डिजिटल युग में स्वस्थ मन और मानवीय जुड़ाव पर राष्ट्रीय सम्मेलन में हुआ मंथन
-‘Digital Minds, Healthy Lives’ थीम पर विशेषज्ञों ने मानसिक स्वास्थ्य, डिजिटल संतुलन और नई पीढ़ी की चुनौतियों पर साझा किए विचार
हिंदुस्तान न्यूज़ एक्सप्रेस।सैफई, इटावा, 8 अक्टूबर 2026। डिजिटल तकनीक आज मानव जीवन का अभिन्न हिस्सा बन चुकी है। शिक्षा, स्वास्थ्य, संचार एवं कार्यक्षेत्र से लेकर सामाजिक संबंधों तक इसके व्यापक प्रभाव देखने को मिल रहे हैं। ऐसे में डिजिटल तकनीक के साथ संतुलित एवं स्वस्थ संबंध विकसित करना मानसिक स्वास्थ्य और समग्र कल्याण के लिए महत्वपूर्ण आवश्यकता बन गया है।
इसी समकालीन चुनौती को केंद्र में रखते हुए उत्तर प्रदेश आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय (UPUMS), सैफई के फैकल्टी ऑफ नर्सिंग के मानसिक स्वास्थ्य नर्सिंग विभाग द्वारा “Digital Minds, Healthy Lives: Building Resilience, Balance, and Human Connection in the Digital Era” विषय पर राष्ट्रीय सम्मेलन-2026 का आयोजन विश्वविद्यालय ऑडिटोरियम में किया गया। सम्मेलन का उद्घाटन माननीय कुलपति प्रो. (डॉ.) अजय सिंह द्वारा किया गया।
इस अवसर पर कुलपति प्रो. (डॉ.) अजय सिंह ने कहा कि डिजिटल तकनीक ने जीवन को सुविधाजनक, तेज और प्रभावी बनाया है, लेकिन इसके अत्यधिक एवं असंतुलित उपयोग से मानसिक स्वास्थ्य के समक्ष नई चुनौतियां भी उत्पन्न हो रही हैं। उन्होंने कहा कि डिजिटल सुविधा और डिजिटल निर्भरता के बीच संतुलन स्थापित करना आज समय की आवश्यकता है। डिजिटल तकनीक के उपयोग को केवल सुविधा और आधुनिकता के दृष्टिकोण से नहीं, बल्कि इसके मनोवैज्ञानिक, सामाजिक और व्यावसायिक प्रभावों के व्यापक परिप्रेक्ष्य में समझना आवश्यक है।
संकायाध्यक्ष प्रो. बिजी बीजू ने कहा कि डिजिटल दुनिया में निरंतर जुड़े रहने के बावजूद व्यक्ति मानसिक रूप से स्वस्थ, भावनात्मक रूप से संतुलित और सामाजिक रूप से संवेदनशील कैसे बना रहे, यही इस राष्ट्रीय सम्मेलन का प्रमुख उद्देश्य है। उन्होंने कहा कि डिजिटल युग में मानसिक स्वास्थ्य को मजबूत बनाने के लिए जागरूकता, आत्म-अनुशासन और मानवीय जुड़ाव को समान महत्व देना आवश्यक है।
Gen-Z Mindset से Digital Detox तक समकालीन विषयों पर चर्चा
राष्ट्रीय सम्मेलन के दौरान Gen-Z Mindset, FOMO से JOMO की ओर परिवर्तन, Digital Parenting, Burnout से Balance, Digital Detox तथा Cognitive Restructuring जैसे समकालीन विषयों पर वैज्ञानिक एवं व्यावहारिक दृष्टिकोण से विचार-विमर्श किया गया।
