राज्यपाल ने राजकीय बाल सुधार गृह (बालिका) का किया निरीक्षण
- बालिकाओं से संवाद कर शैक्षणिक, मानसिक एवं आवासीय व्यवस्थाओं का लिया फीडबैक
- शिक्षा, अनुशासन और कौशल विकास पर दिया जोर, आत्मनिर्भर बनने के लिए किया प्रेरित
कानपुर। प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने रविवार को स्वरुप नगर स्थित राजकीय बाल सुधार गृह (बालिका) का निरीक्षण किया। उन्होंने बालिका गृह में निवासित बालिकाओं से संवाद कर शैक्षणिक, आवासीय, पोषण एवं मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी व्यवस्थाओं की स्थिति का फीडबैक प्राप्त किया।
राज्यपाल ने बालिकाओं को शिक्षा को जीवन का आधार बताते हुए कहा कि शिक्षित और संस्कारित बेटियाँ समाज को दिशा देने का कार्य करती है। सलाह देते हुए कहा, कि
नियमित रूप से डायरी लेखन करे इससे आत्ममूल्यांकन, अनुशासन और लक्ष्यबद्ध जीवन-शैली विकसित होती है। बालिकाओं को कौशल विकास कार्यक्रमों से जोड़ने के निर्देश देकर कहा कि संस्थागत देखरेख का उद्देश्य केवल संरक्षण नहीं, बल्कि बालिकाओं को आत्मनिर्भर और सशक्त नागरिक के रूप में तैयार करना है। इस दौरान उन्होंने बालिकाओं से प्रश्न पूछे, जिनका उत्तर उन्होंने आत्मविश्वास और स्पष्टता से दिया। महामहिम ने राजभवन से लाई गई पुस्तकें एवं उपयोगी सामग्री बालिकाओं को भेंट की। इस अवसर पर बालिकाओं ने भी सृजनात्मक अभिव्यक्ति के रूप में स्वयं द्वारा तैयार की गई पेंटिंग्स एवं स्मृति-चिह्न उनहे को भेंट की। निरीक्षण के दौरान राज्यपाल ने विवि की छात्राओं से संवाद किया, जो बालिका गृह की बालिकाओं की मनोवैज्ञानिक काउंसलिंग से जुड़ी हैं। इस प्रयास की सराहना कर कहा कि मानसिक परामर्श बालिकाओं के भावनात्मक संतुलन, आत्मविश्वास और पुनर्वास प्रक्रिया का महत्वपूर्ण आधार है। राज्यपाल ने परिसर में स्थित पुस्तकालय, रसोईघर, भंडारगृह, आवासीय कक्षों सहित अन्य सुविधाओं का निरीक्षण किया। राजभवन से आई टीम द्वारा बालिका गृह की व्यवस्थाओं का समग्र मूल्यांकन कर रिपोर्ट तैयार की गई है, जिसके आधार पर आवश्यक सुधारात्मक एवं विकासात्मक कदम उठाए जाएंगे। इस अवसर पर मंडलायुक्त के. विजयेंद्र पांडियन, पुलिस आयुक्त रघुबीर लाल, जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह, मुख्य विकास अधिकारी दीक्षा जैन, छत्रपति शाहूजी महाराज विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. विनय पाठक सहित अन्य संबंधित अधिकारीगण एवं गणमान्यजन उपस्थित रहे।