बच्चों के प्रवेश में पेन नम्बर की अनिवार्यता से अभिभावक परेशान
हिंदुस्तान न्यूज़ एक्सप्रेस कानपुर | मुस्लिम वेलफेयर एण्ड एजूकेशनल संस्था ने प्रदेश में शिक्षा व्यवस्था से जुड़ी गंभीर समस्याओं पर गहरी चिंता व्यक्त की है। संस्था के सचिव इखलाक़ अहमद डेविड ने एक प्रेस विज्ञप्ति में कहा कि पेन नंबर एवं अपार आईडी की अनिवार्यता के कारण गरीब एवं मध्यमवर्गीय परिवारों के बच्चों को शिक्षा प्राप्त करने में अनेक व्यावहारिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। यदि किसी अभिभावक की आर्थिक स्थिति अचानक खराब हो जाती है—जैसे व्यापार में नुकसान, नौकरी छूटना या किसी आपदा का सामना करना—तो वह निजी विद्यालय की फीस जमा करने में असमर्थ हो जाता है। ऐसी स्थिति में कई निजी विद्यालय विद्यार्थियों को ट्रांसफर सर्टिफिकेट (टीसी) जारी नहीं करते, जिससे छात्र अन्य विद्यालयों में प्रवेश नहीं ले पाते और उनकी पढ़ाई बीच में ही रुक जाती है। पेन नम्बर जनरेट होने में स्कूलों को भी बहुत परेशानियों का सामना करना पड़ता है छात्र-छात्रा माता-पिता के आधार में गल्तियों की वज़ह से पेन नही बनता और उसके बिना दूसरे विद्यालयों में बच्चों का प्रवेश नही होता यही हाल आपार आईडी का है। यह स्थिति अत्यंत चिंताजनक है, क्योंकि शिक्षा के अधिकार कानून के तहत कक्षा 8 तक किसी भी बच्चे की शिक्षा बाधित नहीं होनी चाहिए। इसके बावजूद ज़मीनी स्तर पर नियमों की अनदेखी की जा रही है।इखलाक़ अहमद डेविड ने यह भी आरोप लगाया कि कानपुर शहर में कुछ तथाकथित “एजुकेशन माफिया” संगठित गिरोह बनाकर कार्य कर रहे हैं, जो निजी विद्यालयों की सांठगांठ से अभिभावकों पर दबाव बनाते हैं और बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करते हुए केवल अपनी जेबें भरने में लगे हैं। आरटीई के अंतर्गत प्रवेश लेने वाले छात्रों के अभिभावकों को भी कई स्थानों पर अनावश्यक रूप से परेशान किए जाने की शिकायतें सामने आ रही हैं।संस्था ने सरकार से मांग की है कि इस विषय पर स्पष्ट एवं प्रभावी नीति बनाई जाए, ताकि किसी भी परिस्थिति में बच्चों की शिक्षा बाधित न हो और निजी विद्यालयों की मनमानी पर सख्ती से रोक लगाई जा सके।संस्था ने यह भी निर्णय लिया है कि उपरोक्त समस्याओं के संबंध में मुख्यमंत्री से मिलकर विस्तृत ज्ञापन देने पर विचार किया जा रहा है, ताकि बच्चों के हित में ठोस कार्यवाही सुनिश्चित की जा सके।
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