जनकल्याणकारी नीतियों से पारिवारिक विवादों को मिलेगा समाधान : रविन्द्र जायसवाल |
हिंदुस्तान न्यूज़ एक्सप्रेस कानपुर | राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार), स्टाम्प, न्यायालय एवं पंजीयन विभाग, रविन्द्र जायसवाल ने प्रिंट एवं इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से वार्ता करते हुए स्टाम्प एवं पंजीयन विभाग द्वारा उत्तर प्रदेश शासन की महत्वाकांक्षी, लोकहितकारी एवं जनोपयोगी नीतियों की विस्तृत जानकारी दी। सरकार मंत्री ने बताया कि प्रदेश सरकार सम्पत्ति से सम्बन्धित पारिवारिक विवादों के निस्तारण की दिशा में निरन्तर प्रभावी कदम उठा रही है। इसी क्रम में स्टाम्प एवं पंजीयन विभाग द्वारा आमजन के कल्याण हेतु अनेक महत्वपूर्ण नीतियाँ लागू की गई हैं, जिससे पारिवारिक विवादों के समाधान में जनता का समय एवं धन अनावश्यक रूप से व्यय न हो। उन्होंने बताया कि दान विलेख एवं पैतृक पारिवारिक विभाजन विलेख के पंजीकरण में स्टाम्प शुल्क में विशेष छूट प्रदान की गई है। पूर्व में यह छूट केवल आवासीय एवं कृषि सम्पत्तियों के अन्तरण तक सीमित थी, जिसे विस्तार देते हुए अब व्यावसायिक एवं औद्योगिक सम्पत्तियों के अन्तरण को भी सम्मिलित कर लिया गया है। इसके अंतर्गत अब पारिवारिक सदस्य कृषि, आवासीय, व्यावसायिक एवं औद्योगिक सम्पत्तियों का दान विलेख मात्र रुपये 5,000 के स्टाम्प शुल्क पर पंजीकृत करा सकते हैं।
इसी प्रकार 04 सितम्बर, 2025 को जारी अधिसूचना के अन्तर्गत तीन पीढ़ियों तक की पैतृक सम्पत्तियों के विभाजन विलेख का पंजीकरण परिवार के वंशज रुपये 5,000 स्टाम्प शुल्क एवं रुपये 5,000 निबन्धन शुल्क अदा कराकर करा सकते हैं। मंत्री ने यह भी बताया कि प्रदेश सरकार नारी सशक्तिकरण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से महिलाओं को स्टाम्प शुल्क में दी जाने वाली छूट को रुपये 10,000 से बढ़ाकर रुपये 1,00,000 कर दिया गया है। साथ ही किरायेदारी विलेखों के पंजीकरण को प्रोत्साहित करने हेतु लीज विलेखों में भी स्टाम्प एवं निबन्धन शुल्क में विशेष छूट प्रदान की गई है। इसके अंतर्गत अब कोई भी व्यक्ति 10 वर्ष तक की किरायेदारी, जिसका औसत वार्षिक किराया रुपये 10 लाख तक हो, को मात्र रुपये 10,000 स्टाम्प शुल्क एवं रुपये 10,000 निबन्धन शुल्क अदा कराकर पंजीकृत करा सकता है। मंत्री ने कहा कि स्टाम्प एवं पंजीयन विभाग भविष्य में भी इसी प्रकार की लोककल्याणकारी नीतियों के निर्माण हेतु सतत् प्रयासरत है, जिससे सम्पत्ति सम्बन्धी विवादों का प्रभावी निस्तारण हो सके और न्यूनतम व्यय में आमजन को शासन की जनोपयोगी योजनाओं का अधिकतम लाभ प्राप्त हो सके।