52 वर्षीय महिला का ‘पिन-होल’ हार्ट ऑपरेशन कर बचाई जान
हिंदुस्तान न्यूज़ एक्सप्रेस कानपुर | कार्डियक केयर में पारस हेल्थ ने एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। पारस हेल्थ कानपुर के डॉक्टरों ने इस महीने उन्नाव की 52 साल की महिला की जान बचाई। महिला एक दुर्लभ दिल की बीमारी पेटेंट डक्टस आर्टिरियोसस (पीडीए) से पीड़ित थीं। डॉ. श्रीपद खैरनार ने खास ‘पिन-होल’ तकनीक से कैथेटर द्वारा यह ऑपरेशन किया। इससे ओपन हार्ट सर्जरी की जरूरत नहीं पड़ी और मरीज जल्दी व सुरक्षित रूप से ठीक हो गई। पीडीए एक जन्मजात दिल की बीमारी होती है। इसमें जन्म के बाद एक ब्लड वेसल्स बंद नहीं होती। इससे हार्ट फेलियर, पल्मोनरी हाइपरटेंशन म या गंभीर इंफेक्शन होने की संभावना होती हैं। सुनीता देवी (बदला हुआ नाम) अस्पताल में गंभीर सांस की तकलीफ़ और कमजोर दिल की हालत के साथ पहुंचीं। उनका इजेक्शन फ्रैक्शन सिर्फ 30% था। यह दिल की क्षमता बहुत कम होने का संकेत होता है। विस्तृत जांच (कार्डियक कैथेटराइजेशन) में PDA का पता चला। इस जांच से छेद का आकार और खून के बहाव की दिशा पता चली। डॉक्टरों ने देखा कि उनकी उम्र और कमजोर हालत को देखते हुए कम चीरे वाली डिवाइस क्लोजर तकनीक ही सबसे सुरक्षित और सही विकल्प है।
इस केस को संभालने वाले पारस हेल्थ कानपुर के इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. श्रीपद खैरनार ने बताया, “यह मामला काफी मुश्किल और गंभीर था क्योंकि मरीज का दिल पहले से ही बहुत कमजोर था। अगर इलाज में देरी होती तो मरीज को गंभीर और स्थायी समस्याएं हो सकती थीं। हमने कैथेटर द्वारा पीडीए डिवाइस क्लोजर किया, जिससे छेद सुरक्षित तरीके से बंद हो गया और ओपन-हार्ट सर्जरी करने का खतरा भी टल गया। मरीज को इतनी जल्दी ठीक होते देखना हमारे लिए बहुत संतोषजनक है। यह ‘पिन-होल’ तकनीक खासकर बुजुर्ग मरीजों या कमजोर दिल वाले मरीजों के लिए सुरक्षित और भरोसेमंद है। इस केस में तुरंत कदम उठाने से बड़े खतरे टल गए और मरीज को ठीक होने का सही मौका मिला। ऐसे नाजुक हालात में मरीज को स्वस्थ होते देखना हमेशा बेहद खुशी देता है।”पूरी प्रक्रिया सिर्फ 40 से 45 मिनट लगा। यह प्रक्रिया जांघ में एक छोटे छेद के जरिए की गई। इसमें छाती में कोई चीरा नहीं लगाया गया और न ही टांकों की जरूरत पड़ी। सिर्फ 6 घंटे में सुनीता देवी चलने लगीं और अगले दिन ही उन्हें स्वस्थ हालत में डिस्चार्ज कर दिया गया। बाद की जांचों में उनके दिल की क्षमता में काफी सुधार देखा गया। इस केस की सफलता से यह साबित होता है कि जल्दी पहचान और एडवांस्ड ‘पिन-होल’ इलाज बहुत प्रभावी है। यह केस इस बात की मिसाल है कि पारस हेल्थ कानपुर एडवांस्ड हार्ट केयर में अनुभवी और प्रभावी हॉस्पिटल है, खासकर जटिल और गंभीर मरीजों के लिए यह हॉस्पिटल इस क्षेत्र के लोगों के लिए एक वरदान है। यह उन मरीजों के लिए भी उम्मीद की किरण है, जिन्हें अपनी जगह, उम्र या स्वास्थ्य स्थिति के कारण इलाज के बहुत कम विकल्प मिल पाते हैं।