सम्मेलन में विभिन्न संस्थानों से आए विशेषज्ञों ने सहभागिता करते हुए अपने अनुभव एवं विशेषज्ञता साझा की। इनमें प्रो. (डॉ.) एम.एस. विंसी, प्रिंसिपल, बॉम्बे हॉस्पिटल कॉलेज ऑफ नर्सिंग, इंदौर; डॉ. सुशील कुमार माहेश्वरी, एचओडी एवं एसोसिएट प्रोफेसर, डिपार्टमेंट ऑफ साइकियाट्रिक नर्सिंग, IHBAS; श्री दिनेश शर्मा, प्रिंसिपल, स्कूल ऑफ नर्सिंग, गीतांजलि यूनिवर्सिटी, उदयपुर; श्री अतुल शर्मा, असिस्टेंट प्रोफेसर, AIIMS बठिंडा; तथा डॉ. सुधा मिश्रा, असिस्टेंट प्रोफेसर, KGMU शामिल रहे।
विशेषज्ञों ने कहा कि वर्तमान डिजिटल परिवेश में बढ़ता स्क्रीन टाइम, सोशल मीडिया की निरंतर उपलब्धता, सूचनाओं का अत्यधिक प्रवाह तथा आभासी सामाजिक संपर्क मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित करने वाले महत्वपूर्ण कारक बन रहे हैं। सम्मेलन में Digital Well-being, Mental Resilience, Work-Life Balance और Meaningful Human Connection जैसे विषयों पर भी विशेषज्ञों ने अपने शोध, अनुभव और व्यावहारिक दृष्टिकोण साझा किए।
पैनल चर्चा में मानसिक स्वास्थ्य एवं डिजिटल संतुलन पर संवाद
सम्मेलन के दौरान आयोजित पैनल चर्चा में प्रो. डॉ. ज्योति वाला, श्री सेवियनएन, डॉ. अर्चना चौहान, डॉ. सुभाष गुप्ता, डॉ. सुशील तथा डेमोन्सट्रेटर सुश्री नीलम शाह ने सहभागिता की। डॉ. संदीप आर्या ने पैनल चर्चा में मॉडरेटर की भूमिका निभाई।
पैनल चर्चा के दौरान नर्सिंग विद्यार्थियों एवं स्वास्थ्यकर्मियों के मानसिक स्वास्थ्य, आत्म-देखभाल, डिजिटल संतुलन, तनाव प्रबंधन तथा भावनात्मक लचीलेपन से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया। विशेषज्ञों ने इस बात पर जोर दिया कि डिजिटल संसाधनों का प्रभावी उपयोग करते हुए व्यक्तिगत एवं सामाजिक जीवन में संतुलन बनाए रखना आवश्यक है।
वैज्ञानिक सत्रों के साथ शोध एवं संवाद को मिला मंच
राष्ट्रीय सम्मेलन ने मानसिक स्वास्थ्य नर्सिंग, डिजिटल वेल-बीइंग और आधुनिक जीवनशैली से जुड़ी चुनौतियों पर वैज्ञानिक संवाद, अनुभव साझा करने और शोधपरक चर्चा के लिए एक प्रभावी मंच प्रदान किया।
कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि डिजिटल तकनीक मानव जीवन को बेहतर बनाने का महत्वपूर्ण माध्यम है, लेकिन इसका वास्तविक लाभ तभी सुनिश्चित किया जा सकता है जब तकनीकी प्रगति के साथ मानसिक स्वास्थ्य, मानवीय संवेदनशीलता और वास्तविक सामाजिक जुड़ाव का संतुलन भी कायम रखा जाए।
कार्यक्रम के सफल आयोजन में प्रति-कुलपति प्रो. डॉ. आदेश कुमार, मुख्य चिकित्सा अधीक्षक प्रो. डॉ. एस.पी. सिंह तथा चिकित्सा अधीक्षक प्रो. डॉ. अमित सिंह की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
इस अवसर पर प्रॉक्टर डॉ. विजय मिश्रा, चीफ नर्सिंग ऑफिसर लवली जेम्स, नर्सिंग फैकल्टी की आयोजन समिति के सदस्य, समस्त संकाय सदस्य तथा छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।