114वें जुलूस-ए-मोहम्मदी को लेकर जमीयत उलमा की अपील,सौहार्द और अनुशासन के साथ मनाएं जश्न
- जुलूस-ए-मोहम्मदी की तैयारियां पूरी, जमीयत उलमा ने जारी की सख्त गाइडलाइंस
हिंदुस्तान न्यूज़ एक्सप्रेस कानपुर। शहर में पैगंबर-ए-इस्लाम हजरत मोहम्मद (स.अ.व.) के यौम-ए-पैदाइश के उपलक्ष्य में निकलने वाले 114वें पारंपरिक जुलूस-ए-मोहम्मदी (स.अ.व.) की तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। जमीयत उलमा शहर कानपुर के तत्वावधान में यह जुलूस पारंपरिक रूप से 12 रबीउल अव्वल को परेड (रजबी ग्राउंड) से निकाला जाएगा। इस ऐतिहासिक जुलूस को जमीयत उलमा के नेतृत्व में निकलते हुए 78 वर्ष पूरे हो चुके हैं और इस बार यह 79वां वर्ष है।जमीयत बिल्डिंग में आयोजित संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में यूपी महासचिव मौलाना अमीनुल हक अब्दुल्लाह कासमी और नगर अध्यक्ष डॉ. हलीम उल्लाह खां ने बताया कि 1913 से शुरू हुआ यह जुलूस गंगा-जमुनी तहजीब, आपसी भाईचारे और सौहार्द का प्रतीक रहा है।- राजनीतिक नारों और झंडों पर पूर्ण प्रतिबंधपदाधिकारियों ने स्पष्ट किया कि जुलूस का राजनीति से कोई सरोकार नहीं है। इसलिए किसी भी राजनीतिक दल के झंडे, बैनर, बैज, टोपी या राजनीतिक नारों के इस्तेमाल पर पूरी तरह रोक रहेगी। कोई भी ऐसा नारा या गीत न बजाया जाए, जिससे किसी की भावनाओं को ठेस पहुंचे। इसके अलावा, एक-दो दिन बाद हिंदू भाइयों के त्योहार को देखते हुए सभी से आपसी प्रेम, संयम और एक-दूसरे के त्योहार का सम्मान करने की पुरजोर अपील की गई।व्यवस्था और सुरक्षा के लिए दिशा-निर्देश जारीट्रैफिक व सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए आयोजकों ने प्रतिभागियों और अंजुमनों के लिए दिशा-निर्देश जारी किए हैं:टोकन व्यवस्था: सभी अंजुमनें सुबह फज्र की नमाज के बाद परेड ग्राउंड पहुंचकर टोकन लें और अपने तय नंबर पर ही शामिल हों।झंडे और लाउडस्पीकर: बिजली के तारों से सुरक्षा के लिए झंडे की ऊंचाई 11 फीट से अधिक न रखें। लाउडस्पीकर की संख्या अधिकतम दो रखें और आवाज संतुलित रहे।तबर्रुक व वाहन सुरक्षा: तबर्रुक (प्रसाद) फेंककर न बांटें, बल्कि हाथों में दें। रास्तों की स्थिति देखते हुए लोडर वाहनों पर पटरा बिछाकर न बैठें और लोडर का अनावश्यक उपयोग न करें।