किसानों के खेतों में लहलाएगी सीएसए द्वारा नवविकसित सरसों की प्रजाति गोवर्धन
हिंदुस्तान न्यूज़ एक्सप्रेस कानपुर | भारत सरकार के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के अंतर्गत केंद्रीय बीज समिति ने सीएसए द्वारा नवविकसित सरसों की प्रजाति की अधिसूचना नोटिफिकेशन नम्बर एसओ 2123 (इ)31.दिसंबर.2025 को पूरे देश में बिक्री हेतु घोषणा की है। इस नवीन प्रजाति को खेती के लिए मंजूरी दे दी गई है और ये उत्तर प्रदेश में सरसों क्षेत्र की वृद्धि और उत्पादकता में योगदान देने के लिए तैयार हैं।कृषि विश्वविद्यालय कानपुर के सरसों अभिजनक /प्रोफेसर डॉक्टर महक सिंह ने बताया कि नवविकसित सरसों प्रजाति उत्तर प्रदेश के सभी कृषि-जलवायु परिस्थितियों में खेती के लिए अतिविलम्ब की दशा में (20 से 30 नवंबर ) उपयुक्त है। इस किस्म से किसानों को बेहतर पैदावार और प्रचलित बीमारियों और कीटों के प्रति प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने की क्षमता है। डॉ सिंह ने बताया कि विकसित सरसों की प्रजाति "गोवर्धन" (केएमआर एल 17_5) असाधारण विशेषताओं को प्रदर्शित करती है जो इसे किसानों के लिए उपलब्ध सरसों की किस्मों के साथ एक मूल्यवान अतिरिक्त क़िस्म बनाती है। यह किस्म अपनी उच्च उत्पादकता क्षमता और अनुकूलनशीलता के साथ सरसों की खेती के परिदृश्य में महत्वपूर्ण योगदान देने के साथ ही उत्पादन के क्षेत्र में गेम-चेंजर होने की पूरी उम्मीद है। इस किस्म में उच्च तेल सामग्री और जैविक तथा अजैविक तनावों का प्रतिरोध शामिल है,जो इसे बेहतर पैदावार और लचीलापन चाहने वाले किसानों के लिए एक पसंदीदा विकल्प बनाता है। उन्होंने बताया कि इसमें तेल की मात्रा अधिक (लगभग 39.6%) है, फसल 120-125 दिनों में पककर तैयार होती है, और यह राष्ट्रीय किस्मों से 7.81% अधिक उपज देती है, जो इसे किसानों के लिए एक वरदान बनाती है। निदेशक शोध डॉ आरके यादव ने बताया कि सरसों की इस नई प्रजाति के आने से किसानों को उनकी विशिष्ट कृषि आवश्यकताओं और भौगोलिक परिस्थितियों के अनुरूप व्यापक विकल्प उपलब्ध होने की पूरी उम्मीद है। उन्होंने बताया कि देश भर के विभिन्न क्षेत्रों के लिए गुणवत्ता मानकों, उत्पादकता क्षमता और उपयुक्तता के अनुरूपता सुनिश्चित करने के लिए किस्म का कठोर परीक्षण और मूल्यांकन किया गया है। विश्वविद्यालय के मीडिया प्रभारी डॉक्टर खलील खान ने बताया कि केंद्रीय बीज समिति द्वारा इस भारतीय सरसों की प्रजाति को मंजूरी देना कृषि नवाचार को बढ़ावा देने,फसल उत्पादकता बढ़ाने और खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने तथा तिलहन मिशन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। आनुवंशिक विविधता और उन्नत सरसों की किस्मों की उपलब्धता का विस्तार करके, सरकार का लक्ष्य किसानों को उच्च पैदावार, बेहतर फसल गुणवत्ता और बढ़ी हुई लाभप्रदता प्राप्त करने में सहायता करना है। मंडलायुक्त एवं विश्वविद्यालय के कुलपति के विजयेंद्र पांडियन ने सरसों की गोवर्धन प्रजाति विकसित करने वाले वैज्ञानिकों की टीम को बधाई एवं शुभकामनाएं दी। उन्होंने कहा कि निश्चित तौर पर यह प्रजाति देश एवं प्रदेश के किसानों के लिए वरदान साबित होगी।
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