एमएसएमई विकास पर एक दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला आयोजित
*निर्यात, GeM, ई-कॉमर्स, गुणवत्ता, पैकेजिंग एवं वित्तीय सुविधाओं पर विशेषज्ञों ने दी जानकारी
हिंदुस्तान न्यूज़ एक्सप्रेस कानपुर नगर।सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय, भारत सरकार के अंतर्गत एमएसएमई-विकास कार्यालय, कानपुर द्वारा उद्योग एवं उद्यम प्रोत्साहन निदेशालय, उत्तर प्रदेश के संयुक्त तत्वावधान तथा विभिन्न औद्योगिक संगठनों के सहयोग से बुधवार को क्षेत्रीय उद्योग कार्यालय सभागार, एचबीटीयू कैम्पस, नवाबगंज, कानपुर में एमएसएमई विकास पर आधारित एक दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन किया गया।
कार्यशाला का उद्देश्य सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों को व्यवसाय एवं उद्योग से संबंधित नवीन अवसरों, सरकारी योजनाओं एवं नीतियों, बाजार उपलब्धता, निर्यात, गुणवत्ता, प्रौद्योगिकी तथा वित्तीय सुविधाओं की जानकारी उपलब्ध कराते हुए उन्हें अधिक प्रतिस्पर्धी बनाना था।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में आलोक द्विवेदी, संयुक्त विदेश व्यापार महानिदेशक, कानपुर तथा विशिष्ट अतिथियों के रूप में , सुनील कुमार, संयुक्त आयुक्त उद्योग, कानपुर मंडल, कृष्ण मुरारी, उप मुख्य कार्यकारी अधिकारी, GeM इंडिया सहित विभिन्न औद्योगिक संगठनों के पदाधिकारी उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का शुभारंभ विष्णु कुमार वर्मा, आईईडीएस, निदेशक, एमएसएमई-विकास कार्यालय, कानपुर के स्वागत संबोधन से हुआ। उन्होंने कहा कि एमएसएमई क्षेत्र देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। भारत सरकार एवं एमएसएमई-विकास कार्यालय का निरंतर प्रयास है कि स्थानीय उद्यमियों को हर संभव नीतिगत, वित्तीय एवं तकनीकी सहायता उपलब्ध कराई जाए। उन्होंने कहा कि कार्यशाला के माध्यम से उद्यमियों को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने तथा सरकारी योजनाओं और आधुनिक बाजार के अवसरों से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने क्षेत्र के उद्यमियों एवं युवा नवाचारकर्ताओं से भारत सरकार तथा राज्य सरकार द्वारा एमएसएमई के लिए उपलब्ध कराई जा रही सुविधाओं का अधिक से अधिक लाभ उठाने का आह्वान किया।
मुख्य अतिथि आलोक द्विवेदी, संयुक्त विदेश व्यापार महानिदेशक, कानपुर ने कहा कि उत्तर प्रदेश से होने वाले वैश्विक निर्यात में लगातार वृद्धि हो रही है। प्रदेश के पारंपरिक हस्तशिल्प, टेक्सटाइल, लेदर, एग्रो उत्पाद एवं एमएसएमई उत्पादों ने अंतरराष्ट्रीय बाजार में अपनी विशिष्ट पहचान बनाई है। उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश ने पहली बार 2.01 लाख करोड़ रुपये के निर्यात का आंकड़ा पार किया है। देश के कुल मर्चेंडाइज निर्यात में प्रदेश की हिस्सेदारी 5.2 प्रतिशत तक पहुंच गई है, जिससे उत्तर प्रदेश देश का पांचवां सबसे बड़ा निर्यातक राज्य बन गया है।
