विनायक दामोदर सावरकर की पुण्यतिथि पर किया गया याद |
सुनील कुमार धुरिया संवाददाता
हिंदुस्तान न्यूज़ एक्सप्रेस हमीरपुर l सुमेरपुर, देशभक्तों की देश के प्रति भूमिका के मद्देनजर वर्णिता संस्था द्वारा विमर्श विविधा के अन्तर्गत जिनका देश ऋणी है के तहत संस्था के अध्यक्ष डा भवानीदीन ने देशधर्म और रचनाधर्म के संगम के साक्षी विनायक दामोदर सावरकर की पुण्यतिथि 26 फरवरी पर श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि सावरकर यथार्थ में मातृभूमि के सच्चे सूरमा थे, इनके योगदान को भुलाया नहीं जा सकता है। सावरकर का जन्म महाराष्ट्र के नासिक के भगूर में दामोदर सावरकर और राधा बाई के घर 28 मई 1883 को हुआ था, इन्होंने उच्च शिक्षा प्राप्त की, उसके बाद अखिल भारतीय हिन्दू महासभा का गठन कर उसके छ बार अध्यक्ष चुने गए, ये सरकार के विरोधी थे, ये तेरह वर्ष जेल में रहे, इन्हें दो बार आजन्म कारावास की सजा मिली, ये सेलुलर जेल में रहे,ये एक हत्या केस में भारत लाये जा रहे थे,ये समुद्र में भागना चाह रहे थे, पुनः पकड़े गए,इन पर अनेक प्रकार के आरोप लगाये गये,जो समीचीन नहीं थे। ये पहले भारतीय थे, जिन्होंने पहला झन्डा बनाया, स्वदेशी का नारा दिया,ये हिन्दू ,हिन्दी और हिन्दुस्तान पर अपने को फ़ोकस करते थे,साथ ही पूर्ण स्वतंत्रता की मांग की। आजाद भारत में भी इन पर झूठा मुकदमा चला, निर्दोष साबित हुये, सरकार ने माफी मांगी। कालांतर में इनका 26 फरवरी 1966 को निधन हो गया। कार्यक्रम में सिद्धा, प्रेम, सागर, प्रिन्स, रिचा, रामनारायन सोनकर, विकास, रामबाबू, होरी लाल, सतेन्द्र और राहुल प्रजापति आदि शामिल रहे।