क्रांतिकारी वासुदेव बलवंत फड़के के तैल चित्र में किया माल्यार्पण |
सुनील कुमार धुरियासंवाददाता
हिंदुस्तान न्यूज़ एक्सप्रेस सुमेरपुर ,हमीरपुर l देशभक्तों की देश के प्रति भूमिका के मद्देनजर वर्णिता संस्था के तत्वावधान में विमर्श विविधा के अन्तर्गत जिनका देश ऋणी है के तहत संस्था के अध्यक्ष डा भवानीदीन ने क्रांतिकारी आन्दोलन के आदि योद्धा वासुदेव बलवंत फडके की पुण्यतिथि 17 फरवरी पर श्रद्धासुमन अर्पित करते हुए कहा कि फड़के सही अर्थों में मातृभूमि के आदि सूरमा थे, उनके योगदान को भुलाया नहीं जा सकता है, इनका जन्म महाराष्ट्र के सिरधों में बलवंत और सरस्वती बाई के घर 04 नवंबर 1845 को हुआ था,ये प्रारम्भ से देशधर्मी थे, इन्होंने कोल,भील और द्रविडों को लेकर रामोशी नाम का एक
एक संगठन बनाया था,इसी के बैनर तले आजादी की लड़ाई लड़ी थी, भितरघात के फड़के भी शिकार हुए थे,इनकी जेल में ही मृत्यु हो गई थी, ये युवा काल में ही देश के काम आ गये थे। इनका निधन 17 फरवरी 1883 को हुआ था। कार्यक्रम में अशोक अवस्थी, सिद्धा, प्रेम, सागर, महावीर प्रजापति इलेक्ट्रीशियन, रिचा, रामनारायन सोनकर, विकास, रामबाबू, सतेन्द्र और राहुल प्रजापति आदि शामिल रहे।