आईआईटी के शोधकर्ताओं ने बूंद की स्थिति को लेज़र फोकस के अनुसार किया समायोजित
हिंदुस्तान न्यूज़ एक्सप्रेस कानपुर | भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी कानपुर) के शोधकर्ताओं ने भारतीय विज्ञान संस्थान (आईआईएससी) बेंगलुरु तथा जर्मनी के यूनिवर्सिटी ऑफ ल्यूबेक के वैज्ञानिकों के साथ मिलकर लेज़र पल्स की सहायता से तरल बूंदों की गति और उनके विखंडन (टूटने) को सटीक रूप से नियंत्रित करने के लिए एक नई पूर्वानुमान प्रणाली विकसित की है। यह शोध प्रतिष्ठित जर्नलप्रोसीडिंग्स ऑफ द नेशनल एकेडमी ऑफ साइंसेज में प्रकाशित हुआ है। यह अध्ययन लेज़र और पदार्थ के बीच होने वाली जटिल क्रियाओं को बेहतर ढंग से समझने में मदद करेगा तथा लक्षित दवा वितरण, इंकजेट प्रिंटिंग, लेज़र आधारित निर्माण तकनीक और बायोमेडिकल अनुप्रयोगों जैसे क्षेत्रों में नई संभावनाएं खोल सकता है। सूक्ष्म तरल बूंदों को लेज़र की सहायता से विभिन्न दिशाओं—जैसे आगे, पीछे अथवा चारों ओर—में नियंत्रित रूप से संचालित किया जा सकता है। इसके लिए शोधकर्ताओं ने बूंद की स्थिति को लेज़र फोकस के अनुसार समायोजित किया तथा लेज़र पल्स की ऊर्जा को नियंत्रित किया। शोध में यह भी पाया गया कि लेज़र से उत्पन्न प्रारंभिक प्लाज़्मा की स्थिति बूंद के आकार में परिवर्तन, उसके विखंडन और उसकी गति को प्रभावित करती है।शोधकर्ताओं ने हाई-स्पीड इमेजिंग, ऑप्टिकल मॉडलिंग और मल्टीफेज न्यूमेरिकल सिमुलेशन की सहायता से “प्लेसमेंट-एनर्जी मैप्स” विकसित किए हैं, जो विभिन्न लेज़र परिस्थितियों में बूंदों के व्यवहार का पूर्वानुमान लगाने में सक्षम हैं। यह प्रणाली उन जटिल प्रक्रियाओं को नियंत्रित करने में सहायक होगी जिन्हें अब तक लगातार और सटीक रूप से दोहराना कठिन माना जाता था।इस शोध के महत्व पर प्रकाश डालते हुए आईआईटी कानपुर के एयरोस्पेस इंजीनियरिंग विभाग के डॉ. डी. चैतन्य कुमार राव ने कहा, “हम लंबे समय से इस बात का अध्ययन कर रहे हैं कि उच्च-शक्ति वाले लेज़र जब तरल पदार्थों और सॉफ्ट मैटर के साथ संपर्क करते हैं, तो किस प्रकार की जटिल भौतिक प्रक्रियाएं उत्पन्न होती हैं। अपने पूर्ववर्ती अध्ययनों में हमने लेज़र-प्रेरित एटोमाइजेशन, बबल डायनेमिक्स और इंटरफेस से जुड़ी प्रक्रियाओं का अध्ययन किया था। यह नया शोध उसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जो लेज़र द्वारा नियंत्रित बूंदों के व्यवहार को सटीक रूप से समझने और नियंत्रित करने में सहायता करेगा। इससे बायोमेडिकल उपकरणों, सूक्ष्म स्तर पर पदार्थों के परिवहन, एडिटिव मैन्युफैक्चरिंग तथा ऊर्जा प्रणालियों में नए अवसर विकसित हो सकते हैं।”इस अध्ययन की एक महत्वपूर्ण उपलब्धि यह है कि इसमें बूंदों के विखंडन की प्रक्रिया को नियंत्रित करने वाले स्थिर और संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान की गई है। शोधकर्ताओं के अनुसार, यह पूरी प्रक्रिया लेज़र की फोकसिंग स्थिति, बूंद के भीतर बनने वाली ऑप्टिकल संरचनाओं तथा आसपास के माध्यम में होने वाले ब्रेकडाउन की विशेषताओं पर निर्भर करती है।लेज़र-प्रेरित तरल बूंदों के विखंडन और बहुदिशात्मक गति का पूर्वानुमान एवं नियंत्रण” शीर्षक वाले इस शोध पत्र के लेखक अवनीश प्रताप सिंह, डॉ. डी. चैतन्य कुमार राव, माइक राहल्वेस, अल्फ्रेड वोगेल तथा सप्तर्षि बसु हैं।यह शोध द्रव यांत्रिकी, लेज़र-द्रव अंतःक्रिया तथा उन्नत प्रणोदन तकनीकों के क्षेत्र में आईआईटी कानपुर के निरंतर योगदान को दर्शाता है। ये क्षेत्र भविष्य की इंजीनियरिंग और बायोमेडिकल तकनीकों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।
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