सनातनी महापुरुषों को किया याद
हिंदुस्तान न्यूज़ एक्सप्रेस कानपुर बुधवार 17 जून कानपुर दक्षिण के अर्रा रोड स्थित शकुंतला लॉन, में सनातन सेवा सत्संग उत्तर प्रदेश एवं अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा सेंट्रल यू.पी. के तत्वावधान में महाराणा प्रताप की जन्म जयंती के पावन अवसर पर सनातन के शिल्पकार महापुरुषों का पावन स्मरण करते हुए चित्रों पर तिलक लगाकर, माल्यार्पण कर पंचोपचार पूजन किया गया। समारोह की अध्यक्षता विक्रम सिंह ने की। मुख्य अतिथि पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष, माँ शारदा महाविद्यालय के प्रबंध निदेशक अनिल गुप्ता चार्ली, वरेण्य अतिथि युग दधीचि-मनोज सेंगर तथा विशिष्ट अतिथि डॉ. उमेश पालीवाल, सरसौल ब्लॉक प्रमुख डॉ० विजय रत्ना, पंकज तोमर, महामंडलेश्वर मनोजानंद गोल्डन बाबा, कैप्टन अनिल चतुर्वेदी रहे। डॉ. गायत्री सिंह (पूर्व प्राचार्य अर्मापुर पी.जी. कॉलेज) मुख्य वक्ता थीं। कार्यक्रम का सुंदर संचालन कवयित्री, शिक्षिका डॉ. वीणा उदय ने किया।इस अवसर पर श्री विक्रम सिंह ने कहा कि जब बड़े-बड़े साम्राज्य अकबर के दरबार में अपने आप को महफूज़ समझ रहे थे, तब एक आदमी ने सारे समाज को एकत्र कर अकबर को चुनौती दी। उन्होंने कहा बहती धारा में कमजोर पेड़ न टिक पाते हैं न पनप पाते हैं, लेकिन कुछ हठीले दरख़्त ऐसे होते हैं जिन्हें सैलाब हिला भी नहीं पाता, ऐसे थे महाराणा। डॉ. उमेश पालीवाल देश के लिए स्वाभिमान की पराकाष्ठा को महाराणा में देखते हैं। उन्होंने कहा कि यह प्रताप का ही प्रताप है कि वियतनाम के लोग हल्दीघाटी की मिट्टी को अपने साथ ले गए। अनिल गुप्ता चार्ली ने कहा कि राणा प्रताप से स्वाभिमान, शौर्य और देशभक्ति की प्रेरणा लेकर उनके मार्ग पर चलकर हम एक सुंदर समाज की स्थापना कर सकते हैं। मनोज सेंगर ने कहा कि समय-समय पर इस तरह के आयोजन होते रहने चाहिए जिससे हम अपनी संतति को संस्कारवान बनाकर अपने देश और अपनी सभ्यता की रक्षा कर सकें। गोल्डन बाबा ने कहा कि सनातन की निर्झरिणी सतत प्रवाहित करने के लिए हमें निरंतर प्रयासरत रहना चाहिए तथा समय-समय पर ऐसे आयोजन करने के लिए संस्था बधाई की पात्र है।
मुख्य वक्ता डॉ. गायत्री सिंह ने कहा कि महाराणा प्रताप जैसे विराट व्यक्तित्व ने के कारण ही भारत में सनातन वैदिक संस्कृति सभ्यता का इतिहास बचा हुआ है अगर यह बलिदानी पुरुष नहीं होते तो भारत की संस्कृति सभ्यता नष्ट हो गई होती, डॉक्टरविजय रत्ना ने अपने वक्तव्य में कहा कि महाराणा प्रताप के व्यक्तित्व को तराशने में उनकी माता जी का बहुत बड़ा योगदान है, जहां छत्राणीया अपने स्वाभिमान के लिए जौहर व्रत धारण कर सकती हैं,वहां उनके पिता, पुत्र पति को बलिदान और त्याग की शिक्षा स्वयं ही मिल जाती है-
