यूपीयूएमएस सैफई में पहली बार हैबिचुअल शोल्डर डिस्लोकेशन का सफल ऑपरेशन
*ऑर्थोपेडिक्स विभाग ने जटिल मामले में हासिल की बड़ी उपलब्धि
हिंदुस्तान न्यूज़ एक्सप्रेस सैफई इटावसै।सैफई स्थित उत्तर प्रदेश आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय (यूपीयूएमएस) के ऑर्थोपेडिक्स विभाग में पहली बार हैबिचुअल शोल्डर डिस्लोकेशन के एक अत्यंत जटिल मामले का सफल शल्य उपचार किया गया। यह उपलब्धि संस्थान के लिए चिकित्सा क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हुई है।
मरीज श्री राजवीर (उम्र 55 वर्ष), निवासी इटावा, को लगभग पाँच वर्ष पूर्व दाहिने कंधे में पहली बार चोट लगने के बाद कंधा उतरने की समस्या शुरू हुई थी। इसके बाद उन्हें 12 से अधिक बार कंधा उतरने की गंभीर परेशानी का सामना करना पड़ा। समय के साथ स्थिति इतनी बिगड़ गई कि महीने में दो बार तक कंधा उतरने लगा। मरीज ने कई अस्पतालों में उपचार कराया, जहाँ हर बार केवल कंधा चढ़ाकर अस्थायी राहत दी गई, लेकिन स्थायी समाधान नहीं मिल सका।
इसके पश्चात मरीज ने यूपीयूएमएस सैफई के ऑर्थोपेडिक्स विभाग में डॉ सुनील कुमार की यूनिट के डॉ. ऋषभ अग्रवाल से परामर्श लिया। विभागाध्यक्ष प्रो. डॉ. सुनील कुमार के निर्देशन में मरीज को भर्ती कर शल्य चिकित्सा की योजना बनाई गई। वरिष्ठ हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. हरीश कुमार ने बताया कि विस्तृत क्लिनिकल जांच, एमआरआई एवं सीटी स्कैन के बाद यह स्पष्ट हुआ कि लंबे समय से बार-बार कंधा उतरने के कारण ग्लेनॉइड हड्डी के किनारे गोल हो चुके थे तथा 16 प्रतिशत से अधिक हड्डी का नुकसान हो चुका था। साथ ही ह्यूमरस हड्डी में बड़ा हिल-सैक्स लीज़न भी पाया गया।
कुल मिलाकर यह 35 प्रतिशत से अधिक बाइपोलर बोन डिफेक्ट का मामला था, कंधा खिसकने में अब ज्यादा दिक्कत या दर्द नहीं होता था जिसे हैबिचुअल शोल्डर डिस्लोकेशन की श्रेणी में रखा जाता है।
मरीज आयुष्मान भारत योजना के अंतर्गत लाभार्थी होने के कारण उसका संपूर्ण उपचार निःशुल्क किया गया। विभागाध्यक्ष प्रो. डॉ. सुनील कुमार के निर्देशन में डॉ. हरीश कुमार, डॉ. ऋषभ अग्रवाल एवं उनकी टीम ने संशोधित लैटार्जे (Modified Latarjet) ऑपरेशन सफलतापूर्वक किया, जिसमें कोराकोइड हड्डी का उपयोग कर कंधे के ग्लेनॉइड दोष को भरा गया।
ऑपरेशन के बाद मरीज संतुष्ट है और वर्तमान में पोस्ट-ऑपरेटिव पुनर्वास (रीहैबिलिटेशन) की प्रक्रिया में है। इस जटिल शल्य प्रक्रिया में ऑर्थोपेडिक्स विभाग के रेज़िडेंट डॉक्टरों एवं स्टाफ का महत्वपूर्ण योगदान रहा। एनेस्थीसिया सेवा डॉ. दीपीका दोनेरिया एवं उनकी टीम द्वारा प्रदान की गई।