ब्रिटिश हुकूमत के वक्त से निकल रहा है बाबा बदर अली का जुलूस
हिंदुस्तान न्यूज़ एक्सप्रेस कानपुर | इस्लामिक मोहर्रम की 2 तारीख 1448 हिजरी कानपुर से बाबा बदर अली के परंपरागत आलम जुलूस हर साल की तरह इस साल भी बड़े ही अदब और एहतिराम, सदभाव एकता-भाईचारा के साथ बकरमंडी कब्रिस्तान के सामने से हाजी उस्मान की सदारत में निकाला गया।जुलूस के सरपरस्त इखलाक अहमद डेविड चिश्ती ने बताया कि 251 साल ब्रिटिश हुकूमत से बाबा बदर अली का आलम जुलूस निकल रहा हैं ब्रिटिश हुकूमत से अब तक कई पीढियां बदल गई लेकिन बदर अली के आलम में कहीं से कोई कमी नहीं हुई जुलूस की भीड़ बढ़ती जा रही है अकीदतमंद आज भी अदबों एहतिराम के साथ शामिल होते हैं बदर अली के बाद उनके दामाद हज़रत अली उसके बाद उनकी बेटी मुन्नी बाजी मुन्नी बाजी के इंतकाल के बाद उनके भाई हाजी उस्मान अपनी ज़िम्मेदारी निभा रहे है बदर अली के नाम पर 2 मोहर्रम को आलम निकलते हैं ब्रिटिश हुकूमत से लेकर अब तक यह सिलसिला लगातार चलता चला आ रहा है।बदर अली का आलम जुलूस बकरामंडी कब्रिस्तान के सामने से लुधौरा, चूड़ी मोहाल, छिपयाना, नीली पोशरोड, बेकनगंज, नाला रोड, हलीम कालेज चौराहा, रूपम चौराहा, कुली बाज़ार लाटूश रोड, रोटी वाली गली, नई सड़क, दादा मियां चौराहा मीना इलेक्ट्रॉनिक, कास्ताना रोड होता हुए बकरमंडी कब्रिस्तान पर समापन हुआ। जुलूस के मार्गो पर जुलूस के इस्तकबाल व लंगर कैम्प लगे थे जिससे फूलों की पंखुड़ियों से इस्तकबाल हो रहा था पानी, शर्बत व लंगर बांटा जा रहा था। जुलूस में हक हुसैन, मौला हुसैन की नारों की गूंज रही। जुलूस में हाजी उस्मान, जाहिद उस्मान, साकिब अली, शाहिद अली, इखलाक अहमद डेविड चिश्ती, इशरत अली पार्षद, गुड्डू राजपूत, इन्दल राजपूत, लखपत, अब्दुल जाहिद, मोहम्मद नौशाद, सोनू अली आदि सैकड़ो लोग मौजूद थे।
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