पिछड़ा वर्ग आयोग के अध्यक्ष न्यायमूर्ति राम औतार सिंह की अध्यक्षता में हुई समीक्षा बैठक
-जनपद से प्राप्त जातिवार आंकड़ों के समुचित उपयोग तथा प्रतिनिधित्व से वंचित वर्गों की स्थिति का आकलन करने के दिए निर्देश
जिला संवाददाता सुनील कुमार धुरिया
हमीरपुर l उत्तर प्रदेश राज्य स्थानीय ग्रामीण निकाय समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग के अध्यक्ष न्यायमूर्ति राम औतार सिंह की अध्यक्षता में जिला पंचायत सभागार, हमीरपुर में समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में स्थानीय निकायों एवं त्रिस्तरीय पंचायतों में अन्य पिछड़ा वर्ग की सामाजिक, आर्थिक एवं राजनीतिक स्थिति, विभिन्न जातियों के प्रतिनिधित्व, आरक्षण के लाभ तथा राजनीतिक सहभागिता से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया।
बैठक में आयोग के सदस्य बृजेश कुमार सेवानिवृत्त जिला न्यायाधीश, संतोष कुमार विश्वकर्मा सेवानिवृत्त अपर जिला न्यायाधीश, डॉ. अरविन्द कुमार चौरसिया सेवानिवृत्त आईएएस तथा एस.पी. सिंह सेवानिवृत्त आईएएस उपस्थित रहे। इस अवसर पर मा. जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती जयंती राजपूत, मुख्य विकास अधिकारी अरुण कुमार सिंह, जिला पंचायत राज अधिकारी सुबोध जोशी, खंड विकास अधिकारीगण, जिला पंचायत सदस्य, ब्लॉक प्रमुख, ग्राम प्रधान, क्षेत्र पंचायत सदस्य एवं अन्य जनप्रतिनिधियों ने प्रतिभाग किया।
बैठक में अन्य पिछड़ा वर्ग के अंतर्गत आने वाली 79 जातियों के स्थानीय निकायों में राजनीतिक प्रतिनिधित्व की स्थिति का आकलन करने पर विशेष जोर दिया गया। इस संबंध में यह परीक्षण किए जाने की आवश्यकता पर चर्चा हुई कि संबंधित जातियों को आरक्षण व्यवस्था के अंतर्गत निर्धारित प्रावधानों के अनुरूप प्रतिनिधित्व का लाभ किस सीमा तक मिल रहा है
तथा किन जातियों या वर्गों का प्रतिनिधित्व अपेक्षाकृत कम है अथवा जो राजनीतिक प्रतिनिधित्व के लाभ से वंचित हैं, उनकी पहचान किस प्रकार की जाए। आयोग ने इस विषय पर उपलब्ध आंकड़ों के आधार पर तथ्यपरक अध्ययन की आवश्यकता पर बल दिया।
बैठक में आरक्षण एवं विकास योजनाओं का लाभ अपेक्षित स्तर तक नहीं पहुंच पाने के संभावित कारणों पर भी चर्चा की गई। इसके अंतर्गत सामाजिक एवं आर्थिक पिछड़ेपन, शिक्षा और जागरूकता की कमी, मादक पदार्थों के सेवन जैसी सामाजिक समस्याओं, कृषि भूमि एवं अन्य संसाधनों की सीमित उपलब्धता तथा विद्यालयों और महाविद्यालयों तक पहुंच जैसी परिस्थितियों के प्रभाव का अध्ययन किए जाने पर विचार-विमर्श हुआ। इन पहलुओं का आकलन कर पिछड़ेपन के वास्तविक कारणों को समझने और संबंधित जातियों की स्थिति का समुचित मूल्यांकन करने की आवश्यकता रेखांकित की गई।
आयोग की समीक्षा में स्थानीय निकायों में अन्य पिछड़ा वर्ग के राजनीतिक प्रतिनिधित्व से संबंधित न्यायिक दिशा-निर्देशों एवं संवैधानिक प्रावधानों के अनुरूप अध्ययन की आवश्यकता पर भी चर्चा हुई। इस क्रम में वर्ष 2010 के के. कृष्णमूर्ति मामले, वर्ष 2021 के सुरेश महाजन मामले तथा वी.के. राव गवली मामले से संबंधित न्यायिक आदेशों को इस प्रक्रिया के महत्वपूर्ण संदर्भ के रूप में रेखांकित किया गया। आरक्षण एवं राजनीतिक प्रतिनिधित्व से जुड़े विषयों का परीक्षण प्रासंगिक न्यायिक निर्देशों और लागू विधिक प्रावधानों के अनुरूप किए जाने पर जोर दिया गया।
अध्यक्ष द्वारा जिला प्रशासन को निर्देशित किया गया कि जनपद की विभिन्न जातियों के संबंध में उपलब्ध कराए गए आंकड़ों का समुचित एवं पूर्ण उपयोग सुनिश्चित किया जाए। आंकड़ों के विश्लेषण में किसी भी प्रासंगिक तथ्य की अनदेखी न हो तथा जातिवार सामाजिक, आर्थिक एवं राजनीतिक स्थिति का आकलन उपलब्ध अभिलेखों और संबंधित सूचनाओं के आधार पर किया जाए।
बैठक के दौरान उपस्थित जनप्रतिनिधियों से विभिन्न क्षेत्रों में अन्य पिछड़ा वर्ग की जातियों की संख्या, उनकी सामाजिक एवं आर्थिक पृष्ठभूमि, राजनीतिक भागीदारी तथा प्रतिनिधित्व से जुड़ी परिस्थितियों के संबंध में सुझाव प्राप्त किए गए। आरक्षण की वर्तमान व्यवस्था को यथावत रखने अथवा उसमें आवश्यक परिवर्तन किए जाने से संबंधित विचार भी संकलित किए गए। प्राप्त सुझावों एवं उपलब्ध आंकड़ों को समेकित कर आयोग के समक्ष प्रस्तुत करने तथा निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार शासन को प्रेषित किए जाने के संबंध में चर्चा की गई।
बैठक का मुख्य उद्देश्य स्थानीय निकायों में अन्य पिछड़ा वर्ग की विभिन्न जातियों के प्रतिनिधित्व एवं सामाजिक-आर्थिक स्थिति का तथ्यपरक आकलन करना, प्रतिनिधित्व से संबंधित कमियों की पहचान करना तथा संवैधानिक प्रावधानों एवं प्रासंगिक न्यायिक निर्देशों के अनुरूप आवश्यक अध्ययन सुनिश्चित करना रहा।