आज से शहर में शुरू होगा निःशुल्क खुरपका-मुंहपका टीकाकरण अभियान
- समय पर टीकाकरण और भारत पशुधन ऐप पर पंजीकरण से ही मिलेगा पशुओं को बेहतर सुरक्षा हिंदुस्तान न्यूज़ एक्सप्रेस कानपुर | मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. अनुराग सिंह ने बताया कि खुरपका-मुंहपका (फुट एंड माउथ डिजीज-एफएमडी) से बचाव का सबसे प्रभावी उपाय समय पर टीकाकरण है। इसी क्रम में भारत सरकार एवं उत्तर प्रदेश शासन के निर्देशानुसार जनपद कानपुर नगर में 22 जुलाई 2026 से खुरपका-मुंहपका (एफएमडी) टीकाकरण अभियान प्रारंभ किया जा रहा है। अभियान के अंतर्गत जनपद के सभी गोवंशीय एवं भैंसवंशीय पशुओं का निःशुल्क टीकाकरण पशुपालकों के द्वार पर किया जाएगा। उन्होंने बताया कि खुरपका-मुंहपका पशुओं में होने वाली अत्यंत संक्रामक एवं आर्थिक दृष्टि से हानिकारक वायरल बीमारी है। यह रोग मुख्य रूप से गाय, भैंस, बैल, बछड़े, बकरी, भेड़ तथा सूकर जैसे खुर वाले पशुओं में फैलता है। एक संक्रमित पशु के संपर्क में आने से यह बीमारी तेजी से अन्य पशुओं में फैल सकती है। डॉ. सिंह ने बताया कि इस रोग के प्रमुख लक्षणों में तेज बुखार, मुंह, जीभ, मसूड़ों एवं होंठों पर दर्दयुक्त छाले, अधिक मात्रा में लार टपकना, खुरों के बीच छाले पड़ना, चलने में कठिनाई, लंगड़ापन, खुर फटना, चारा-पानी छोड़ देना, दूध उत्पादन में अचानक कमी अथवा दूध सूख जाना, गर्भित पशुओं में गर्भपात तथा छोटे बछड़ों में हृदय प्रभावित होने के कारण अचानक मृत्यु तक की संभावना शामिल है। उन्होंने कहा कि इस बीमारी से पशुपालकों को भारी आर्थिक क्षति होती है। दूध उत्पादन घट जाता है, पशुओं की कार्यक्षमता कम हो जाती है, उपचार पर अतिरिक्त खर्च करना पड़ता है तथा कई बार लंबे उपचार के बाद भी पशु पूरी तरह स्वस्थ नहीं हो पाते। मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी ने बताया कि यह रोग संक्रमित पशु, उसकी लार, दूध, मल-मूत्र, नाक से निकलने वाले स्राव, दूषित चारा-पानी, वाहन, उपकरण, कपड़े तथा संक्रमित व्यक्तियों के माध्यम से भी फैल सकता है। इसलिए एक संक्रमित पशु पूरे गांव या क्षेत्र के पशुओं के लिए खतरा बन सकता है। उन्होंने पशुपालकों से अपील करते हुए कहा कि सभी पात्र पशुओं का समय पर टीकाकरण अवश्य कराएं। हालांकि आठ माह से अधिक अवधि के गाभिन पशुओं, चार माह से कम आयु के बछड़ों तथा बीमार पशुओं का टीकाकरण नहीं कराया जाएगा। पशुशालाओं की नियमित साफ-सफाई करें, कीटाणुनाशक दवाओं का प्रयोग करें, बीमार पशु को स्वस्थ पशुओं से अलग रखें, बाहरी पशुओं को सीधे अपने पशुओं के साथ न रखें तथा स्वच्छ चारा एवं पानी उपलब्ध कराएं। उन्होंने बताया कि टीकाकरण के लगभग 21 दिन बाद पशु में रोग प्रतिरोधक क्षमता विकसित होती है, इसलिए समय पर टीकाकरण कराना आवश्यक है। रोग फैलने के बाद टीकाकरण का तत्काल लाभ नहीं मिलता। उन्होंने कहा कि यदि किसी पशु में खुरपका-मुंहपका के लक्षण दिखाई दें तो तत्काल निकटतम पशु चिकित्साधिकारी से संपर्क करें तथा बिना चिकित्सकीय सलाह के पशु को एक स्थान से दूसरे स्थान पर न ले जाएं। डॉ. अनुराग सिंह ने बताया कि अभियान के दौरान प्रत्येक पशु के कान में ईयर टैग लगाया जाएगा, यदि पहले से टैग नहीं लगा है, तथा उसका भारत पशुधन ऐप (बीपीए) पर पंजीकरण कराया जाएगा।
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