एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स सेंट्रल आईएपी वर्कशॉप का कार्यक्रम किया गया आयोजन
हिंदुस्तान न्यूज़ एक्सप्रेस कानपुर। भारतीय बाल रोग अकादमी द्वारा एडोलसेंट हेल्थ एडुकेशन पर कार्यशाला का आयोजन हर्ष नगर स्थित होटल रीजेंटा में किया गया। कार्यशाला में बच्चो की ग्रोथ और सर्वाकल कैंसर के बारे में महत्वपूर्ण्ज्ञ जानकारियां विशेषज्ञो द्वारा उपस्थित लोगो को दी गई।कार्यशाला में कानपुर एवं आसपास के क्षेत्रों से लगभग 40 शिशु रोग विशेषज्ञों ने भाग लिया।एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स (एओपी) द्वारा सेंट्रल आईएपी वर्कशॉप का कार्यक्रम का शुभारंभ पारंपरिक दीप प्रज्वलन व वैदिक मंत्रोच्चरण के साथ किया गया। कार्यक्रम में राष्ट्रीय स्तर की विशेषज्ञ डॉ. पियाली भट्टाचार्य, डॉ. शालिनी भसीन एवं डॉ. अमितेश यादव ने किशोर स्वास्थ्य, मानसिक स्वास्थ्य एवं व्यवहार संबंधी समस्याओं पर विस्तृत व्याख्यान दिए।
वहीं, डॉ. राज तिलक ने एचपीवी वैक्सीन की उपयोगिता पर प्रकाश डालते हुए बताया कि समय पर टीकाकरण से सर्वाइकल कैंसर सहित एचपीवी से होने वाले अनेक गंभीर रोगों की प्रभावी रोकथाम की जा सकती है। एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स कानपुर के अध्यक्ष डॉ. जे. के. गुप्ता ने कहा कि स्वस्थ एवं मानसिक रूप से सशक्त किशोर ही देश के उज्ज्वल भविष्य की नींव हैं। उन्होंने कहा कि किशोरों की मानसिक समस्याओं को सामाजिक कलंक न मानते हुए समय पर पहचान और उपचार को प्राथमिकता देना समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। कार्यक्रम के दौरान मुख्य रूप से एकेडमी ऑफ पिड्रियाटिक्स के अध्यक्ष डॉ जे.क.े गुप्ता, सचिव एवं जीएसवीएम मेडिकल कालेज बाल रोग विभागध्यक्ष डॉ शैलेन्द्र गौतम, डॉ राज तिलक, पूर्व अध्यक्ष रोली मोहन श्रीवास्तव समेत एकेडमी के पदाधिकारी मौजूद रहे। - किशोरों का मानसिक स्वास्थ्य विश्वभर में गंभीर चिंता का विषय विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्लूएचओ) के अनुसार 10 से 19 वर्ष आयु वर्ग के प्रत्येक 7 किशोरों में से 1 किशोर किसी न किसी मानसिक विकार से प्रभावित है, जो इस आयु वर्ग में कुल रोग भार का लगभग 15 प्रतिशत है। मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं में चिंता और अवसाद सबसे प्रमुख कारण हैं, जो किशोरों में बीमारी एवं विकलांगता का सबसे बड़ा कारण बन चुके हैं। विशेषज्ञों ने बताया कि 50 प्रतिशत मानसिक रोगों की शुरुआत 14 वर्ष की आयु से पहले तथा 75 प्रतिशत समस्याएं 24 वर्ष की आयु तक प्रारंभ हो जाती है। यदि इनकी समय पर पहचान और उपचार न हो तो इसका प्रभाव शिक्षा, व्यक्तित्व विकास, सामाजिक संबंधों एवं भविष्य के जीवन पर पड़ता है। चिंताजनक तथ्य यह भी है कि आत्महत्या 15 से 29 वर्ष के युवाओं में मृत्यु के प्रमुख कारणों में से एक है, जिसे समय रहते मानसिक स्वास्थ्य सहायता उपलब्ध कराकर काफी हद तक रोका जा सकता है। - मां के ढाबे का खाना बच्चे के लिए जरूरी कार्यशाला में विशेषज्ञ डॉ पियाली भट्टाचार्य ने बताया गया कि बढ़ते बच्चे आम तौर पर मां के द्वाारा बनाये यानी की मां के ढ़ाबे का खाना न खा कर जंक फूड को बहुत पंसद कर रहे जिसके कारण उन्हें मोटापा होना, इंसुलीन में कमी होना, ज्यादा समय तक बच्चो का स्क्रीन टाइम, सोशल मीडिया का अत्यधिक उपयोग, शैक्षणिक प्रतिस्पर्धा, पारिवारिक तनाव, साथियों का दबाव, साइबर बुलिंग एवं नशे की प्रवृत्ति किशोरों के मानसिक स्वास्थ्य को गंभीर रूप से प्रभावित कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि च्चों के व्यवहार में अचानक परिवर्तन, पढ़ाई में रुचि कम होना, अकेलापन, चिड़चिड़ापन, नींद की समस्या तथा आत्मविश्वास में कमी जैसे लक्षणों को सामान्य मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।- एचपीवी वैक्सीन गंभीर रोगो को रोकने में सक्षमकार्यशाला में आए विशेषज्ञ डॉ राज तिलक ने बताया कि एचपीवी यानी की ह्यूमन पैपिलोमा वायरस है। यह एक यौन संचारित संक्रमण (एसटीआई) है,जो मुख्य रूप से असुरक्षित यौन संबंध या त्वचा के सीधे संपर्क से फैलता है। अधिकांश लोगों में इसके कोई लक्षण दिखाई नहीं देते और शरीर का इम्यून सिस्टम इसे अपने आप खत्म कर देता है, हालाँकि, कुछ प्रकार के एचपीवी जननांगों में मस्से पैदा कर सकते हैं जोकि कैंसर का खतरा हो कसता है। इसके साथ ही कुछ उच्च जोखिम वाले एचपीवी वायरस (जैसे एचपीवी 16 और 18) लंबे समय तक शरीर में रहने पर कैंसर का कारण बन सकते हैं। यह मुख्य रूप से महिलाओं में सर्वाइकल कैंसर (गर्भाशय ग्रीवा का कैंसर) का सबसे बड़ा कारण है। इसके अलावा, यह मुंह, गले, गुदा और लिंग के कैंसर से भी जुड़ा हुआ है। बचाव और उपचार एचपीवी संक्रमण का कोई इलाज नहीं है, लेकिन इसके लक्षणों और इससे होने वाले कैंसर से बचाव के लिए एचपीवी का टीका लगवाना जयरी है। यह टीका यौन सक्रिय होने से पहले लगवाना सबसे प्रभावी माना जाता है
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