गोष्ठी के माध्यम से किसानों को आय वृद्धि और पर्यावरण संतुलन पर दिया गया जोर
हिंदुस्तान न्यूज़ एक्सप्रेस कानपुर | सीएसए द्वारा संचालित कृषि विज्ञान केंद्र के माध्यम से मैथा विकास खंड के गांव पाण्डेय निवादा में किसानों के लिए एक कृषक गोष्ठी का आयोजन किया गया। इस गोष्ठी का मुख्य उद्देश्य फर्मेंटेड ऑर्गेनिक खाद के माध्यम से मिट्टी की उर्वरता बढ़ाना, किसानों की आय में सुधार करना और पर्यावरण संतुलन बनाए रखना था। इसमें 60 से अधिक किसानों ने भाग लिया।यह कार्यक्रम कृषि विज्ञान केंद्र दिलीप नगर द्वारा, डॉ. खलील खान के मार्गदर्शन में चल रही परियोजना के तहत आयोजित किया गया।किण्वित जैविक खाद एक जैविक रूप से स्थिर उत्पाद है, जिसे पशु गोबर, धान की पराली और अन्य कृषि अवशेषों के सूक्ष्मजीविय किण्वन से तैयार किया जाता है। यह प्रक्रिया नियंत्रित वायवीय या अवायवीय परिस्थितियों में होती है। किण्वन के दौरान जटिल कार्बनिक यौगिक विघटित होकर मिट्टी और पौधों के लिए सुलभ पोषक तत्वों में परिवर्तित हो जाते हैं।एफओएम का प्रयोग मिट्टी की संरचना सुधारने, पोषक तत्व अवशोषण बढ़ाने और मजबूत जड़ विकास के लिए किया जाता है। यह मिट्टी जनित रोगों और कीटों के प्रभाव को कम करता है और बलुई मिट्टी की जलधारण क्षमता बढ़ाता है। साथ ही, इसके प्रयोग से ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन में कमी भी आती है।गोष्ठी में उपस्थित किसानों ने एफओएम की खूबियों और जैविक खेती में पोषक तत्व प्रबंधन में इसकी उपयोगिता को विस्तार से जाना। यह खाद रासायनिक उर्वरकों पर किसानों की निर्भरता कम करने में सहायक साबित होगा और सतत खेती के लिए उपयुक्त विकल्प के रूप में काम करेगा। केंद्र के वैज्ञानिक डॉक्टर शशिकांत ने किसानों को विस्तार से खुरपका, मुंहपका पशुओं में होने वाले रोगों के प्रबंधन विषय पर किसानों की जानकारी दी।
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