निर्माण एवं सृजन के देवता भगवान विश्वकर्मा की पूजा-अर्चना कर लिया आशीर्वाद
- मेट्रो डिपो और निर्माण स्थलों पर पूजा का आयोजन; शहर को विश्वस्तरीय परिवहन व्यवस्था समर्पित करने का लिया संकल्प
हिंदुस्तान न्यूज़ एक्सप्रेस कानपुर। मेट्रो के अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने गुरुवार को गुरुदेव चौराहा स्थित मेट्रो डिपो तथा नौबस्ता कास्टिंग यार्ड सहित विभिन्न निर्माण स्थलों पर भगवान विश्वकर्मा की पूजा-अर्चना की। इस अवसर पर मेट्रो के इंजीनियरों एवं स्टाफ ने सृजन और निर्माण के देवता विश्वकर्मा का आशीर्वाद प्राप्त करते हुए शहर एवं प्रदेश में संचालित विभिन्न मेट्रो परियोजनाओं की सफलता की प्रार्थना की।कानपुर मेट्रो ने कॉरिडोर-1 के प्रायोरिटी सेक्शन (आईआईटी–मोतीझील) पर सिविल निर्माण कार्य शुरू होने के मात्र 2 वर्ष 1.5 माह के रिकॉर्ड समय में यात्री सेवाएं प्रारंभ कर राष्ट्रीय कीर्तिमान स्थापित किया था। कॉरिडोर-1 के अंतर्गत यात्री सेवाओं का विस्तार मोतीझील से कानपुर सेंट्रल तक किया गया, जिससे पहली बार पांच नए अंडरग्राउंड स्टेशन मेट्रो नेटवर्क से जुड़े। प्री-कास्ट अवसंरचनाओं को स्थापित करने का कार्य भी अंतिम चरण में पहुंच रहा है। कॉरिडोर-2 के डिपो रैंप से डबल पुलिया रैंप तक लगभग 4.10 किलोमीटर लंबे अंडरग्राउंड सेक्शन में ट्रैक निर्माण एवं सिस्टम इंस्टॉलेशन का कार्य तेजी से आगे बढ़ रहा है। विश्वकर्मा पूजा के पावन अवसर पर अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने कानपुर मेट्रो की सभी निर्माण योजनाओं के सफलतापूर्वक एवं समयबद्ध पूर्ण होने की मंगलकामना की। इस अवसर पर उत्तर प्रदेश मेट्रो रेल कॉरपोरेशन लिमिटेड (यूपीएमआरसी) के प्रबंध निदेशक सुशील कुमार ने कहा, "उत्तर प्रदेश मेट्रो की टीम शहरवासियों को अत्याधुनिक सुविधाओं और प्रौद्योगिकी से लैस विश्वस्तरीय मास रैपिड ट्रांजिट सिस्टम उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। कानपुर मेट्रो ने देश के अंदर मेट्रो निर्माण में पहली बार डबल टी-गर्डर का प्रयोग किया है। 10 अप्रैल 2026 को कानपुर मेट्रो को ‘बेस्ट कंस्ट्रक्शन प्रोजेक्ट’ श्रेणी में सीआईडीसी विश्वकर्मा पुरस्कार, जुलाई 2026 में बारादेवी–नौबस्ता के पांच एलिवेटेड स्टेशनों को आईजीबीसी की सर्वोच्च ‘प्लैटिनम रेटिंग’ तथा दिसंबर 2025 में आईआईटी कानपुर मेट्रो स्टेशन को ऊर्जा संरक्षण के क्षेत्र में ‘सर्टिफिकेट ऑफ मेरिट’ से सम्मानित किया गया। कानपुर मेट्रो के दोनों कॉरिडोर के पूर्ण होने से ट्रैफिक की समस्या और कार्बन फुटप्रिंट को कम करने में मदद मिलेगी तथा शहर की अर्थव्यवस्था को नई गति और ऊर्जा मिलेगी।