जू के 52 साल: पहले 52 बच्चों को 'फ्री एंट्री' का तोहफा, - मनेगा जश्न-ए-एलेन फॉरेस्ट!
हिंदुस्तान न्यूज़ एक्सप्रेस कानपुर। प्राकृतिक जंगलों की शांति, परिंदों की चहचहाहट और बाघों की दहाड़—यही पहचान है हमारे 'एलेन फॉरेस्ट' यानी कानपुर चिड़ियाघर की। 4 फरवरी 1974 को जब पहली बार इसके दरवाजे आम जनता के लिए खुले थे, तब यह महज एक प्राकृतिक जंगल था। आज अपनी स्थापना के 52वें पड़ाव पर यह उत्तर भारत के सबसे पसंदीदा पर्यटन स्थलों और पर्यावरण संरक्षण के प्रमुख केंद्रों में शुमार हो चुका है। आज यह न केवल वन्यजीवों का बसेरा है, बल्कि कानपुर की पहचान और पर्यावरण संरक्षण का एक बड़ा केंद्र भी बन चुका है। किसी ने नहीं सोचा था कि एक ऊदबिलाव से शुरू हुआ यह सफर आज 1240 वन्यजीवों के विशाल परिवार में बदल जाएगा। बुधवार को चिड़ियाघर प्रशासन इस वर्षगांठ को बेहद धूमधाम से मनाने जा रहा है। इस साल का स्थापना दिवस बच्चों के लिए खुशियों की सौगात लेकर आया है। जू प्रशासन के निर्णय के अनुसार, स्थापना दिवस के मौके पर चिड़ियाघर आने वाले पहले 52 बच्चों (12 वर्ष से कम) को बिल्कुल मुफ्त प्रवेश दिया जाएगा। इस सुविधा का लाभ उठाने के लिए बच्चों को अपना आधार कार्ड या जन्म प्रमाण पत्र साथ लाना अनिवार्य होगा। 18 हेक्टेयर में फैली प्राकृतिक झील इस चिड़ियाघर की खूबसूरती में चार चाँद लगाती है। चिड़ियाघर के निदेशक कन्हैया पटेल बताते हैं कि यह क्षेत्र कभी मिस्टर एलन की मिल्कियत था, इसीलिए इसे 'एलेन फॉरेस्ट' कहा जाता है। उत्तर भारत का एक ऐसा इकलौता ठिकाना बन चुका है जहाँ 'वालाबी' (कंगारू जैसा जीव), रंग-बिरंगे मकाऊ पक्षी और दुर्लभ 'ग्रीन इगुआना' जैसे जीव मौजूद हैं। ये खास मेहमान गुजरात के 'वनतारा' और 'इन्दिरा गांधी जूलॉजिकल पार्क' से एनिमल एक्सचेंज प्रोग्राम के जरिए यहाँ लाए गए हैं, जो अब कानपुर की शान बढ़ा रहे हैं।
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