आधुनिक तकनीक से सटीक जांच, अनावश्यक सर्जरी से बचेंगे मरीज
- प्रोस्टेट कैंसर और बीपीएच का अंतर बताएगी नई पैथोलॉजिकल तकनीक
- कानपुर का शोध अंतरराष्ट्रीय जर्नल में हुआ प्रकाशित
- पी63 बायोमार्कर से होगी प्रोस्टेट कैंसर की अचूकपहचान, मरीजों को मिलेगा सही और समय पर इलाज
हिंदुस्तान न्यूज़ एक्सप्रेस कानपुर। जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज और एलएलआर चिकित्सालय के पैथोलॉजी विभाग ने प्रोस्टेट कैंसर के सटीक और त्वरित निदान की दिशा में एक बड़ी सफलता हासिल की है। कॉलेज के प्राचार्य प्रो. (डॉ.) संजय काला के मार्गदर्शन में शोधकर्ताओं ने आधुनिक बायोमार्कर तकनीक का सफल मूल्यांकन किया है। इस अध्ययन के निष्कर्षों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता मिलते हुए प्रतिष्ठित “इंटरनेशनल जर्नल ऑफ एकेडमिक मेडिसिन एंड फार्मेसी” (जेएएमपी) में प्रकाशित किया गया है। यह महत्वपूर्ण शोध मुख्य शोधकर्ता डॉ. अनिरुद्ध जैन, डॉ. नीलिमा वर्मा और विभागाध्यक्ष डॉ. लुबना खान की देखरेख में पूरा किया गया।शोधकर्ताओं ने बताया कि बढ़ती उम्र के साथ पुरुषों में प्रोस्टेट ग्रंथि से जुड़ी समस्याएं आम हो जाती हैं। हालांकि, शुरुआती स्टेज के प्रोस्टेट कैंसर और सामान्य प्रोस्टेट वृद्धि (बीपीएच) के लक्षणों में काफी समानता होती है। बायोप्सी के छोटे सैंपलों में इन दोनों के बीच फर्क स्पष्ट कर पाना डॉक्टरों के लिए बेहद चुनौतीपूर्ण काम रहा है। हांलकि इस समस्या के समाधान के लिए जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज में 91 प्रोस्टेट बायोप्सी सैंपलों का गहन अध्ययन किया गया। इसमें पी63 और एचएमडब्लूसीके जैसे आधुनिक इम्यूनोहिस्टोकेमिस्ट्री (आईएचसी) बायोमार्कर्स का मूल्यांकन किया गया।मरीजों को सीधा लाभ, बेवजह सर्जरी, न इलाज में देरीशोधकर्ताओं के अनुसार, इस आधुनिक पैथोलॉजिकल डायग्नोसिस से मरीजों को दोहरे स्तर पर राहत मिलेगी। सामान्य वृद्धि (बीपीएच) के जिन मरीजों को कैंसर नहीं है, वे अनावश्यक जटिल और जोखिम भरे ऑपरेशनों से बच सकेंगे। गंभीर कैंसर पीड़ित मरीजों में बीमारी की पहचान शुरुआती चरण में ही हो जाएगी, जिससे उन्हें बिना समय गंवाए तत्काल जीवनरक्षक इलाज मिल सकेगा। पैथोलॉजी विभाग का यह शोध सीधे तौर पर आम जनता के स्वास्थ्य सुधार और चिकित्सा क्षेत्र में कैंसर डायग्नोसिस को अधिक सुलभ और सटीक बनाने में मील का पत्थर साबित होगा।शोध के मुख्य निष्कर्ष95 फीसदी सक्रियता पी 63 बायोमार्कर ने कैंसर कोशिकाओं को पहचानने में 95 फीसदी सक्रियता दर्शाई। 90.11 फीसदी विश्वसनीयता सीमित और छोटे बायोप्सी सैंपलों में भी यह मार्कर 90.11 फीसदी उपलब्धता और सटीकता के साथ परिणाम देने में सक्षम पाया गया।