चिकित्सक ने एक दुर्लभ और बड़े हर्निया का किया सफ़ल इलाज
हिंदुस्तान न्यूज़ एक्सप्रेस कानपुर | हर्निया सर्जरी के क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। दरअसल हॉस्पिटल ने एक ऐसे मरीज़ का सफलतापूर्वक इलाज किया, जिसे लंबे समय से एक बड़ा हर्निया था। इसकी वजह से उसका चलना-फिरना दूभर हो गया था और ज़िंदगी की गुणवत्ता पर काफी बुरा असर पड़ा था। यह जटिल सर्जरी सर्जिकल गैस्ट्रोएंटरोलॉजी के डायरेक्टर डॉ. अभिमन्यु कपूर द्वारा ऑपरेशन से पहले ध्यानपूर्वक जांच और विधिवत योजना बनाने के बाद की गई।मरीज के ग्रोइन (पेट और जांघ के बीच काहिस्सा) में कई सालों से एक सूजन थी। यह सूजन लगातार बढ़ती जा रही थी। समय बीतने के साथ यह बढ़कर लगभग उसके घुटने तक पहुँच गई। इस वजह से उसे ठीक से चलने-फिरने या सामान्य कपड़े पहनने में काफ़ी मुश्किल होने लगी। डॉक्टरों ने इसकी पहचान 'जायंट इंगुइनोस्क्रोटल हर्निया' के रूप में की। यह एक ऐसी बीमारी होती है जिसमें आंत का एक बड़ा हिस्सा पेट से बाहर निकलकर अंडकोष (स्क्रोटल) में चला जाता है। शुरुआत में डॉक्टरों को मरीज को धीरे-धीरे समझाना पड़ा और उसे यह भरोसा दिलाना पड़ा कि इस समस्या का इलाज संभव है, क्योंकि मरीज को यह लगता था कि यह बीमारी अब कभी ठीक नहीं हो सकती। इस तरह के बड़े हर्निया बहुत कम देखने को मिलते हैं और ये काफी जटिल होते हैं, खासकर जब कई सालों तक इनका इलाज न किया गया हो तो ये बहुत गंभीर हो जाते हैं। समय के साथ शरीर इस असामान्य स्थिति का आदी हो जाता है, जिससे सर्जरी और भी मुश्किल हो जाती है। जब डॉक्टर अंगों को वापस पेट के अंदर ले जाने की कोशिश करते हैं, तो इससे शरीर के अंदर दबाव बढ़ सकता है और सांस लेने व किडनी के काम करने की क्षमता पर असर पड़ सकता है। सर्जरी की तैयारी के लिए मरीज़ को सबसे पहले एक खास इलाज प्रदान किया गया। डॉक्टरों ने पेट की मांसपेशियों को आराम देने और धीरे-धीरे उन्हें फैलाने के लिए बोटोक्स के इंजेक्शन दिए, ताकि आंतों को सुरक्षित रूप से वापस रखने के लिए पर्याप्त जगह बन सके। इसके लगभग चार हफ़्तों बाद सर्जरी की योजना बनाई गई।
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