ने कहा - "जातियों में बटे आज इस देश का कुछ सुधार करो कुछ सुधार करो। कवि गजेंन्द्र नारायण मोक्ष ने पढ़ा - "नमन आपको कर रहा संवत सर नव वर्ष। गणेश सिंह 'विद्यार्थी' ने पढ़ा - "मैंने ज़ख्मों में सबके मरहम भरना सीखा है, प्रीति प्यार की सरगम गाकर, पीड़ा हरना सीखा है।" मानस मर्मज्ञ आनन्द कुमार सिंह ने आत्मबोध से विश्व बोध एवं एकात्म बोध पर पर चर्चा की। कवि उमेश सोनी और अवधेश कुमार बेचैन ने भी कविता पढ़ी। संयोजक हरीराम गुप्त "निरपेक्ष' ने संक्षिप्त विचार अभिव्यक्ति के बाद कविता पढ़ा - "आत्मबोध विश्वबोध से एकात्म बोध हो। दृश्य के प्रतीक से अदृश्य का प्रबोध हो। मानवीय भाव वृत्ति संस्कार ज्ञान हो, भिन्नता में एक की अभिन्नता का भान हो।" संचालक कैलाश प्रसाद सोनी ने कविता पाठ के बाद समापन की घोषणा की।