यूपी साइटोकॉन -2025 का हुआ शुभारम्भ, विशेषज्ञो ने प्रस्तुत किया व्याख्यान
हिंदुस्तान न्यूज़ एक्सप्रेस कानपुर। जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज में पैथालॉजी विभाग एवं भारतीय साइटोलॉजिस्ट अकादमी उत्तर प्रदेश चौप्टर द्वारा वार्षिक सम्मेलन यूपी साइटोकॉन -2025 का शुभारम्भ मेडिकल कालेज के ऑडिटोरियम में हुआ। यह सम्मेलन दो दिवसीय का होगा जिसमें अन्य प्रदेशो व जिलो से आए विशेषज्ञो ने साइटोपैथालॉजी की नई प्रगतियों पर प्रकाश डाला।
यूपी साइटोकॉन - 2025 कार्यक्रम का शुभारम्भ दोपहर 1ः30 बजे कालेज के ऑडिटोरियम में मुख्य अतिथि प्रतिष्ठित पैथॉलाजिस्ट एवं गोरखपुर के मेयर मंगलेश श्रीवास्तव, कालेज प्राचार्य प्रो. डॉ संजय काला, समिति के चेयरपर्सन डॉ महेन्द्र सिंह, को चेयरपर्सन डॉ लुबना खान, मुख्य सलाहकार डॉ सुमन लता वर्मा, आर्गनाइजर सेक्रेटरी डॉ नीलिमा वर्मा व डॉ चयनिका काला ने दीप प्रज्जवलन कर किया। सम्मेेलन में टाटा मेमोरियल हॉस्पिटल मुंबई से प्रसिद्ध पैथोलॉजिस्ट डॉक्टर भरत रेखी ने अपना व्याख्यान प्रस्तुत करते हुए कहा कि जीएसवीएम मेडिकल कालेज आज बुलंदी को छू रहा है। नए -नए तरीको से अब जांचे करना बहुत ही आसान हो रहा है जिसका फायदा मरीज को मिल रहा है। इसी क्रम में प्राचार्य प्रो. डॉ संजय काला ने अपना व्याख्यान प्रस्तुत करते हुए कहा कि पैथालॉजी की जांच का इलाज में बहुत ही अहम किरदार है या यूं कहे कि पैथालॉजी हर इलाज के लिए उसकी रीढ़ है जिसके बिना इलाज करना संभव नही है। उन्होंने कहा कि साइटोलॉजी और बायोप्सी में बहुत ही बडा अंतर है। हांलकि बायोप्सी को प्राथमिता दी जाती है बजाय साइटोलॉजी के। लेकिन साइटोलॉजी से कई जांचे बिना टुकडा निकाले ही करना संभव है। बायोप्सी की अपनी जगह है और साइटोलॉजी का अपना स्थान है।
सम्मेलन में गोरखपुर से आए वरि. पैथालॉजिस्ट एवं मेयर मंगलेश श्रीवास्वत ने अपने सम्बोधन में कहा कि आने वाले समय में पैथालॉजी की जांचे और भी आधुनिक मशीनो से की जायेगी जिसमें मरीजो का इलाज करने में बहुत ही सहूलियते मिलेंगी। उन्होंने बताया कि वर्ष 1979 में उन्होंने जीएसवीएम मेडिकल कालेज से ही एमबीबीएस की पढ़ाई की थी और पैथालॉजिस्ट बने तथा उसके बाद वह वर्तमान समय में गोरखपुर के मेयर है। उन्होंने आने वाले नए छात्रो के लिए कहा कि उनके पास अब एआई जैसे संसाधन मौजूद है जिनकी मदद से और बेहतर जांचो के नतीजो को पाया जा सकता है। इसी क्रम में के समिति के चेयरपर्सन डॉ महेन्द्र सिंह ने कहा कि किसी भी मरीज के इलाज में पैथालॉजी बहुत ही महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। बिना जांचो के किसी भी मरीज का उपयुक्त इलाज संभव नही है। साइटालॉजी से थॉयराड जैसी जांचे तो ठीक है ,लेकिन कैंसर जैसी जांचो के लिए बायोप्सी ठीक मानी जाती है। इस दौरान मेडिसन कम्युनिटी विभागध्यक्ष डॉ संतोष वर्मन, आर्थो विभागध्यक्ष डॉ संजय कुमार, यूपी साइटोकॉन के कोषाध्यक्ष एवं पैथालाजी विभाग के डॉ योगेन्द्र नारायण वर्मा समेत लगभग सभी विभाग के विभागध्यक्ष मौजूद रहे। 31 अगस्त रविवार को अन्य विशेषज्ञ अपना व्याख्यान प्रस्तुत करेंगे।