जलते हुए दिए को बुझाया न कीजिए ग़ज़ल पढ़ कर लूटी वाहवाही |
जिला संवाददाता सुनील कुमार धुरिया
हिंदुस्तान न्यूज़ एक्सप्रेस सुमेरपुर,हमीरपुर l अखिल भारतीय साहित्य परिषद जिला इकाई हमीरपुर उत्तर प्रदेश के तत्वावधान में 23 मार्च 2026 को रात्रि 8 बजे से दस बजे तक कवि हरीराम गुप्त 'निरपेक्ष' के आवास परनामी भवन सुमेरपुर में आयोजित कवि गोष्ठी में ज्ञान की देवी माता सरस्वती का पूजन अर्चन और वंदना के पश्चात्, भारत की स्वतंत्रता में प्राण न्योछावर करने वाले क्रांतिवीरों को श्रद्धा सुमन अर्पित कर शहीद दिवस मनाया गया। शहीदों के सम्मान में देश के प्रति श्रद्धा निष्ठा और तन मन धन से पूर्ण समर्पण की शपथ ली गयी। कवि गोष्ठी के मुख्य अतिथि स्वामी नित्यानंद महाराज ने अपनी कंकर से शंकर रचनाकृति से -"चेतना के निराभाव में भी चेतन रहता है। ध्यान ज्ञान विज्ञान शोध कर तत्व उसे कहता है।" प्रस्तुत कर मन्त्रमुग्ध कर दिया। कवि गजेंद्र नारायण दीक्षित 'मोक्ष' ने -" समता मूलक विश्व का, सबसे बड़ा विधान। तो कवि /पत्रकार डॉ. गणेश सिंह 'विद्यार्थी ' ने पढ़ा "शहीदों की शहादत ने हमारे मुल्क को सँवारा है, ये भारतवर्ष ये भारत वर्ष ये भारत वर्ष हमारा है।" शायर वीरेंद्र कुमार 'शजर 'ने -"जलते हुए दिए को बुझाया न कीजिये "गज़ल पढ़ कर वाहवाही लूटी। वयोवृद्ध कवि नारायण प्रसाद रसिक ने - "डाल डाल से महुवा टपकें, पात पात सुंदरता झलके।" प्रकृति श्रंगार की रचना प्रस्तुत की। कवि राजेंद्र "प्रेमी ने वियोगी अंदाज में- " तुम्हारे आने का एहसास, काश तुम होते मेरे पास।" गीत पढ़ कर शमा बाँध दी। उपाध्यक्ष नीतिराज सिंह ने - "प्रभु लीला हित शत योजन, हनुमत को जाना पड़ता है" पढ़ा। कवि मुन्नीलाल अवस्थी ने - "यह प्यार की तरंग है या बहुत दूर की सुरंग है।" पढ़ा। नवयुवक कवि उमेश कुमार सोनी ने "आओ पूजे धरा को सभी हम, जिसकी मिट्टी का ऋण हम लिए हैं।" देश प्रेम का गीत गाया। संचालक संस्था के मंत्री कैलाश प्रसाद "सोनी" ने पढ़ा - आदि शक्ति माँ जगदम्बे की, अनुपम अलख कहानी हैं, लेकर नाम चूमते फंदा, क्रांति वीर बलिदानी हैं।" अंत में गोष्ठी की अध्यक्षता कर रहे हरीराम गुप्त 'निरपेक्ष' ने - " विषय वासना लतें, सब की सब मुसीबतें, बनातीं हैं गुलाम ये, कष्टदायी आदतें। " गाकर समापन की घोषणा की। अंत में सभी उपस्थित कवि साहित्यकारों के प्रति आभार व्यक्त किया गया।
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