सुनील कुमार, संयुक्त आयुक्त उद्योग, कानपुर मंडल ने कहा कि कानपुर मंडल ऐतिहासिक रूप से प्रदेश का प्रमुख औद्योगिक क्षेत्र रहा है। लेदर, टेक्सटाइल, प्लास्टिक, इंजीनियरिंग उत्पाद तथा रक्षा उत्पादन के क्षेत्र में यहां विकास की व्यापक संभावनाएं हैं। उन्होंने कहा कि सरकार की नीतियों और सुविधाओं के परिणामस्वरूप प्रदेश का निर्यात निरंतर बढ़ रहा है।
प्रियंवदा अग्रवाल ,जेम कंसल्टेंट, GeM इंडिया ने सरकारी खरीद में उत्तर प्रदेश की बढ़ती भागीदारी तथा एमएसएमई विक्रेताओं के लिए उपलब्ध अवसरों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश GeM पोर्टल के माध्यम से सरकारी खरीद करने वाले राज्यों में देशभर में अग्रणी बना हुआ है। प्रदेश के विभागों एवं निकायों द्वारा GeM के माध्यम से 55,000 करोड़ रुपये से अधिक की खरीद की जा चुकी है। GeM के माध्यम से होने वाली कुल खरीद में 50 प्रतिशत से अधिक हिस्सेदारी एमएसएमई क्षेत्र की है।
कार्यशाला के प्रथम तकनीकी सत्र में एमएसएमई इकाइयों के लिए आयात-निर्यात तथा अंतरराष्ट्रीय बाजार की संभावनाओं पर विस्तार से चर्चा की गई। एस.के. निराला, एफटीडीओ, डीजीएफटी, कानपुर ने आयात-निर्यात नीति के महत्वपूर्ण पहलुओं की जानकारी देते हुए उद्यमियों को वैश्विक बाजार में अपने उत्पाद एवं सेवाएं पहुंचाने के लिए प्रोत्साहित किया। आलोक श्रीवास्तव, यूपी हेड, FIEO, कानपुर ने व्यापार संवर्धन संगठनों की भूमिका पर प्रकाश डाला। ए.के. सोनी, क्षेत्रीय प्रमुख, एक्जिम बैंक, लखनऊ ने निर्यात के लिए उपलब्ध वित्तीय सुविधाओं की जानकारी दी। शाहिद अहमद, शाखा प्रबंधक, ECGC, कानपुर ने निर्यात बीमा कवरेज के महत्व की जानकारी देते हुए उद्यमियों को विदेशी खरीदारों से जुड़े जोखिमों को कम करने के लिए ECGC की सुविधाओं का लाभ उठाने की सलाह दी। गौरव कुमार मौर्य, सहायक आयुक्त, उत्तर प्रदेश निर्यात प्रोत्साहन ब्यूरो, लखनऊ ने उत्तर प्रदेश निर्यात नीति के संबंध में जानकारी प्रदान की।
दूसरे तकनीकी सत्र में सरकारी खरीद प्रक्रिया के अंतर्गत GeM के माध्यम से एमएसएमई के लिए उपलब्ध बाजार अवसरों पर चर्चा की गई। प्रियंवदा अग्रवाल, GeM कंसल्टेंट, GeM सेल, उत्तर प्रदेश ने GeM पंजीकरण एवं सरकारी खरीद प्रक्रिया की जानकारी देते हुए उन महत्वपूर्ण बिंदुओं के बारे में बताया, जिनका ध्यान रखकर उद्यमी अधिक से अधिक सरकारी ऑर्डर प्राप्त कर सकते हैं।
वॉलमार्ट वृद्धि, यूपी जोन की जोनल मोबिलाइजेशन मैनेजर अंशुल गुप्ता ने डिजिटल मार्केटिंग एवं ई-कॉमर्स के माध्यम से एमएसएमई उत्पादों की बाजार पहुंच बढ़ाने के संबंध में जानकारी दी।
उत्पादों एवं सेवाओं की बेहतर पैकेजिंग, गुणवत्ता तथा मानकों के महत्व पर भी विशेषज्ञों ने जानकारी दी। डॉ. अंशुमान श्रीवास्तव, प्रोफेसर, इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ पैकेजिंग, लखनऊ ने आधुनिक पैकेजिंग पद्धतियों की जानकारी देते हुए कहा कि उत्पाद की आकर्षक एवं प्रभावी पैकेजिंग बाजार में उसकी स्वीकार्यता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। प्रीति गंगवार, उप निदेशक, नेशनल प्रोडक्टिविटी काउंसिल, कानपुर ने एमएसएमई में उत्पादकता के महत्व पर चर्चा करते हुए एमएसएमई लीन योजना, वाटर ऑडिट एवं एनर्जी ऑडिट के लाभों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इन उपायों को अपनाकर उद्यमी अपनी उत्पादन क्षमता एवं दक्षता में सुधार कर सकते हैं और इसके लिए सरकार द्वारा वित्तीय सहायता भी उपलब्ध कराई जा रही है।
