कानपुर के मरीजों के लिए लिवर ट्रीटमेंट बना अधिक सुलभ
- ओपीडी के माध्यम से मरीजों को मिल रही विशेषज्ञ लिवर केयर तक बेहतर पहुंच
- दो सफल ट्रांसप्लांट के बाद एक और लिवर ट्रांसप्लांट जल्द प्रस्तावित
हिंदुस्तान न्यूज़ एक्सप्रेस कानपुर | अपोलोमेडिक्स सुपरस्पेशलिटी हॉस्पिटल, लखनऊ की विशेषज्ञ टीम द्वारा कानपुर ओपीडी के माध्यम से पिछले छह महीनों में दो सफल लिवर ट्रांसप्लांट किए गए हैं, जबकि एक और लिवर ट्रांसप्लांट जल्द प्रस्तावित है। इन सफल ट्रांसप्लांट्स और कानपुर में एडवांस लिवर केयर सेवाओं की बढ़ती पहुंच को लेकर बुधवार को आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में विशेषज्ञ डॉक्टरों ने जानकारी साझा की। इस दौरान लिवर रोगों के बढ़ते मामलों, समय पर निदान की आवश्यकता और उत्तर प्रदेश में लिवर ट्रांसप्लांट सुविधाओं की स्थिति पर भी विस्तार से चर्चा की गई। प्रेस कॉन्फ्रेंस को डॉ. अभिषेक यादव, सीनियर डायरेक्टर एवं एचओडी, लिवर ट्रांसप्लांट एवं एचपीबी सर्जरी, अपोलोमेडिक्स हॉस्पिटल लखनऊ तथा द गैस्ट्रो लिवर हॉस्पिटल के चेयरमैन एवं वरिष्ठ गैस्ट्रोलॉजिस्ट डॉ. वी.के. मिश्रा ने संबोधित किया। हाल ही में कानपुर निवासी 63 वर्षीय मरीज का सफल लिवर ट्रांसप्लांट उनके पुत्र द्वारा लिवर के हिस्से का दान करने के बाद किया गया। इसके अलावा मैनपुरी निवासी 56 वर्षीय मरीज का सफल लिवर ट्रांसप्लांट किया गया, जिसके लिए उनकी पत्नी ने अपने लिवर का हिस्सा दान किया। वहीं कानपुर के ही एक और मरीज का लिवर ट्रांसप्लांट भी जल्द प्रस्तावित है, जिसमें उनकी पत्नी डोनर होंगी। इन सफल ट्रांसप्लांट्स के पीछे अपोलो हॉस्पिटल लखनऊ द्वारा कानपुर स्थित द गैस्ट्रो लिवर हॉस्पिटल में शुरू की गई विशेषज्ञ लिवर ओपीडी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। इस पहल के तहत मरीजों को अपने शहर में ही प्रारंभिक जांच, विशेषज्ञ परामर्श और ट्रांसप्लांट से जुड़ी समग्र चिकित्सा की सुविधा उपलब्ध हो रही है। द गैस्ट्रो लिवर हॉस्पिटल के चेयरमैन और वरिष्ठ गैस्ट्रोलॉजिस्ट डॉडॉ. वी.के. मिश्रा ने कहा, “मरीज समय रहते हमारे पास पहुंचे, जिससे उनका सही समय पर निदान हो सका और बिना अनावश्यक देरी के लिवर ट्रांसप्लांट की प्रक्रिया शुरू की जा सकी। यही वजह रही कि दोनों मरीजों का ट्रांसप्लांट सफल रहा और उनकी रिकवरी भी अपेक्षाकृत तेज हुई। यदि लीवर रोगों का शुरुआती चरण में पता चल जाए और मरीज को उचित मार्गदर्शन मिले, तो गंभीर स्थिति में पहुंचने से पहले प्रभावी इलाज संभव हो जाता है। कानपुर ओपीडी के माध्यम से मरीजों को अपने शहर में ही विशेषज्ञ परामर्श, नियमित मॉनिटरिंग और ट्रांसप्लांट से जुड़ी सम्पूर्ण चिकित्सा सहायता मिल रही है, जिससे उपचार प्रक्रिया अधिक व्यवस्थित और सुगम बनी है।”इस विशेष ओपीडी का नेतृत्व डॉ. अभिषेक यादव, सीनियर डायरेक्टर एवं एचओडी, लिवर ट्रांसप्लांट एवं एचपीबी सर्जरी, अपोलोमेडिक्स हॉस्पिटल लखनऊ द्वारा किया जा रहा है। डॉ. यादव प्रत्येक माह के तीसरे बुधवार को द गैस्ट्रो लिवर हॉस्पिटल, कानपुर में सुबह 11 बजे से दोपहर 3 बजे तक मरीजों को परामर्श देते हैं। इस उपलब्धि पर बात करते हुए डॉ. अभिषेक यादव ने कहा, “भारत में हर साल 2.5 से 3 लाख लोग लीवर रोग और लीवर सिरोसिस के कारण अपनी जान गंवा देते हैं। लीवर रोग अब भारत में मृत्यु का 8वां सबसे आम कारण बन चुका है, जबकि 10 साल पहले यह 10वें स्थान पर था। भारत में सालाना केवल 2500–3000 लीवर ट्रांसप्लांट ही होते हैं, जो कि वास्तविक ज़रूरत का केवल 1–2 फीसदी ही है। फैटी लीवर डिजीज तेजी से बढ़ रही है और भारत की 30-35 फीसदी आबादी इससे प्रभावित है, कुछ क्षेत्रों में यह संख्या 50 फीसदी तक पहुँच चुकी है। उत्तर प्रदेश की आबादी जो कि भारत की लगभग 17 फीसदी आबादी का हिस्सा है, में करीब 50,000-60,000 लोग हर साल लीवर रोगों के कारण मौत के मुंह में चले जाते हैं, लेकिन केवल 200-250 लीवर ट्रांसप्लांट ही सालाना हो पाते हैं और ये ज्यादातर एनसीआर क्षेत्र में होते हैं।