छावनी संग्राम के समर में सपा से कूदे आयातित नेता- यमुना तीरे के बड़े नेता गंगा तट से ठोक सकते चुनावी ताल- कभी हाथी की सवारी , फिर हाथ का साथ और साइकिल है प्यारी
हिंदुस्तान न्यूज़ एक्सप्रेस कानपुर। चुनावी साल के अंतिम पखवारा होने के चलते सभी राजनीतिक दलों में अंतरिक गुटबाजी और जिताऊ प्रत्याशियों की कवायद तेज हो गयी। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष के तीन दिवसीय दौरे ने इस कवायद को गति दे दी। जिससे सभी दलों में हलचल साफ देखी जा रही है। मुख्य विपक्षी सपा जो कि इंड़ी गठबंधन का हिस्सा है। पार्टी में चुनावी चर्चा होती नजर आ रहीं हैं। रही बात कांग्रेस और बसपा की, तो कांग्रेस अपनी पहचान ढूंढने में लगी है। सपा की पिछलग्गू बनकर रह गयी है। वही, बसपा में शहर के अध्यक्ष की लड़ाई रुकने का नाम नहीं ले रही है, दो दिन पहले चार महीने पहले हटाये गये कुलदीप फिर से शहर अध्यक्ष बना दिए गये। मुख्य विपक्षी सपा ने 2022 के विधानसभा चुनाव में शहर में तीन सीटों पर कब्जा किया। जिसमें आर्यनगर और सीसामऊ सीट दोबारा जीती थी। वहीं, नयी सीट छावनी को भाजपा से छीनी थी। वैसे तो छावनी सीट मुस्लिम बाहुल्य होने के चलते सभी का अनुमान था कि ये सीट सपा की झोली में जायेगी। जहां से सपा के हसन रूमी ने सपा का परचम लहराया। रूमी के विधायक बनने के साथ ही विवाद पीछे पड़े रहे, कहीं पार्टी विरोधी, तो कही विपक्षियों के निशाने पर रहे। यही कारण है, कि छावनी सीट पर रूमी के लिए अगले चुनाव में टिकट मिलने पर प्रश्नचिन्ह है, पार्टी की गुटबाजी के कारण टिकट पर संशय के बादल मंडरा रहे हैं। पार्टी सूत्रों के मुताबिक सब कुछ ऐसा ही चला तो टिकट कटना तय है। मुस्लिम बाहुल्य होने के कारण पार्टी में इस सीट के लिए अभी से लम्बी चौड़ी फेहरिस्त बन चुकी है, जिसमें कुछ चर्चित तो कुछ अंजान चेहरे जोर अजमाइश में लखनऊ दरबार के चक्कर लगा रहे हैं।जिसमें कुछ तो टिकट पाने के लिए भारी भरकम और नामचीन लोगों से फोन कराने में जुटे है, जिससे राष्ट्रीय अध्यक्ष पर उनका प्रभाव काम कर जाये। इसको देखते हुए पार्टी ने छावनी में आयातित कद्दावर को प्रत्याशी बनाने के संकेत मिले है जिसकी समय आने पर घोषणा की जायेगी। पार्टी ने आयातित नेता को सीट से प्रत्याशी बनाने का निर्णय कई कारणों से लिया। जिसमें प्रमुख विरोधियों कौ धराशायी के साथ गुटबाजी को शांत करना और आस-पास की पाँच से दस सीटों पर प्रभाव से जीतना है।