भूजल संरक्षण और नदी पुनर्जीवन पर मंथन, जल शक्ति मंत्री ने सराहा कानपुर का मॉडल |
हिंदुस्तान न्यूज़ एक्सप्रेस कानपुर | भूजल सप्ताह के अंतर्गत रविवार को राज्य स्वच्छ गंगा मिशन, उत्तर प्रदेश एवं जिला गंगा समिति, कानपुर नगर के संयुक्त तत्वावधान में 'भूजल संरक्षण तथा नदी पुनरुद्धार' विषय पर एक दिवसीय सेमिनार आयोजित किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि प्रदेश के जल शक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह रहे। इस अवसर पर कल्याणपुर विधायक नीलिमा कटियार, जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह, नमामि गंगे विभाग के अपर मुख्य सचिव अनुराग श्रीवास्तव, राज्य स्वच्छ गंगा मिशन के परियोजना निदेशक जोगिंदर सिंह, राज्य स्वच्छ गंगा मिशन की यूनिट हेड सोनालिका सिंह तथा अन्य अधिकारी एवं विशेषज्ञ उपस्थित रहे। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए जल शक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह ने कहा कि जल संरक्षण केवल सरकारी दायित्व नहीं, बल्कि जनभागीदारी का अभियान है। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश भूजल प्रबंधन एवं विनियमन अधिनियम-2019 लागू करने वाला देश का पहला राज्य है। वर्ष 2017 में प्रदेश में अत्यधिक भूजल दोहन वाले 82 विकासखंड थे, जिनकी संख्या घटकर 44 रह गई है। पिछले पांच वर्षों में 29 जनपदों तथा 361 विकासखंडों में भूजल स्तर में सुधार दर्ज किया गया है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में 'वन डिस्ट्रिक्ट, वन नदी' अभियान के माध्यम से नदियों के पुनर्जीवन का कार्य तेजी से आगे बढ़ रहा है। प्रत्येक परिवार को वर्षा जल संचयन अपनाना चाहिए तथा जल की प्रत्येक बूंद को बचाने का संकल्प लेना चाहिए। जल शक्ति मंत्री ने कानपुर में जिला गंगा समिति एवं सहयोगी संस्थाओं द्वारा नदी संरक्षण, 'अर्थ गंगा', प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन तथा जनभागीदारी पर आधारित अभियानों की सराहना करते हुए इसे प्रदेश के लिए अनुकरणीय मॉडल बताया। कार्यक्रम का शुभारंभ गंगा जल से जल कलश पूजन के साथ हुआ। तकनीकी सत्र में आईआईटी कानपुर के सी-गंगा के संस्थापक प्रो. विनोद तारे ने छोटी नदियों के पुनर्जीवन एवं वैज्ञानिक संरक्षण पर व्याख्यान दिया। श्रमिक भारती के मुख्य कार्यकारी अधिकारी राकेश पाण्डेय ने वर्षा जल संचयन एवं भूजल पुनर्भरण की व्यवहारिक तकनीकों की जानकारी दी। वहीं प्लास्टिक फिशर इंडिया के परियोजना प्रबंधक अनुज कुमार श्रीवास्तव ने नदी से प्लास्टिक अपशिष्ट हटाने, उसके पुनर्चक्रण तथा उससे स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन के मॉडल को प्रस्तुत किया। इस अवसर पर मल्लाह, पुरोहित एवं पंडा समाज के स्वयंसेवकों को शामिल करते हुए गठित 'गंगा रक्षा दल' का शुभारंभ किया गया। जल शक्ति मंत्री, विधायक एवं जिलाधिकारी ने नमामि गंगे आजीविका हाट का भी अवलोकन किया। जिला परियोजना अधिकारी शशांक शुक्ला की पहल पर गंगा तटवर्ती विद्यालयों के विद्यार्थियों द्वारा तैयार प्लास्टिक रीसाइक्लिंग मॉडल तथा प्लास्टिक फिशर के समाधान आधारित उत्पादों का प्रदर्शन किया गया। स्वयं सहायता समूहों एवं किसान उत्पादक संगठनों के स्टॉल भी आकर्षण का केंद्र रहे।
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