एक और फर्जी डिग्री फैक्ट्री का भंडाफोड़
60 सेलिब्रिटी से आरोपी से जुडाव, करोड़ों का खेल और दुबई कनेक्शन भी
हिंदुस्तान न्यूज़ एक्सप्रेस कानपुर। पुलिस ने शिक्षा जगत में बड़े फर्जीवाड़े का खुलासा करते हुए ऐसे गिरोह को दबोचा है, जो इंटरमीडिएट से लेकर पीएचडी तक की फर्जी डिग्रियां घर बैठे मुहैया करा रहा था। किदवई नगर पुलिस और क्राइम ब्रांच की संयुक्त कार्रवाई में मुख्य आरोपी मनीष उर्फ रवि और अर्जुन यादव के बाद अब दो और नए आरोपियों को गिरफ्तार किया। इस हाई-प्रोफाइल मामले में मास्टरमाइंड मनीष के रसूख ने पुलिस को भी चौंका दिया है। जांच के दौरान मनीष के मोबाइल से 60 से ज्यादा बॉलीवुड और खेल जगत की हस्तियों के साथ तस्वीरें मिली हैं। पुलिस 'सेलिब्रिटी एंगल' की गहराई से पड़ताल कर रही है। बता दें, इससे पहले भी किदवई नगर पुलिस ने फर्जी डिग्री रैकेट का खुलासा किया था। जिसमें हाईकोर्ट ने आरोपियों पर केस चलाने पर लताड़ लगाई और तुरन्त बरी करने का आदेश दिया प्राथमिक जांच में आरोपियों के बैंक खातों में करोड़ों रुपये के लेनदेन के सुराग मिले हैं। मुख्य आरोपी मनीष ने स्वीकार किया है कि वह GLOBAL BOOK OF EXCELLENCE AWARD UK LONDON नाम से एक फर्जी संस्था चलाता था। इस संस्था के जरिए वह बड़े आयोजनों का दावा करता और नामी हस्तियों को अवार्ड देने के बहाने लोगों से मोटी रकम वसूलता था। आरोपी मनीष ने पूछताछ में अपनी दुबई यात्रा की बात भी कबूली है, जिससे इस गिरोह के तार अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जुड़े होने की आशंका प्रबल हो गई है।
- डिग्री की 'होम डिलीवरी' का काला खेल
यह गिरोह इतना शातिर था कि इन्होंने फर्जीवाड़े के लिए बाकायदा एक सिस्टम बना रखा था। यूनिवर्सिटी के नाम का खेल: तेलंगाना यूनिवर्सिटी समेत देश के कई बड़े संस्थानों के नाम पर फर्जी डिग्रियां छापी जा रही थीं।
पुलिस ने मौके से करीब 80 फर्जी माइग्रेशन सर्टिफिकेट, फर्जी ग्रेड शीट, डिग्रियां और यूनिवर्सिटी की नकली मोहरें बरामद की हैं। बिना परीक्षा डिग्री: गिरोह कई राज्यों के छात्रों को निशाना बनाता था और बिना किसी परीक्षा के उन्हें मनचाही डिग्री थमा देता था। पुलिस ने आरोपियों के पास से दो लैपटॉप और दो मोबाइल जब्त किए हैं, जिनमें हजारों छात्रों का डेटा और फर्जीवाड़े के डिजिटल सबूत मौजूद हैं। आरोपियों के खिलाफ गैंगस्टर एक्ट और धोखाधड़ी की गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है। कानपुर पुलिस की एसआईटी और क्राइम ब्रांच अब उन अन्य लोगों की तलाश में जुटी है, जो इस नेटवर्क का हिस्सा हैं। पुलिस यह भी पता लगा रही है कि इन फर्जी डिग्रियों का इस्तेमाल किन-किन सरकारी या निजी संस्थानों में नौकरी पाने के लिए किया गया है। पुलिस का कहना है कि यह केवल एक शहर तक सीमित मामला नहीं है, बल्कि इसके तार देश के कई बड़े राज्यों और सफेदपोशों से जुड़े हो सकते हैं। मनीष की सेलिब्रिटी प्रोफाइल का इस्तेमाल वह लोगों को प्रभावित करने और अपना साम्राज्य फैलाने के लिए करता था।