विश्व स्किज़ोफ्रेनिया दिवस पर जागरूकता कार्यक्रम का हुआ आयोजन
- कुल जनसंख्या में 1 प्रतिशत लोग स्किज़ोफ्रेनिया से ग्रस्ति
हिंदुस्तान न्यूज़ एक्सप्रेस कानपुर। विश्व स्किज़ोफ्रेनिया दिवस के अवसर पर मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरुकता बढ़ाने एवं स्किज़ोफ्रेनिया जैसे गंभीर मानसिक रोग के प्रति समाज में फैली भांतियों को दूर करने के उद्देश्य से मानसिक रोग विभाग द्वारा विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर विशेषज्ञों ने स्किज़ोफ्रेनिया की व्यापकता, कारणों, लक्षणों, उपचार एवं उपचार के परिणामों पर विस्तार से जानकारी दी।
मानसिक रोग विभागाध्यक्ष डॉ धंनजय चौधरी ने बताया कि स्किज़ोफ्रेनिया एक उपचार योग्य मानसिक बीमारी है। इस बीमारी में मस्तिष्क में डोपामिन, ग्लूटामेट आदि न्यूरोट्रांसमीटर के असंतुलन, आनुवंशिक कारण, तनाव, नशे का सेवन तथा अन्य जैविक एवं मनो-सामाजिक कारक शामिल हो सकते हैं। उन्होंने उपचार के बारे में बताते हुआ कहा कि स्किज़ोफ्रेनिया का उपचार एंटीसाइकोटिक दवाओं, नियमित परामर्श, सीबीटी, पारिवारिक सहयोग, पुनर्वास सेवाओं तथा आवश्यकता पड़ने पर ईसीटी जैसी वैज्ञानिक उपचार पद्धतियों से किया जाता है। समय पर पहचान एवं नियमित उपचार से अच्छे परिणाम मिलते हैं। उन्होंने बताया कि लगभग 30 प्रतिशत मरीज उपचार से काफी हद तक ठीक होकर सामान्य जीवन जी सकते हैं, जबकि लगभग 30 प्रतिशत मरीजों को लंबे समय तक दवा एवं नियमित फॉलोअप की आवश्यकता होती है, वहीं कुछ मरीजों में बीमारी जटिल होने के कारण उपचार एवं पुनर्वास अपेक्षाकृत कठिन हो सकता है। इस मौके पर जीएसवीएम मेडिकल कालेज के प्राचार्य प्रो. डॉ संजय काला ने बताया कि कुल जनसंख्या में लगभग 1 प्रतिशत लोग स्किज़ोफ्रेनिया से ग्रसित हो सकते हैं। समाज में जागरूकता की कमी के कारण कई बार लोग इसे भूत-प्रेत बाधा समझकर झाड़-फूंक जैसे अवैज्ञानिक उपायों का सहारा लेते हैं, जिससे उपचार में देरी हो जाती है। उन्होंने कहा कि स्किज़ोफ्रेनिया एक उपचार योग्य मानसिक बीमारी है और इसके लिए समय पर विशेषज्ञ चिकित्सक से परामर्श लेना आवश्यक है। इस दौरान प्रमुख रूप से सहा आचार्य डॉ आयुषी डी सिंह, डॉ कृतिका चावला, डॉ अमन नकवी, व एसआर डॉ राधा, डॉ मनीषा तथा डॉ क्षितिज मौजूद रहे।
- स्किज़ोफ्रेनिया बीमारी के लक्षण व उपचार
मानसिक रोग विभागध्यक्ष डॉ धंनजय चौधरी ने बताया कि इस बीमारी के प्रमुख लक्षणों में जैसे आवाजें सुनाई देना, भ्रम या गलत विश्वास, शक करना, व्यवहार में बदलाव, सामाजिक दूरी, कामकाज में कमी तथा विचारों में असंगति शामिल हो सकते हैं। इसका उपचार ंएटीसाइकोटिक दवाओं, नियमित परामर्श, सीबीटी, पारिवारिक सहयोग, पुनर्वास सेवाओं व ईसीटी जैसी वैज्ञानिक उपचार पद्धतियों से किया जा सकता है।
- मानसिक रोग की नई बिल्डिंग बन कर तैयार
मानसिक रोग विभागध्यक्ष डॉ धंन्नजय चौधरी ने बताया कि हाल ही में स्थापित आधुनिक सुविधाओं से युक्त नए मानसिक रोग विभाग भवन तैयार हो चुका है। विभागाध्यक्ष ने बताया कि इस समर्पित भवन का निर्माण प्राचार्य प्रो. डॉ संजय काला के मार्गदर्शन में हुआ है। उनके प्रयासों से भवन का विकास संभव हुआ है तथा विभाग के लिए आवश्यक फर्नीचर एवं उपकरण भी शौघ्र उपलब्ध होने वाला है। जल्द ही मानसिक रूप से गंभीर मरीजो को भर्ती कर उनका उपचार किया जायेगा।
- प्रतिवर्ष 20 मरीजो की होती है कॉग्निटिव रिमेडिएशन थेरेपी
विभाग में नियमित ओपीडी सेवाओं के माध्यम से प्रतिदिन स्किज़ोफ्रेनिया सहित विभिन्न मानसिक रोगों से पीड़ित मरीजों का उपचार किया जा रहा है। विभाग की ओपीडी में आने वाले कुल मरीजों में प्रतिवर्ष लगभग 20 में कॉग्निटिव रिमेडिएशन थेरेपी तथा योगा थेरेपी जैसी विशेष सेवाएं भी संचालित की जा रही हैं। जिससे मरीजों की मानसिक, सामाजिक एवं व्यवहारिक कार्यक्षमता में सुधार हो सके।