बंध्याकरण के साथ सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के बाद मिल सकता है आवारा कुत्तो से छुटकारा
-शहर में आवारा कुत्तो के आतंक को लेकर नगर निगम का चला रहा अभियान
- प्रतिदिन लगभग 80 कुत्तों का किया जा रहा बध्याकरण
हिंदुस्तान न्यूज़ एक्सप्रेस कानपुर | शहर की सड़कों, चैराहो और गलियों में आवारा कुत्तों की भरमार है। आये दिन यह हिंसक कुत्ते किसी न किसी को अपना शिकार बना लेते है। कुत्तो द्वारा काटे जाने के बाद होने वाली रेबीज के संक्रमण से मौतो की संख्या बढती जा रही है। इन कुत्तों से निजाद दिलाने के लिए नगर निगम द्वारा कुत्तोे को बंध्याकरण करने का काम किया जा रहा है। वहीं अभी तक सुप्रीम कोर्ट का यह आदेश था, कि जहां से कुत्ता पकड़ा जाये वहीं बंध्याकरण के उपरान्त उसे छोड़ा भी जाये।
आवारा कुत्तो के कारण आये दिन होने वाली दुर्घटनाओं और उनके हिंसक प्रवृत्ति के कारण संक्रमक रोगियों की बढती संख्या को लेकर नगर निगम द्वारा कुत्ता बंध्याकरण का अभियान शुरू किया गया था, जिसके तहत प्रतिदिन 80 कुत्तों को बंध्याकरण किया जा रहा है लेकिन शहर में लगभग एक लाख तीस हजार हजार कुत्ते है और सभी का बंध्याकरण करने में सालों लग जायेगे। बता दें कि कुत्तो का बंध्याकरण करने के लिए नगर निगम द्वारा फूलबाग व जाना गांव में स्थित दो एनीमल बर्थ कंट्रोल मेसेंटर स्थापित है, जहां अभी तक 40 हजार कुत्तो का हीं बंध्याकरण किया जा सका है। पहले सुप्रीम कोर्ट का भी आदेश था कि जहां से कुत्तों को पकडा जाये वहीं छोडा जाये, लेकिन अब शायद जल्द ही शहरवासियों को कुत्तो के खौफ से जल्द निजाद मिल सकती है। सुप्रीम कोर्ट ने अब माना है कि मानव जीवन सर्वोच्च है और गरिमापूर्ण जीवन जीने के अधिकार में कुत्तो के काटने तथा उनके द्वारा हमले मानवता के विरूद्ध है। व्यक्ति को स्वतंत्र होकर घूमने का अधिकार है। इस सम्बन्ध में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जीवों की भलाई के कुकाबले इंसान की जान ज्यादा कीमती है। इसी को देखते हुए बीते मंगलवार को आवारा कुत्तों के हमलों की बढती घटनाओं को सुप्रीम कोर्ट ने गंभीरता से लेते हुए कुत्तो को मारने(यूथनेशिया) की अनुमति दे दी है। इस आदेश के बाद नगर निगम के लिए यह राहत भरी खबर होगी। कुत्तो को पकडना और छोडना, इसमें काफी समय लग जाता है लेकिन अब आवारा कुत्तो में हिंसक और रेबीजग्रस्त कुत्तों को मारा जा सकेगा, जिससे कुत्तों की संख्या में कमी आयेगी।