सैफई में यू.पी.ओ.ए. मिड टर्म सिम्पोजियम-2026 का सफल आयोजन
*उत्तर प्रदेश आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय, सैफई में शीघ्र स्थापित होगा बोन बैंक एवं टिश्यू बैंक : कुलपति प्रो. (डॉ.) अजय सिंह*
हिंदुस्तान न्यूज़ एक्सप्रेस सैफई।उत्तर प्रदेश आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय, सैफई में उत्तर प्रदेश ऑर्थोपेडिक एसोसिएशन (UPOA) मिड टर्म सिम्पोजियम-2026 का सफल आयोजन आर्थ्रोप्लास्टी की थीम पर किया गया। इस राष्ट्रीय स्तर के शैक्षणिक आयोजन में उत्तर प्रदेश सहित देश के विभिन्न प्रतिष्ठित चिकित्सा संस्थानों से 200 से अधिक हड्डी रोग विशेषज्ञों एवं चिकित्सकों ने प्रतिभाग किया। सम्मेलन के दौरान आधुनिक आर्थ्रोप्लास्टी, रोबोटिक जोड़ प्रत्यारोपण, प्राथमिक एवं जटिल रिवीजन ज्वाइंट रिप्लेसमेंट तथा साक्ष्य-आधारित उपचार पद्धतियों पर विशेषज्ञों द्वारा व्यापक चर्चा की गई।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि माननीय कुलपति प्रो. (डॉ.) अजय सिंह ने रोबोटिक जोड़ प्रत्यारोपण के संबंध में कहा कि रोबोटिक एवं पारंपरिक दोनों प्रकार की जोड़ प्रत्यारोपण तकनीकों को गहराई से समझना आवश्यक है। किसी भी नई तकनीक को अपनाने से पूर्व उसके लाभ, सीमाओं, लागत तथा उपचार परिणामों का वैज्ञानिक एवं व्यावहारिक मूल्यांकन किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि केवल रोबोटिक तकनीक का उपयोग किए जाने मात्र से बेहतर परिणाम सुनिश्चित नहीं होते। यदि किसी तकनीक का उचित मूल्यांकन किए बिना उसका उपयोग किया जाता है और इससे शल्य चिकित्सा की लागत बढ़ती है, तो इसका प्रत्यक्ष आर्थिक प्रभाव मरीज पर पड़ सकता है। इसलिए तकनीक का चयन मरीज के हित, वैज्ञानिक प्रमाण, नैदानिक आवश्यकता तथा उपचार की प्रभावशीलता को ध्यान में रखते हुए किया जाना चाहिए।
शीघ्र स्थापित होगा बोन बैंक एवं टिश्यू बैंक
कुलपति प्रो. (डॉ.) अजय सिंह ने सम्मेलन के दौरान उत्तर प्रदेश आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय, सैफई में शीघ्र ही बोन बैंक एवं टिश्यू बैंक की सुविधा विकसित किए जाने की घोषणा की। उन्होंने विभागाध्यक्ष, हड्डी रोग विभाग को इस दिशा में आवश्यक औपचारिकताएं एवं प्रक्रिया प्रारंभ करने के निर्देश दिए तथा विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से इस महत्वपूर्ण पहल के लिए हर संभव सहयोग उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया।
उन्होंने कहा कि बोन बैंक एवं टिश्यू बैंक जैसी उन्नत सुविधाएं जटिल हड्डी रोग, पुनर्निर्माणात्मक शल्य चिकित्सा तथा अन्य जटिल उपचार प्रक्रियाओं में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। विश्वविद्यालय में इन सुविधाओं के विकसित होने से आसपास के क्षेत्रों सहित दूरदराज के मरीजों को भी लाभ मिलेगा। यह पहल सैफई को उन्नत हड्डी रोग उपचार, कैंसर चिकित्सा, पुनर्निर्माणात्मक चिकित्सा एवं चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होगी।
वरिष्ठ विशेषज्ञों ने साझा किया अनुभव
कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि एवं पूर्व विभागाध्यक्ष, हड्डी रोग विभाग, एम्स नई दिल्ली तथा वरिष्ठ आर्थ्रोप्लास्टी विशेषज्ञ प्रो. (डॉ.) राजेश मल्होत्रा ने रोबोटिक कुल्हा एवं घुटना प्रत्यारोपण पर व्याख्यान दिया तथा शल्य चिकित्सा का पुनः प्रसारण (Live/Recorded Surgical Demonstration) प्रस्तुत किया। उन्होंने अपने दीर्घ अनुभव, शल्य चिकित्सा तकनीकों, व्यावहारिक बारीकियों एवं महत्वपूर्ण क्लिनिकल पहलुओं को युवा एवं वरिष्ठ हड्डी रोग सर्जनों के साथ साझा किया। उनकी प्रस्तुति के माध्यम से प्रतिभागियों को जटिल रोबोटिक कुल्हा एवं घुटना प्रत्यारोपण प्रक्रियाओं को व्यावहारिक दृष्टिकोण से समझने का महत्वपूर्ण अवसर प्राप्त हुआ।
