अपशिष्ट प्रबंधन पर हुआ जागरूकता कार्यक्रम
हिंदुस्तान न्यूज़ एक्सप्रेस कानपुर। विवि के सामुदायिक विज्ञान महाविद्यालय के संसाधन प्रबंधन एवं उपभोक्ता विज्ञान बिभाग ने अपशिष्ट प्रबंधन विषय पर जागरूकता कार्यक्रम का हुआ। कार्यक्रम का नेतृत्व डॉ. रश्मि सिंह प्रभारी संसाधन प्रबंधन एवं उपभोक्ता विज्ञान विभाग और टीचिंग एसोसिएट एलेना ताखेल्लाम्बम एवं डॉ. स्वप्निल सिंह ने प्रतिभागियों से दैनिक जीवन में सतत् अपशिष्ट प्रबंधन अपनाने के महत्व पर जानकारी दी। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य सिंगल-यूज़ प्लास्टिक के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूकता फैलाना तथा पर्यावरण संरक्षण पर अपशिष्ट प्रबंधन को बढ़ावा देना था। सिंगल-यूज़ प्लास्टिक जैव-अवक्रमणीय नहीं होती, जिसके कारण यह मानव स्वास्थ्य, वन्यजीवों तथा पर्यावरण के लिए गंभीर खतरा उत्पन्न करती है। यह भूमि, जल एवं मृदा प्रदूषण का प्रमुख कारण बनती है। प्रतिभागियों को प्लास्टिक प्रदूषण को कम करने के लिए एकल-उपयोग प्लास्टिक का प्रयोग घटाने, पुनः उपयोग योग्य एवं पर्यावरण-अनुकूल विकल्प अपनाने, स्रोत स्तर पर कचरे का पृथक्करण, पुनर्चक्रण (रीसाइक्लिंग) तथा अपशिष्ट के वैज्ञानिक एवं जिम्मेदार निस्तारण के उपायों की जानकारी दी गई। कार्यक्रम में "लैंडफिल के लिए पार्कों का विकास – एक पर्यावरण-अनुकूल दृष्टिकोण" पर चर्चा की गई। इस दौरान प्रतिभागियों को क्ले कैपिंग तथा फाइटोकैपिंग जैसी लैंडफिल कैपिंग तकनीकों से अवगत कराया गया। विशेषज्ञों ने बताया कि फाइटोकैपिंग, जिसमें वनस्पतियों एवं प्राकृतिक मृदा प्रणाली का उपयोग कर लैंडफिल को ढका जाता है, पारंपरिक क्ले कैपिंग की तुलना में अधिक टिकाऊ, पर्यावरण-अनुकूल एवं किफायती तकनीक है। यह लैंडफिल से निकलने वाले हानिकारक उत्सर्जन एवं लीचेट को कम करने के साथ-साथ लैंडफिल स्थलों को हरित क्षेत्र एवं पार्कों में विकसित करने में भी सहायक सिद्ध होती है। कार्यक्रम में करीब 30 शिक्षकों, विद्यार्थियों एवं कर्मचारियों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की। सभी प्रतिभागियों ने सिंगल-यूज़ प्लास्टिक के उपयोग को कम करने तथा पर्यावरण संरक्षण के लिए सतत् एवं जिम्मेदार अपशिष्ट प्रबंधन अपनाने का संकल्प लिया।
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