विश्व जल दिवस के अवसर पर सेमीनार/जागरूकता
हिंदुस्तान न्यूज़ एक्सप्रेस कानपुर | सीएसए के गोल्डन जुबली वर्ष के उपलक्ष पर मनाये जा रहे,कार्यक्रमों की श्रृंखला में आज विश्व जल दिवस के अवसर पर कृषि एवं वानिकी महाविद्यालय के अधिष्ठाता डॉ. कौशल कुमार के सक्षम नेतृत्व में "हार्नेस द पावर ऑफ़ वाटर एंड जेंडर फॉर सस्टेनेबल फ्यूचर" विषय पर एक सेमिनार का आयोजन किया गया। डॉ कुमार ने बताया कि भारत में विश्व के 4% जल की उपलब्धता के सापेक्ष में 16 से 17% मानव जनसंख्या एवं 17 से 18% पशु जनसंख्या है अतः भविष्य में जल उपलब्धता की चुनौतियों के लिए कृषि एवं संबंधित क्षेत्र में विवेकपूर्ण एवं कुशल जल उपयोग में महिलाओं के समुचित भागीदारी पर बल दिया है कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों एवं शिक्षकों के बीच जल संरक्षण के महत्व, जल संसाधनों के सतत प्रबंधन तथा वैश्विक जल चुनौतियों के समाधान की तात्कालिक आवश्यकता के प्रति जागरूकता बढ़ाना था। इस अवसर पर मुख्य अतिथि श्री कमल कटियार, उपनिदेशक, मृदा संरक्षण तथा विशिष्ट अतिथि श्रीमती प्रीति गंगवार, उपनिदेशक, राष्ट्रीय उत्पादकता परिषद वाणिज्य विभाग ने कृषि स्थिरता सुनिश्चित करने में मृदा एवं जल संरक्षण के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने खेत एवं सामुदायिक स्तर पर जल संसाधनों के संरक्षण हेतु समेकित दृष्टिकोण अपनाने पर विशेष जोर दिया।कार्यक्रम में अतिथि वक्ताओं के रूप में डॉ. वी. के. कनौजिया, के॰ वी॰ के॰ प्रमुख कन्नौज तथा वर्ल्ड वाइल्डलाइफ फंड से श्री राजेश बाजपेयी की उपस्थिति ने कार्यक्रम को और समृद्ध बनाया। उन्होंने जल संरक्षण, कुशल सिंचाई पद्धतियों तथा प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन में सामुदायिक सहभागिता से संबंधित व्यावहारिक अनुभव एवं नवाचारी रणनीतियों को साझा किया।विश्वविद्यालय के प्राध्यापक डॉ. मुनीश कुमार एवं डॉ. सर्वेश कुमार ने भी सभा को संबोधित करते हुए वैज्ञानिक जल प्रबंधन, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव तथा जल संरक्षण में युवाओं की भूमिका पर महत्वपूर्ण विचार प्रस्तुत किए। उन्होंने विद्यार्थियों को अपने दैनिक जीवन एवं व्यावसायिक कार्यों में सतत प्रथाओं को अपनाने के लिए प्रेरित किया। इस सत्र के दौरान डॉ. रामजी गुप्ता ने पशुपालन उद्योग में के फायदे जल प्रबंधन पर व्याख्यान दिया, डॉ. ऋचा शर्मा, डॉ. विपिन कुमार, डॉ. अनुराग कुमार सिंह, डॉ. शैलेंद्र प्रताप सिंह, डॉ. विजय कुमार, डॉ. शक्ति सिंह, डॉ. विकास सिंह एवं डॉ. योगेश कुमार सहित अनेक सम्मानित संकाय सदस्य उपस्थित रहे तथा कार्यक्रम की सफलता में अपना योगदान दिया।कार्यक्रम का कुशल संचालन डॉ. रजत मिश्रा द्वारा किया गया। अंत में धन्यवाद ज्ञापन के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ, जिसमें प्रतिभागियों को जल संरक्षण एवं सतत विकास की दिशा में सक्रिय योगदान देने के लिए प्रेरित किया गया।
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