टेलीग्राम पर बिक रही थी किडनी, अब तक 50 से ज्यादा अवैध ट्रांसप्लांट, छह गिरफ्तार
-अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अंगों की तस्करी से जुड़े हैं तार: रघुवीर लाल
हिंदुस्तान न्यूज़ एक्सप्रेस कानपुर। पुलिस ने किडनी ट्रांसप्लांट रैकेट का भंडाफोड़ किया, जिसके तार बिहार से लेकर उत्तराखंड और साउथ अफ्रीका तक जुड़े हैं। सोमवार को कल्याणपुर और रावतपुर क्षेत्र के तीन अस्पतालों में की गई छापेमारी के बाद पुलिस ने इंडियन मेडिकल एसोसिएशन की उपाध्यक्ष डॉ. प्रीति आहूजा और उनके पति डॉ. सुजीत सिंह आहूजा समेत छह मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार किया।जांच में चौंकाने वाला खुलासा हुआ। पुलिस आयुक्त रघुबीर लाल ने खुलासे में बताया कि यह गिरोह केवल देश के भीतर ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अंगों की तस्करी कर रहा था। आठ मार्च को इसी गिरोह ने साउथ अफ्रीका की एक महिला 'अरेबिका' का अवैध किडनी ट्रांसप्लांट किया था। रविवार को ही नोएडा के एक नामी स्कूल संचालक की पत्नी पारुल का ट्रांसप्लांट किया गया था। पारुल पिछले आठ साल से मेरठ में डायलिसिस करा रही थीं। बता दें कि किडनी देने वाला युवक आयुष मूल रूप से बिहार का रहने वाला है और उत्तराखंड से बीए (4th की पढ़ाई कर रहा है। पुलिस जांच में सामने आया कि मरीजों को फंसाने के लिए सोशल मीडिया का सहारा लिया जाता था। मेरठ में डायलिसिस के दौरान डॉ. अफजल नामक व्यक्ति ने पारुल से संपर्क किया। अफजल ने उन्हें एक टेलीग्राम ग्रुप से जोड़ा, जहां किडनी दाताओं और जरूरतमंदों की जानकारी साझा की जाती थी। पूरी प्रक्रिया के दौरान कोई भी आधिकारिक फाइल तैयार नहीं की जाती थी। डॉ. रोहित उर्फ राहुल अपनी टीम के साथ मिलकर सर्जरी को अंजाम देता था। पुलिस कमिश्नर रघुबीर लाल के अनुसार, मार्च में सूचना मिलने पर आरोही हॉस्पिटल को सील किया गया था। लेकिन गिरोह इतना शातिर था कि 23 मार्च को आरोपी डॉ. राजेश ने मेडलाइफ हॉस्पिटल के संचालक के साथ साझेदारी कर ली और वहां अवैध काम शुरू कर दिया। अब तक शहर के सात बड़े नर्सिंग होम का नाम इस रैकेट में सामने आया है, जहां 50 से ज्यादा ट्रांसप्लांट होने की आशंका है।