आनंद यात्रा सेवा समिति ने भक्ति मय धार्मिक अंताक्षरी करवाई
-क्रोध को छोड़ कर क्षमा धर्म को अपनाओं
- पुरोहित राकेश
हिंदुस्तान न्यूज़ एक्सप्रेस कानपुर | आनंदपुरी जैन मंदिर में प्रातः काल से ही भक्तों का आना प्रारंभ हुआ अभिषेक क्रिया के पश्चात भगवान की शांति धारा का सौभाग्य अनुज सीमा जैन परिवार ओर अंजुल जैन को मिला तत्पश्चात आगरा से पधारे पंडित राकेश ने संगीत मय पूजन करवाई एवं जैन महान ग्रन्थ तत्त्वार्थ सूत्र का वाचन अर्थ सहित समझाया । सायंकालीन भव्य संगीत के साथ आरती हुई उसके बाद आनंद यात्रा सेवा समिति ने भक्ति मय धार्मिक अन्ताक्षरी करवाईपंडित ने उतम क्षमा पर प्रवचन करते हुए कहा आत्मा की स्वाभाविक परिणति का नाम क्षमा है। अपनी आत्मा के स्वभाव में स्थिर हो जाने का नाम क्षमा है। कदाचित में क्रोध के अभाव को क्षमा कहते हैं। प्रतिकूल समाज मिलने पर विकृत परिणति का नहीं होना, खेद खिन्नता नहीं होना। क्षमा कहलाती है।क्षमा धर्म का मानव जीवन में वही स्थान है जो इस जीव के लिये आत्मा का। जिस प्रकार बिना आत्मा के इस मानव देह का कोई मूल्य नहीं उसी प्रकार क्षमा के बिना आत्मा का भी कोई मूल्य नहीं। क्षमा आत्मा का स्वभाव है। यह धर्म में प्रवेश करने का प्रथम द्वार है। धर्म में प्रवेश करने की प्रथम शर्त है क्रोध का त्याग। क्रोध क्षमा धर्म का विरोधी है। क्रोध रूपी विभाव हमारे हृदय में बैठा हुआ है। उस हटाओ और उसकी जगह क्षमा को प्रतिष्ठित करो। क्षमा कहीं गई नहीं और क्षमा कहीं से आनी नहीं। वह तो हमारी आत्मा में ही विद्यमान है। अतः क्रोध को छोड़कर क्षमा धर्म को अपनाओ। क्रोध ही समस्त अनर्थों की जड़ है। संसार में क्रोध के समान कोई पाप नहीं है और क्षमा के समान कोई धर्म नहीं है।