कार्यक्रम के केंद्र बिंदु, संस्थापक / राष्ट्रीय अध्यक्ष आचार्य सुधीर भाई मिश्र नेकहा कि संस्था का उद्देश्य भारत की ऋषिपरंपरा, सांस्कृतिक चेतना, सनातन मूल्यों, को नई पीढ़ी तक पहुंचाना है। संस्था समाज के चारो वर्णों के प्रमुख पर्वों एवं सनातनी महापुरुषों की जयंतियों का आयोजन करती रहती है, हिंदू वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप के जीवन के कुछ अदभुत प्रसंग का उद्घाटन करते हुए कहा कि उन्होंने ने मेवाड़ की स्वतंत्रता को सबसे ऊपर रखा हल्दीघाटी के बाद 12 वर्षों तक अरावली के जंगलों में दुस्तर कष्ट झेले, जिनके सानिध्य में रहकर चेतक घोड़ा भी बलिदानी बन गया, तो मनुष्यों का क्या कहना, वर्ष 1583 में भीलों की बड़ी पराक्रमी सेना बनाई. विजयदशमी के दिन दिवेर में मुगल सेना पर आक्रमण किया, और मेवाड़ से स्थाई रूप से उन्हें खदेड़ दिया। उन्होंने संस्था के आगामी कार्यक्रमों के बारे में बताया कि गोस्वामी तुलसीदास जी की जयंती आगामी 19 अगस्त को छत्रपति शाहूजी महाराज विश्वविद्यालय में मनाई जाएगी। प्रतिवर्ष गुप्त नवरात्रि अनुष्ठान माघ मेला प्रयागराज में तथा आषाढ़ मास का अनुष्ठान 15 जुलाई से 23 जुलाई तक शुकताल में नमें संपन्न होगा जिसमें भाग भाग लेने के लिए 65 व्यक्तियों का रेलवे रिजर्वेशन कराया जा चुका है। 28 अगस्त को ब्राह्मणों के मुख्य पर्व श्रावणी का आयोजन मेस्कर घाट कैंट में किया जाएगा। विद्यार्थियों को सनातनी महापुरुषों की जीवन चरित्र, राष्ट्र निर्माण में उनके योगदान का ज्ञान विकसित करने के लिए महानगर में" सनातन की विभूतियां प्रश्नोत्तरी परीक्षा" जुलाई माह से प्रारंभ की जाएगी इसके लिए कमेटी गठित कर दी गई-कलाकार मनोज कुँवर सिंह बजरंगी जी के संदेशकोपढ़कर चर्चागया-डॉ. वीणा उदय ने महाराणा प्रताप पर कविता सुनाई और कहा कि राम जैसा धीरोदात्त नायक, जिनका गौरवगान वाल्मीकि और तुलसी ने किया है, ऐसी ही छवि और ऐसी ही पूर्णतया समर्पित प्रजावत्सलता और सबके कल्याण का भाव हम महाराणा में पाते हैं।कार्यक्रम में संजय सिंह भदौरिया, अखिलेश शुक्ला, जगदीश प्रसाद गुप्ता, अतुल अवस्थी, शिव प्रताप सिंह परिहार, ऋषि शुक्ला, अनुज त्रिपाठी, डॉ. ज्योति मिश्रा, रजनी चतुर्वेदी, आशीष दीक्षित, राजीव भट्ट, पवन तिवारी, आर. के. दुबे, राजेश दीक्षित, कक्का, ओम कांत त्रिपाठी,,, यमुना प्रसाद पांडे, जगराम सिंह सुभाष मिश्रा, सीताराम वर्मा, विकास त्रिपाठी, पंगू यादव, हर्ष तोमर, गंगा रामपाल, ओम जी शुक्ला, राजेंद्र अवस्थी, उत्तम तिवारी, राम गोपाल त्रिपाठी, भोले शंकर, राजेश तिवारी, सत्य प्रकाश त्रिपाठी माधव भारती,डॉ० कनक लता गौर, संजीव अवस्थी, अशोक शास्त्री, हरीश बाजपेई, अवध नरेश त्रिपाठी, सुरेंद्र शुक्ला, दीपू मिश्रा,, प्रेम नारायण राय, घनश्याम दीक्षित, छोटे तिवारी, दिनेश मिश्रा, एच. एस. दुबे तथा गौरव पालीवाल आदि उपस्थित रहे।
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