रासायनिक उर्वरकों का अंधाधुंध प्रयोग बना खतरा
-वैज्ञानिकों ने किसानों को सिखाया ‘संतुलित खेती’ का मंत्र
हिंदुस्तान न्यूज़ एक्सप्रेस कानपुर | सीएसए के अधीन संचालित कृषि विज्ञान केंद्र, जाजपुर बंजार द्वारा विकासखंड जनैया,सिठाइया के ग्राम बढ़पुर में विशेष जागरूकता अभियान का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में किसानों एवं कृषक महिलाओं को संतुलित उर्वरकों के प्रयोग, मृदा स्वास्थ्य संरक्षण तथा टिकाऊ खेती के प्रति जागरूक किया गया।कार्यक्रम में भारतीय दलहन अनुसंधान संस्थान, कानपुर के वैज्ञानिकों ने भी सहभागिता कर किसानों को आधुनिक एवं वैज्ञानिक खेती के गुर सिखाए।
कृषि विज्ञान केंद्र के प्रभारी डॉ. भूपेंद्र कुमार सिंह ने कहा कि आवश्यकता से अधिक रासायनिक उर्वरकों का प्रयोग मृदा स्वास्थ्य एवं पर्यावरण दोनों के लिए हानिकारक है। उन्होंने किसानों को संतुलित उर्वरक प्रयोग, प्राकृतिक खेती एवं जीवामृत के उपयोग को अपनाने की सलाह दी। साथ ही उन्होंने मृदा परीक्षण के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि मृदा स्वास्थ्य कार्ड के अनुसार खेती करने से मिट्टी की उर्वरता बनी रहती है तथा उत्पादन में भी सुधार होता है।वैज्ञानिक डॉ. महेंद्र राजभर ने किसानों को बेहतर उत्पादन हेतु उन्नत प्रजातियों के चयन एवं संतुलित उर्वरकों के प्रयोग की सलाह दी। साथ ही पशुओं के संतुलित आहार, टीकाकरण एवं डीवर्मिंग के महत्व के बारे में भी जानकारी दी गई।भारतीय दलहन अनुसंधान संस्थान, कानपुर के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. टी. एन. तिवारी ने किसानों को मिट्टी स्वास्थ्य एवं संतुलित पोषण प्रबंधन के महत्व के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि डीएपी, यूरिया एवं रासायनिक उर्वरकों के अत्यधिक प्रयोग से मिट्टी की उर्वरता लगातार प्रभावित हो रही है। किसानों को जैविक खाद, प्रेसमड एवं हरी खाद के उपयोग के लिए प्रेरित किया गया। साथ ही मिट्टी परीक्षण एवं संतुलित उर्वरक प्रयोग अपनाने की सलाह दी गई, ताकि खेती को टिकाऊ एवं लाभकारी बनाया जा सके। वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. एम. हसीन ने किसानों को मिट्टी परीक्षण एवं संतुलित उर्वरक उपयोग की जानकारी दी। किसानों को यूरिया सही समय पर एवं संतुलित मात्रा में उपयोग करने की सलाह दी गई। साथ ही जिंक, सल्फर, बोरोन जैसे सूक्ष्म पोषक तत्वों एवं जैविक उपायों को अपनाने पर जोर दिया गया। भारतीय दलहन अनुसंधान संस्थान, कानपुर के वैज्ञानिक , डॉ. ए.के श्रीवास्तव ( प्रधान वैज्ञानिक) , डॉ. आर जगदीश्वरन (वैज्ञानिक) ने विभिन्न जानकारियाँ दी । कार्यक्रम के समापन अवसर पर डॉ. दिव्या कौशिक ने कृषक महिलाओं को संतुलित आहार एवं दलहनी फसलों के महत्व के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि दालें प्रोटीन का महत्वपूर्ण स्रोत हैं, जो महिलाओं एवं बच्चों के स्वास्थ्य के लिए अत्यंत आवश्यक हैं। साथ ही उन्होंने पोषणयुक्त भोजन अपनाने एवं दैनिक आहार में दालों को शामिल करने पर जोर दिया, ताकि परिवार स्वस्थ एवं कुपोषण मुक्त बन सके।इस जागरूकता अभियान में 15 कृषक महिलाओं एवं 50 किसानों ने प्रतिभाग कर वैज्ञानिकों से खेती से जुड़ी उपयोगी जानकारियां प्राप्त कीं।