‘ग्रांट राइटिंग एवं रिसर्च मेथोडोलॉजी वर्कशॉप’आयोजित
यूपीयूएमएस सैफई में स्वास्थ्य अनुसंधान विभाग (डीएचआर), स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार, नई दिल्ली एवं आईसीएमआर के सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (CCoE) आईआईटी-बीएचयू के सहयोग से ‘ग्रांट राइटिंग एवं रिसर्च मेथोडोलॉजी वर्कशॉप’आयोजित
हिंदुस्तान न्यूज़ एक्सप्रेस सैफई, इटावा। उत्तर प्रदेश आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय (यूपीयूएमएस), सैफई में माननीय कुलपति प्रो. (डॉ.) अजय सिंह के मार्गदर्शन में चिकित्सा अनुसंधान, वैज्ञानिक नवाचार एवं गुणवत्तापूर्ण शोध को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से मल्टीडिसिप्लिनरी रिसर्च यूनिट (एमआरयू) द्वारा ‘ग्रांट राइटिंग एवं रिसर्च मेथोडोलॉजी वर्कशॉप’ का आयोजन किया गया। भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) के सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (CCoE), आईआईटी-बीएचयू के सहयोग तथा भारत सरकार के स्वास्थ्य अनुसंधान विभाग (DHR) के तत्वावधान में आयोजित इस तीन दिवसीय कार्यशाला में विभिन्न प्रतिष्ठित चिकित्सा एवं शैक्षणिक संस्थानों के शोधकर्ताओं, संकाय सदस्यों और विशेषज्ञों ने सहभागिता की।कार्यशाला के दौरान शोध पद्धति, शोध प्रश्नों का निर्धारण, सैंपल साइज कैलकुलेशन, बायोस्टैटिस्टिक्स, वैज्ञानिक लेखन, शोध नैतिकता, ग्रांट प्रपोजल तैयार करने तथा बजट निर्माण जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान किया गया। इसके साथ ही PICO/ePICO/PICOT फ्रेमवर्क के माध्यम से शोध विचारों को सुव्यवस्थित एवं प्रभावी अनुसंधान प्रस्तावों में परिवर्तित करने पर विशेष जोर दिया गया।
कार्यशाला में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार के स्वास्थ्य अनुसंधान विभाग (DHR), ICMR-CCoE, आईआईटी-बीएचयू, संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान (SGPGIMS), लखनऊ तथा यूपीयूएमएस सैफई से जुड़े विशेषज्ञों ने अपने अनुभव और विशेषज्ञता साझा की।कार्यशाला में डॉ. संजीव कुमार माहतो, डॉ. तनु आनंद, डॉ. दीपिका, डॉ. पूजा यादव, डॉ. विनोद तिवारी, डॉ. सुनील कुमार, डॉ. धीरज कुमार श्रीवास्तव, डॉ. अनुप कुमार, डॉ. विवेक आनंद ओझा तथा डॉ. विनय कुमार गुप्ता ने विभिन्न विषयों पर प्रतिभागियों का मार्गदर्शन किया। विशेषज्ञों ने शोध की रूपरेखा तैयार करने, उपयुक्त अध्ययन पद्धति का चयन करने, नमूना आकार निर्धारित करने, सांख्यिकीय विश्लेषण की उपयोगिता समझने, वैज्ञानिक लेखन को प्रभावी बनाने तथा अनुसंधान परियोजनाओं के लिए वित्तीय सहायता प्राप्त करने हेतु गुणवत्तापूर्ण प्रस्ताव तैयार करने के महत्वपूर्ण पहलुओं पर प्रकाश डाला।इस कार्यशाला में इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (IMS), काशी हिंदू विश्वविद्यालय (BHU), एम्स रायबरेली, जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज, कानपुर, मोतीलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज, प्रयागराज तथा मेजबान संस्थान यूपीयूएमएस सैफई के प्रतिभागियों ने सहभागिता की। विभिन्न संस्थानों से आए प्रतिभागियों को आपसी संवाद, अनुभवों के आदान-प्रदान और सहयोगात्मक अनुसंधान की संभावनाओं पर विचार-विमर्श करने का अवसर मिला।कार्यशाला का एक प्रमुख उद्देश्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़ी वास्तविक समस्याओं की पहचान कर उनके समाधान के लिए उपयोगी, नैतिक एवं समाजोपयोगी शोध को बढ़ावा देना रहा। इस दौरान शोध को केवल अकादमिक उपलब्धि तक सीमित न रखकर मरीजों के उपचार, स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता और जनस्वास्थ्य में सुधार का प्रभावी माध्यम बनाने पर विशेष बल दिया गया।विश्वविद्यालय के माननीय कुलपति प्रो. (डॉ.) अजय सिंह ने इस प्रतिष्ठित कार्यशाला के आयोजन को विश्वविद्यालय के लिए गौरव का विषय बताते हुए कहा कि अनुसंधान वैज्ञानिक प्रगति और साक्ष्य-आधारित स्वास्थ्य सेवाओं की आधारशिला है। गुणवत्तापूर्ण अनुसंधान के माध्यम से चिकित्सा पद्धतियों को अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है और मरीजों को बेहतर उपचार उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति की जा सकती है।कार्यशाला के संयोजक एवं मल्टीडिसिप्लिनरी रिसर्च यूनिट (MRU) के नोडल अधिकारी प्रो. (डॉ.) सुशील कुमार शुक्ला ने बताया कि इस आयोजन का उद्देश्य विश्वविद्यालय में अनुसंधान की संस्कृति को प्रोत्साहित करना और शोधकर्ताओं को गुणवत्तापूर्ण वैज्ञानिक कार्य के लिए आवश्यक व्यावहारिक कौशल प्रदान करना है। उन्होंने कहा कि प्रभावी शोध प्रस्ताव तैयार करने, वैज्ञानिक लेखन में दक्षता विकसित करने तथा अनुसंधान के लिए उपलब्ध वित्तीय सहायता के अवसरों को समझने में इस प्रकार की कार्यशालाएं महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।कुलपति प्रो. (डॉ.) अजय सिंह के मार्गदर्शन तथा प्रो. (डॉ.) सुशील कुमार शुक्ला के समन्वय में आयोजित यह पहल इस विचार को सशक्त करती है कि एक बेहतर शोध प्रश्न, एक सुदृढ़ वैज्ञानिक प्रस्ताव और एक नई खोज भविष्य में किसी मरीज के लिए बेहतर उपचार की उम्मीद बन सकती है। यूपीयूएमएस सैफई का यह प्रयास चिकित्सा अनुसंधान को जनस्वास्थ्य की जरूरतों से जोड़ते हुए मानव जीवन की गुणवत्ता में सुधार के व्यापक लक्ष्य की दिशा में सार्थक योगदान देने की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
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