शिव बारात में उमड़ा जनसैलाब
*सुरक्षा व्यवस्था को लेकर प्रशासन अलर्ट
वाराणसी ब्यूरो प्रदुमन पांडे के साथ सूरज यादव
हिंदुस्तान न्यूज़ एक्सप्रेस वाराणसी। महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर महा मृत्युंजय मंदिर से डेढसी पुल तक निकली शिव बारात ने काशी को एक बार फिर आस्था, उल्लास और लोक परंपरा के अद्भुत रंग में रंग दिया। "जस दूल्हा तस बनी बराता की भावभूमि पर सजी इस बारात में अ-शिव वेशधारी शिव वर, औघड़, बाबा के गण, भूत-पिशाच, दैत्य-राक्षस, बंदर-भालू, सपेरे और मदारी शामिल होकर कण-कण में शंकर होने का एहसास करा रहे थे।
बाबा और औघड़ों की इस अनूठी बारात को देखने के लिए महिलाएं महीनों पहले से लोकगीत गुनगुनाती रही थीं. चल सखी देखि आई शिव का बरतियां। जैसे ही शिव बारात महा मृत्युंजय मंदिर से आगे बढ़ी, सड़क के दोनों ओर ठसाठस भीड उमड़ पड़ी। छों पर तिल रखने की भी जगह नहीं थी। सबकी निगाहें दूर से पास आती रोशनी और झांकियों पर टिकी थी। और जैसे ही इहलोक-परलोक की झांकी समेटे शिव बारात समीप पहुंची, वातावरण 'हर-हर महादेव के जयघोष से गूंज उठा।
आज से 44 वर्ष पूर्व काशी में बाबा भोलेनाथ का दर्शन-पूजन तो होता था, किंतु इस प्रकार का सार्वजनिक उत्सव नहीं निकलता था। काशी विश्वनाथ मंदिर के अर्घा में लगे सोने की चोरी और उसके पुनः प्राप्त होने के बाद शिव बारात के रूप में जो उत्सव शुरू हुआ, वह देखते ही देखते शहर का सबसे बड़ा लोक उत्सव बन गया और अब यह लाखों श्रद्धालुओं का मेला बन चुका है।
इस वर्ष की बारात में क्या बाराती और क्या घराती, सभी होली के रंग में सराबोर नजर आए। ऐसा लगा मानो फाल्गुन की होली समय से पहले हो उत्तर आई हो। विभिन्न प्रांतों की झांकियां और रंगों से सजी टोलियां आकर्षण का केंद्र रही। बारात में शामिल लोग ही नहीं, बल्कि उसे देखने वाले भी झूमते-गाते नजर आए। बारात में दूल्हे के रूप में प्रसिद्ध नेत्र चिकित्सक डॉ. अनुराग टंडन, सहबाला के रूप में एक कुंतल के डाक्टर रमेश दत्त पांडेय जी शहबाला और दुल्हन के रूप में व्यापारी नेता बदरुद्दीन अहमद की सहभागिता ने काशी की गंगा-जमुनी तहजीब का जीवल दृश्य प्रस्तुत किया। खांटी बनारसी अंदाज के लिए प्रसिद्ध अभिनेता संजय मिश्रा की उपस्थिति ने बारात की रौनक और बढ़ा दी।
अघौडी, भूत-पिशाच, देवी-देवता, किन्नर, सपेरे, मदारी, जादूगर और विभिन्न झांकियों से सजी यह बारात भानो लोक और अलौकिक के संगम का दृश्य बन गई थी। आयोजकों ने बाबा की बारात को आकर्षक बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी। बरसाने की लट्ठमार होली की झांकी विशेष आकर्षण का केंद्र रही।
महा मृत्युंजय से डेढ़सी पुल तक निकली यह शिव बारात एक बार फिर सिद्ध कर गई कि काशी में उत्सव केवल मनाए नहीं जाते, बल्कि जीए जाते हैं। यहां हर आस्था लोक परंपरा में ढलकर जन-जन का उत्सव बन जाती है। महाशिवरात्रि की इस अनुपम छटा ने एक बार फिर काशी को शिवमय कर दिया। पहली बार महंत निवास के घर से प्रतीकात्मक प्रतिमा, दड और छतरी के साथ नगाड़े की गड़गड़ाहट के साथ महामृत्युंजय मंदिर दारा नगर ले जाई गई जहां महामृत्युंजय के महंत परिवार ने बाबा की आरती किया उसके बाद काशी की महिलाओं ने अपने बाबा का परछन कर बाबा को इलायची सेवा का सेहरा पहना कर मां गौरा को विवाह कर लाने के लिए विदा किया पूरा माहौल वैवाहिक लोक गीत से गूंज रहा
था। सर्वश्री आर के चौधरी, दीपक बजाज, रमेश दुबे, संदीप केशरी, पवन खन्ना, महेश माहेश्वरी, कमल सिंह, अशोक चौरसिया, राजू वर्मा, विवेक मेहरोत्रा आकाश शाह,
गोरख यादव बारात के सुचारु संचालन में लगे रहे। संयोजक/महामंत्री दिलीप सिंह ने बारातियों को साधुवाद दिया।