द्वितीय क्लीनिकल अपडेट सेमिनार में गंभीर बीमारियों पर हुई चर्चा
कानपुर। गैस्ट्रो लीवर हॉस्पिटल ने माल रोड स्थित किंगस्टन रिजॉर्ट में सी एम ई ऑर्गेनाइज्ड बाय गठिया, कार्यक्रम का आयोजन किया। इस कार्यक्रम में इस लिवर एवं गुर्दा व हार्ट जैसी गंभीर बीमारियो पर चर्चा की गई और बताया गया कि जिस प्रकार यह बीमारियां तेजी से अपने पांव पसार रही हैं जो कि एक चिंता का विषय है। इसी बात को ध्यान में रखते हुए कैस्ट्रॉल लिवर हॉस्पिटल की ओर से एक सेमिनार आयोजित की गई। जिसमें शहर एवं प्रदेश के डॉक्टरों ने अपने-अपने विचार रखें। सेमिनार का उद्घाटन जीएसवीएम मेडिकल कालेज की उप प्राचार्या डॉ रिचा गिरी एवं गैस्ट्रो लिवर हॉस्पिटल के डायरेक्टर वीके मिश्रा ने दीप प्रज्जवलन कर किया। इस दौरान कई डॉक्टरों को स्मृति चिन्ह देकर भी सम्मानित किया गया। टेंडर पाम सुपरस्पेशियलिटी लखनऊ से आए गुर्दा रोग विशेषज्ञ डॉ अरुण कुमार ने गुर्दे से सम्बंधित बीमीरियों के बारे में जानकारी दी। इसी क्रम में लीवर के डॉक्टर वी के मिश्रा ने बताया कि लोगों को शराब से दूरी बनानी होगी नही तो इसका सीधा प्रभाव मनुष्य के लिवर में पड़ता है। उन्होंने बताया कि शुरुआती लक्षण महसूस होने पर लोगों को चाहिए कि वह डॉक्टर से संपर्क करें ताकि समय रहते उपचार शुरू किया जा सके। वही हदय रोग विशेषज्ञ डॉ श्रीपाद ने बताया कि हदयघात सर्दियो में होता है गर्मियों में नही ऐसा कहना मिथक होगा क्यों कि ज्यादा गर्मी पडने से हार्ट फेलियर की संभावना ज्यादा बढ़ जाती है। उन्होंने कहा कि स्मोक का एक कश हार्ट अटैक की संभावना को ज्यादा बढ़ा देता है। बढ़ता प्रदूषण भी हार्ट फेलियर और हार्ट अटैक का एक प्रमुख कारण। उन्होंने कहा कि तम्बाकू का सेवन हार्ट और कैंसर जैसी बीमीरियों को बढ़ावा देने में सबसे आगे माना गया है। इस लिए 30 की उम्र से ही अगर कोई दिक्कत हार्ट, लिवर या गुर्दे में आती है तो तुंरत ही डाक्टर्स से सलाह ले नही तो बीमीरियां आगे चल कर खतरनाक हो सकती है। ज्यादा जंक फूड के चलते लोगों में हार्ट की बीमारी तेजी से बढ़ रही है उन्होंने अपील करते हुए कहा कि समय-समय पर यूरिक एसिड की जांच अवश्य कारण। सेमिनार में मुख्य रूप से डॉ नंदिनी रस्तोगी,? डॉ रिचा गिरी, डॉ शुभ्रा मिश्रा, डॉ युवराज गुलाटी, डॉ सौरभ चावला, डॉ भारत मल्होत्रा, डॉ विकास शुक्ला मुख्य रूप से मौजूद रहे। सेमिनार का संचालन डॉक्टर रंजन यादव ने किया।- हिचकी से नही पडता है लकवापेट की बामरियों के बारे में गैस्ट्रोइंट्रालाइज डीएम डॉ शुभ्रा मिश्रा ने जानकारी देते हुए बताया कि हिचकी आना कोई बीमारी नही है बल्कि चेस्ट और पेट की कैविटी के बीच जो खाला स्थान होता है,जिसे डायफ्रेम मसल कहते है उसके आपस में मिल जाने से हिचकी का प्रभाव बढ़ जाता है ,लेकिन हिचकी से किसी की लकवा जैसी हालत नही होती है। यह तभी होती है जब ब्रेन को खून नही पहुंच पाता है। मोटापे के बोर में उन्होंने कहा कि इसको नियंत्रित करना बहुत ही जरूरी है क्यों कि यह हार्ट,गुर्दे और कार्डिक वैसकुलर को नुकसान पहुंचाता है। ज्यादा मोटापा होने से व्यक्ति शुगर और बीपी जैसी बीमारियों की चपेट में जल्द आता है और और यही मोटापा गुर्दे और हार्ट के लिए परेशानी की ससब पैदा करता है।
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