गीतोत्सव पर कवियों ने खूब तालियां बटोरी
हिंदुस्तान न्यूज़ एक्सप्रेस कानपुर। साहित्यिक संस्था विकासिका एवं पर्यावरण विकास संस्थान के तत्वावधान में एक स्मृति समारोह "गीतोत्सव" कानपुर जर्नलिस्ट क्लब अशोक नगर में आयोजित किया गया। समारोह कार्यक्रम में दिवंगत कवियों के गीतों को कवियों द्वारा पढ़ा गया, जिसको समारोह में उपस्थित लोगों द्वारा खूब सराहा गया तथा कवियों ने खूब तालियां बटोरी। इसके पूर्व सरस्वती जी की प्रतिमा पर माल्यार्पण व दीप प्रज्वलन कर पूर्णिमा त्रिपाठी द्वारा वाणी वन्दना की गयी। विकासिका के सूत्रधार वरिष्ठ साहित्यकार डाक्टर विनोद त्रिपाठी ने कहा कि आज के स्मृति समारोह में उन दिवंगत साहित्यकारों को विनम्र श्रद्धांजलि देने का हम सभी को अवसर मिला जिन्होंने अपने जीवन काल में साहित्य के प्रति समर्पित जीवन मूल्यों की स्थापना करके समाज के लिए अपूरणीय योगदान प्रदान किया |कार्यक्रम के आयोजक राकेन्द्र मोहन तिवारी ने अपने संबोधन में कहा कि साहित्यिक एवं सामाजिक संस्था विकासिका के संस्थापक डॉ. विनोद त्रिपाठी जी एक कुशल प्रयोगधर्मी साहित्यकार हैं आज संस्था को 55 वर्ष हो रहे हैं और उनकी गति अभी भी तीव्र है यह साहित्य एवं साहित्यकारों के लिए शुभ संकेत है। गीतोत्सव भी उनकी प्रायोगिक परिकल्पना की उपज है, इसमें प्रत्येक कवितापाठी अपने अतिशय प्रिय अमर कवि की रचना का पाठ करके उनकी स्मृति को समाज में जीवित रखे हैं, तदुपरांत अपनी स्वरचित रचना का पाठ करके साहित्यकारों के बीच एक अच्छा संदेश दिया है।स्मृति को स्वर देने वालों में प्रमुख कविगण सुरेंद्र गुप्त 'सीकर' प्रमोद तिवारी - राहों में भी रिश्ते बन जाते हैं.... गोपाल दास 'नीरज'- ऐसे बदनाम हुए हम तो इस जमाने में. सुनीता तिवारी रामचंद्र नारायण द्विवेदी 'प्रदीप' - तेरे कांटों से भी प्यार, तेरे फूलों से भी प्यार. रामस्वरूप 'सिंदूर'- मधुर दिन बीते अनबीते.मुरली परिहार गोपाल सिंह 'नेपाली'- दीपक जलता रहा रात भर.श्री हरिवंश राय 'बच्चन'-अग्निपथ, अग्निपथ, अग्निपथ.सुरेश साहनी
श्री धर्मवीर भारती - अंजान नदी की नावें. देवल आशीष - प्रिये तुम्हारी सुधि को मैंने यूं ही अक्सर चूम लिया.शुभदा बाजपेई ज्ञान प्रकाश 'आकुल' - माटी का पलंग मिला, राखी का बिछउना डॉक्टर कुंवर 'बेचैन'- जागती है रात भर क्यों ये मरी आंखें तुम्हारी.विकास शुक्ल 'अक्षत' रमानाथ अवस्थी - महकता हर सिंगार जैसे पहला पहला प्यार, भारत भूषण - मैं गीत बेचकर घर आया.उमा विश्वकर्मा राजेंद्र यादव - आ बचपन के मीत की मुझको रात सुहानी लगती. रामचंद्र त्रिपाठी 'प्रसून'- वीणा में बंधा हुआ तार हूं.कार्यक्रम की अध्यक्षता पर्यावरण विकास संस्थान के अध्यक्ष सिद्धनाथ त्रिपाठी ने किया, मुख्य अतिथि पी. एस. बाजपेयी, संचालन पूर्णिमा त्रिपाठी ने किया तथा धन्यवाद एवं आभार विकासिका के संस्थापक डाॅ. विनोद त्रिपाठी ने व्यक्त किया। कार्यक्रम मे दुर्गा प्रसाद बाजपेयी, अंबुज गुप्ता, उमेश शुक्ल, अनिल त्रिपाठी, गोपी कृष्ण बाजपेयी, अमित गुप्ता, संजीव मिश्र, मोहम्मद अतहर, प्रेमसागर दुबे डा. शशि शुक्ला, सुरेंद्र सिंह भदौरिया, ओम नारायण शुक्ला, मनीष शुक्ला, दीपांजलि दुबे, अनीता वाला त्रिपाठी "अनुपम", अनूप कुमार पांडेय, मोहित पाठक 'ग्वालटोली', राजेंद्र कुमार बाजपेई, हर्षित शुक्ला, डा. सुषमा सेंगर, मनीष सरल, राजा, गोपी कृष्ण बाजपेई, राजेश त्रिपाठी 'आचार्य नगर', लक्ष्मी सविता, बृजेश कुमार, इरशाद कानपुरी, शिखा मिश्रा, अशोक गुप्ता 'अचानक', बृजेंद्र पाल सिंह, आदि प्रमुखरूप से उपस्थित रहे।