यू.पी.ओ.ए. अध्यक्ष डॉ. संतोष सिंह ने कहा कि उत्तर प्रदेश ऑर्थोपेडिक एसोसिएशन का प्रमुख उद्देश्य प्रदेश के हड्डी रोग सर्जनों को निरंतर प्रशिक्षण प्रदान करना तथा उन्हें आधुनिक एवं नवीनतम चिकित्सा तकनीकों से परिचित कराना है, जिससे वे अपने ज्ञान एवं शल्य चिकित्सा कौशल को निरंतर बेहतर कर मरीजों को गुणवत्तापूर्ण उपचार उपलब्ध करा सकें।
यू.पी.ओ.ए. सचिव डॉ. अमित जायसवाल ने उद्घाटन सत्र के दौरान एसोसिएशन की पिछले छह महीनों की गतिविधियों एवं उपलब्धियों का रिपोर्ट कार्ड प्रस्तुत किया। उन्होंने चिकित्सा शिक्षा, विशेषज्ञ प्रशिक्षण एवं हड्डी रोग सर्जनों के लिए आयोजित विभिन्न शैक्षणिक गतिविधियों की जानकारी साझा की।
चिकित्सा शिक्षा एवं विशेषज्ञ प्रशिक्षण को मिलेगा बढ़ावा
कार्यक्रम के आयोजन अध्यक्ष एवं विभागाध्यक्ष, हड्डी रोग विभाग, प्रो. (डॉ.) सुनील कुमार ने देश एवं प्रदेश के विभिन्न हिस्सों से आए वरिष्ठ विशेषज्ञों, संकाय सदस्यों एवं प्रतिभागियों का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि माननीय कुलपति प्रो. (डॉ.) अजय सिंह के दूरदर्शी नेतृत्व एवं मार्गदर्शन में उत्तर प्रदेश आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय, सैफई में चिकित्सा शिक्षा, विशेषज्ञ प्रशिक्षण, अनुसंधान एवं उन्नत उपचार सेवाओं को निरंतर सुदृढ़ किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के राष्ट्रीय स्तर के शैक्षणिक आयोजनों से चिकित्सकों एवं स्नातकोत्तर विद्यार्थियों को देश के वरिष्ठ विशेषज्ञों से प्रत्यक्ष रूप से सीखने तथा नवीनतम चिकित्सा तकनीकों एवं उपचार पद्धतियों से परिचित होने का अवसर मिलता है।
आयोजन समिति के सचिव डॉ. हरीश कुमार ने बताया कि सम्मेलन के दौरान आधुनिक आर्थ्रोप्लास्टी तकनीकों, रोबोटिक शल्य चिकित्सा, प्राथमिक एवं जटिल रिवीजन ज्वाइंट रिप्लेसमेंट, साक्ष्य-आधारित उपचार तथा कौशल-आधारित शल्य चिकित्सा प्रशिक्षण पर विशेष जोर दिया गया। उन्होंने बताया कि देश एवं प्रदेश के विभिन्न संस्थानों से आए 60 से अधिक विशेषज्ञों ने अपने अनुभव साझा किए तथा जटिल क्लिनिकल परिस्थितियों एवं नवीनतम उपचार तकनीकों पर विस्तृत चर्चा की।
कार्यक्रम में प्रमुख रूप से डॉ. ए.एस. प्रसाद (कानपुर), डॉ. अश्वनी मैचंद (दिल्ली), डॉ. अरुण शर्मा (जयपुर), डॉ. उत्तम गर्ग (लखनऊ), डॉ. आशीष कुमार (लखनऊ), डॉ. के.डी. त्रिपाठी (प्रयागराज), डॉ. अनूप खरे (आगरा) एवं डॉ. अरुण गुप्ता (आगरा) सहित अनेक वरिष्ठ विशेषज्ञों ने सहभागिता की।
कार्यक्रम का संचालन डॉ. अंकित मित्तल द्वारा कुशलतापूर्वक किया गया। आयोजन को सफल बनाने में एस.ओ.ए. एवं आयोजन समिति के संरक्षक डॉ. डी.के. दुबे, अध्यक्ष डॉ. आर.एस. यादव, सचिव डॉ. अजय राजपूत, डॉ. एस.एस.एस. परिहार, डॉ. एम.एस. पाल, डॉ. प्रदीप गुप्ता, डॉ. शिवम् अग्रवाल, डॉ. संजय अग्रवाल एवं डॉ. जसवीर सिंह सहित एस.ओ.ए. के सदस्यों, हड्डी रोग विभाग के संकाय सदस्यों एवं रेजिडेंट चिकित्सकों का महत्वपूर्ण योगदान रहा।
सम्मेलन के समापन अवसर पर आयोजन समिति के सचिव डॉ. हरीश कुमार ने सभी अतिथियों, विशेषज्ञों, प्रतिभागियों, संकाय सदस्यों एवं आयोजन से जुड़े सभी सहयोगियों के प्रति आभार व्यक्त किया।