आशुतोष राय, उप निदेशक, भारतीय मानक ब्यूरो (BIS), लखनऊ ने उत्पादों की गुणवत्ता एवं मानकों के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि वैश्विक बाजार में प्रवेश के लिए उत्पादों की गुणवत्ता सुनिश्चित करना अत्यंत आवश्यक है।
कार्यशाला में उत्तर प्रदेश सरकार की उद्योग नीति, एमएसएमई पॉलिसी-2022 एवं लेदर पॉलिसी सहित विभिन्न नीतियों पर भी चर्चा हुई। सुनील कुमार, संयुक्त आयुक्त, उद्योग विभाग, उत्तर प्रदेश सरकार ने इन नीतियों के अंतर्गत उद्यमियों के लिए उपलब्ध अवसरों एवं सुविधाओं की जानकारी दी।
बौद्धिक संपदा अधिकारों के अंतर्गत ट्रेडमार्क, पेटेंट एवं डिजाइन के महत्व पर नवदीप श्रीधर, ट्रेडमार्क एवं पेटेंट अटॉर्नी ने विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने उद्यमियों को अपने उत्पादों, ब्रांड एवं नवाचारों को बौद्धिक संपदा अधिकारों के माध्यम से सुरक्षित रखने के लिए जागरूक किया।
वित्तीय सहायता से संबंधित तकनीकी सत्र में उद्योगों के लिए बेहतर वित्तीय सुविधाओं एवं कार्यशील पूंजी की उपलब्धता पर चर्चा की गई। जे.के. गुप्ता, महाप्रबंधक, SIDBI, लखनऊ ने एमएसएमई के लिए उपलब्ध विभिन्न औद्योगिक एवं वित्तीय सहायता सुविधाओं की जानकारी दी।
ट्रेड रिसीवेबल्स डिस्काउंटिंग सिस्टम (TReDS) के माध्यम से बड़े उपक्रमों को आपूर्ति के बाद बिल डिस्काउंटिंग द्वारा शीघ्र भुगतान प्राप्त करने तथा एमएसएमई इकाइयों के लिए तरल पूंजी की व्यवस्था के संबंध में भी जानकारी दी गई। संकल्प त्रिपाठी, बिजनेस डेवलपमेंट मैनेजर, RXIL-TReDS, नई दिल्ली तथा अरूर्वे गैरोला, TReDS ने प्रतिभागियों को TReDS प्लेटफॉर्म की कार्यप्रणाली एवं व्यापार वित्तपोषण में इसके महत्व से अवगत कराया।
आदित्य चन्द्र, लीड डिस्ट्रिक्ट मैनेजर, बैंक ऑफ बड़ौदा, कानपुर नगर ने बैंकिंग से संबंधित विभिन्न विषयों एवं एमएसएमई उद्यमियों के लिए उपलब्ध बैंकिंग सुविधाओं की जानकारी दी।
कार्यशाला के माध्यम से एमएसएमई उद्यमियों को अंतरराष्ट्रीय एवं घरेलू बाजारों की संभावनाओं, सरकारी खरीद, ई-कॉमर्स, डिजिटल मार्केटिंग, पैकेजिंग, गुणवत्ता एवं मानकों, राज्य सरकार की नीतियों, बौद्धिक संपदा अधिकारों तथा वित्तीय सहायता के विभिन्न अवसरों की विस्तृत जानकारी प्राप्त हुई। कार्यक्रम के दौरान विषय विशेषज्ञों एवं संबंधित विभागों के प्रतिनिधियों ने प्रतिभागियों की जिज्ञासाओं एवं समस्याओं का समाधान भी किया।
कार्यशाला ने उद्यमियों, औद्योगिक संगठनों, सरकारी विभागों एवं वित्तीय संस्थानों को संवाद और सहयोग के लिए साझा मंच उपलब्ध कराया। कार्यक्रम का समन्वय अमित बाजपेयी, सहायक निदेशक, एमएसएमई-विकास कार्यालय, कानपुर द्वारा किया गया। कार्यशाला में 200 से अधिक एमएसएमई इकाइयों एवं विभिन्न सरकारी विभागों के प्रतिनिधियों ने प्रतिभाग किया।