पीएलवी द्वारा पशु क्रूरता एवं वन्यजीव संरक्षण अधिनियम की जानकारी देकर बच्चों को किया गया जागरूक
जिला संवाददाता सुनील कुमार धुरिया
हिंदुस्तान न्यूज़ एक्सप्रेस सुमेरपुर , हमीरपुर l बृहस्पतिवार को जिला विधिक सेवा प्राधिकरण हमीरपुर सचिव/सिविल जज सीनियर डिवीजन श्रीमती वन्दना अग्रवाल के कुशल निर्देशन में ठड़ेश्वरी सरस्वती विद्या मंदिर सुमेरपुर में "पशु क्रूरता एवं वन्यजीव संरक्षण कानून के संबंध में विधिक जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। पीएलवी गणेश सिंह ने बच्चों को बताया कि कोई भी पशु को जानबूझकर या लापरवाही से अनावश्यक पीड़ा, चोट या नुकसान पहुंचाना पशु क्रूरता है। जानवर को मारना, पशु क्रूरता निवारण अधिनियम 1960 की धारा 11 के तहत किसी भी मूक जानवर को अनावश्यक रूप से तड़पाना या उसके साथ क्रूर व्यवहार करना कानूनी अपराध है। पशु को पीटना, उसे भूखा-प्यासा रखना, समय पर चिकित्सा न कराना या उसकी क्षमता से ज्यादा बोझ लादना पशु क्रूरता में शामिल है। पशुओं का शारीरिक शोषण करना, उपेक्षा या लापरवाही बरतना, अतिरिक्त बोझ लादना, मनोरंजन के लिए उपयोग करना, पालतू या उपयोगी पशु को लावारिश छोड़ देना पशु क्रूरता के प्रमुख रूप हैं । वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 संरक्षित प्रजातियों के शिकार और उनके अवैध व्यापार पर पूरी तरह रोक लगाता है। वन्य जीवों के शिकार और व्यापार पर भी प्रतिबंध है। हानिकारक जीव जैसे कौवे, चूहे, चमगादड़ या नील गाय जिन्हें फसलों या मानव स्वास्थ्य का खतरा होने पर विशेष अनुमति से मारा जा सकता है। वन्य (संरक्षण अधिनियम 1980 जंगलों को कटने से बचाने के लिए वनभूमि को गैर वानिकी कार्यों के लिए उपयोग नियंत्रित करता है। इस अवसर पर अवकाश प्राप्त शिक्षक एवं कवि हरीराम गुप्ता, कवि रेवती कुमार पाठक तथा प्रधानाचार्या अनामिका जी ने भी बच्चों को महत्वपूर्ण जानकारी दी। कार्यक्रम के दौरान बच्चे एवं शिक्षक-शिक्षिकाएं उपस्थित रहीं।